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जान जोखिम में डाल गंगा पार की, सात किलोमीटर पैदल चले, फिर किया मतदान
Fri, 12 Apr 2019 12:37 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Fri, 12 Apr 2019 12:37 AM IST
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मंडावर क्षेत्र में जान हथेली पर रखकर नाव से मतदान करने जाते गांव इच्छावाला के मतदाता।
- फोटो : अमर उजाला
मंडावर में लोकतंत्र के महापर्व का चरम उत्साह गंगा पार के गांव इच्छावाला के मतदाताओं में नजर आया। मतदाताओं ने जान जोखिम में डालकर नाव से गंगा पार कर सात किलोमीटर दूर जाकर मतदान किया। मतदान करके इन मतदाताओं ने वोट मांगकर गायब हो जाने वाले जनप्रतिनिधियों को भी आईना दिखाया। मतदान कर्मियों ने भी गांव इच्छावाला के गांव वालों के इस जज्बे की प्रशंसा की।
गांव इच्छावाला गंगा पार बसा है। गंगा की धारा के दूसरी ओर होने के कारण यह जिला मुख्यालय से कटा रहता है। गांव वालों को हर काम के लिए नाव से गंगा पार करके आना पड़ता है। नाव से गंगा पार करते समय कई बार जानलेवा हादसे भी होते हैं, लेकिन ये लोग हिम्मत नहीं हारते। अपने दैनिक कार्यों के लिए जान जोखिम में डालकर गंगा पार करने वाले गांव इच्छावाला के लोगों ने मतदान के लिए भी जान की परवाह नहीं की। गांव के वोट गंगा की धारा के इस ओर गांव राजारामपुर में थे। गांव इच्छावाला के मतदाताओं ने नाव से आकर और इसके बाद भी करीब सात किलोमीटर का सफर तय करके गांव राजारामपुर में जाकर वोट डाले। ग्राम प्रधान गुल सनव्वर का कहना था कि गांव में करीब 400 वोट हैं। गांव में कोई भी सरकारी सुविधा नहीं है, न कोई पक्का मकान है और न ही कोई सड़क। अगर वोट डालने के लिए आते वक्त गंगा में कोई हादसा हो जाए तब भी गांव वालों को बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि उनके गांव में नहीं आया है। इसके बाद भी गांव वाले वोट डालने के लिए आए हैं, क्योंकि मतदान करने को वे अपना कर्तव्य मानते हैं। कहा कि गांव वालों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया है।
एक ओर से गंगा पार करने का दस रुपये किराया लगता है, यह किराया भी गांव वालों ने अपनी जेब से भरा है। गांव वालों के अनुसार वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो गंगा किनारे विषम परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे किसानों का दर्द समझे। गंगा के कटान से होने वाले नुकसान पर अंकुश लगाए। इसलिए ही वे अपनी जान को जोखिम में डालकर गंगा पार करके मतदान करने आए हैं।
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गांव इच्छावाला गंगा पार बसा है। गंगा की धारा के दूसरी ओर होने के कारण यह जिला मुख्यालय से कटा रहता है। गांव वालों को हर काम के लिए नाव से गंगा पार करके आना पड़ता है। नाव से गंगा पार करते समय कई बार जानलेवा हादसे भी होते हैं, लेकिन ये लोग हिम्मत नहीं हारते। अपने दैनिक कार्यों के लिए जान जोखिम में डालकर गंगा पार करने वाले गांव इच्छावाला के लोगों ने मतदान के लिए भी जान की परवाह नहीं की। गांव के वोट गंगा की धारा के इस ओर गांव राजारामपुर में थे। गांव इच्छावाला के मतदाताओं ने नाव से आकर और इसके बाद भी करीब सात किलोमीटर का सफर तय करके गांव राजारामपुर में जाकर वोट डाले। ग्राम प्रधान गुल सनव्वर का कहना था कि गांव में करीब 400 वोट हैं। गांव में कोई भी सरकारी सुविधा नहीं है, न कोई पक्का मकान है और न ही कोई सड़क। अगर वोट डालने के लिए आते वक्त गंगा में कोई हादसा हो जाए तब भी गांव वालों को बचाने की कोई व्यवस्था नहीं है। आज तक कोई भी जनप्रतिनिधि उनके गांव में नहीं आया है। इसके बाद भी गांव वाले वोट डालने के लिए आए हैं, क्योंकि मतदान करने को वे अपना कर्तव्य मानते हैं। कहा कि गांव वालों ने बढ़ चढ़कर मतदान किया है।
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एक ओर से गंगा पार करने का दस रुपये किराया लगता है, यह किराया भी गांव वालों ने अपनी जेब से भरा है। गांव वालों के अनुसार वे ऐसी सरकार चाहते हैं जो गंगा किनारे विषम परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे किसानों का दर्द समझे। गंगा के कटान से होने वाले नुकसान पर अंकुश लगाए। इसलिए ही वे अपनी जान को जोखिम में डालकर गंगा पार करके मतदान करने आए हैं।
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