फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Literary writer Dushyant used to win the hearts of people by acting of Laxman

साहित्यकार दुष्यंत त्यागी के जन्मदिन पर विशेष

Thu, 01 Sep 2022 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 12:21 AM IST
विज्ञापन
Literary writer Dushyant used to win the hearts of people by acting of Laxman
लक्ष्मण के अभिनय से लोगों का दिल जीत लेते थे साहित्यकार दुष्यंत
विज्ञापन

नजीबाबाद। हिंदी के गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार त्यागी महान साहित्यकार ही नहीं थे बल्कि उनके भीतर एक मंचीय कलाकार भी छिपा था। दशहरा से पूर्व दुष्यंत अपने गांव राजपुर नवादा आकर रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका से सबका दिल जीत लेते थे।
नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 को जन्मे दुष्यंत कुमार को उनके बालसखा 92 वर्षीय सत्य कुमार त्यागी भुला नहीं पाते। उनके पास दुष्यंत ने जो चिट्ठियां अपने पिता भगवत सहाय को लिखीं, वह आज भी सुरक्षित है।
विज्ञापन

सत्य कुमार त्यागी बताते है कि दुष्यंत कुमार त्यागी ने बाल्यकाल से ही काव्य रचनाओं का सृजन शुरू किया। आम आदमी के दर्द को उन्होंने महसूस किया। साहित्य सृजन की नींव मजबूत हुई और दुष्यंत महान साहित्यकार बने। हिंदी गजल से उन्होंने दुनिया में अपना नाम रोशन किया। उन्होंने बताया कि दुष्यंत त्यागी के हृदय में आम आदमी का दर्द समाया था। जिसे उन्होंने लेखनी के माध्यम से समाज में बांटा। दशहरा से 10 दिन पहले दुष्यंत कुमार गांव आ जाया करते थे। गांव के लोगों को जोड़कर रामलीला का आयोजन किया करते थे, स्वयं लक्ष्मण की भूमिका निभाते थे, उनकी आवाज के ग्रामीण कायल थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

घर में बनाया था पुस्तकालय
नजीबाबाद। दुष्यंत कुमार त्यागी ने अपने घर के एक कमरे में पुस्तकालय की स्थापना की थी। गांव में अखबार, पत्रिकाएं आदि नहीं पहुंचती थीं। दुष्यंत जब भी गांव आया करते थे अपने साथ काफी पुरानी पत्रिकाएं और अखबार साथ लाते थे। ग्रामीणों को उन पत्र पत्रिकाओं को पढ़वाते थे और स्वयं भी पढ़ा करते थे। गांव का पुस्तकालय कक्ष आज खस्ताहाल हालत में है।
ग्रामीणों को संग्रहालय का इंतजार
नजीबाबाद। महान साहित्यकार दुष्यंत त्यागी की स्मृति में छह करोड़ की लागत से बनने वाले संग्रहालय के जल्द परवान चढ़ने की उम्मीद है। जिला प्रशासन द्वारा संग्रहालय बनवाने का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। शासन की मुहर लगते ही महान साहित्यकार की याद में बनने वाला संग्रहालय साहित्यकारों और आने वाली पीढ़ियों के लिए वरदान साबित होगा।

स्मृति में बनाया गया द्वार
नजीबाबाद। ब्लॉक कार्यालय ने एक साल पहले साहित्यकार दुष्यंत त्यागी के गांव से पूर्व तीन किलोमीटर पूर्व मंडावली-नांगल मार्ग पर कविराज दुष्यंत त्यागी स्मृति द्वार की स्थापना की थी। यह द्वार आज भी यहां से गुजरने पर लोगों को महान गजल गायक की याद दिलाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed