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रोचक किस्सा: आगरा छोड़ बिजनौर के जोगीपुरा में शाहजहां के सिपहसालार ने बनाया था ठिकाना

Fri, 19 May 2023 02:29 PM IST
मेरठ ब्यूरो अचल चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
अचल चौधरी, संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर Updated Fri, 19 May 2023 02:29 PM IST
सार

शाहजहां खास सिपहसालार रहे सैय्यद राजू आगरा किले की सुरक्षा का जिम्मा संभाला करते थे। औरंगजेब के अपने पिता को बंदी बनाकर सत्ता हड़पने के बाद सैय्यद राजू जोगीपुरा आए गए थे। सैय्यद राजू ने ही दरगाहे आलिया नज्फे हिंद की नींव रखीं थी।

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Leaving Agra, Shahjahan's warlord built a base in Jogipura
जोगीरम्पुरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिजनौर के जोगीपुरा, अब जोगीरम्पुरी का नाता औरंगजेब के शासनकाल से जुड़ा रहा है। दरअसल, आगरा किले में शाहजहां को बंदी बना लिए जाने के पर उनके खास सिपहसालार रहे सैय्यद राजू ने अपना ठिकाना जोगीम्पुरी में बनाया। जीवन के अंतिम दिनों तक वे यहीं रहे और दरगाहे आलिया की नींव रखी।

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25 मई से जोगीरम्पुरी स्थित दरगाहे आलिया में मजलिसों का दौर शुरू होने वाला है। यह दरगाह शिया समुदाय की आस्था का खास केंद्र है। सिर्फ भारत के अलग-अलग हिस्सों से नहीं बल्कि ईरान और अन्य मुल्कों से भी यहां जायरीन पहुंचते हैं। यह दरगाह सैय्यद राजू की इबादत की वजह से ही तामीर हो सकी। बताते हैं साल 1657 में शाहजहां बीमार हो गए थे। ऐसे में दारा शिकोह, शाह शुजा और औरंगजेब के बीच में मुगल सत्ता को पाने के लिए संघर्ष हुआ। शाह शुजा ने खुद को बंगाल का राज्यपाल घोषित कर लिया था।
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1658 में औरंगजेब ने शाहजहां को आगरा किले में बंदी बना लिया और खुद को शासक घोषित किया। दारा शिकोह को विश्वासघात के आरोप में फांसी दे दी गई थी। उस वक्त शाहजहां के खास सिपहसालार सैय्यद राजू हुआ करते थे। जिन्हें आगरा किले की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी। औरंगजेब का विरोध करने पर सैय्यद राजू की जान खतरे में पड़ गई थी।

औरंगजेब ने सैय़्यद राजू को पकड़ने के लिए वारंट जारी कर दिए थे। जिस पर सैय्यद राजू ने बिजनाैर के जोगीपुरा को अपना ठिकाना बना लिया। जो जोगीपुरा के निकट वन क्षेत्र में रहते थे। यहां आकर नाद ए अली की इबादत करने लगे। सैय्यद राजू सुबह वन में पहुंच जाते और बस्ती में मरगिब की नमाज के बाद ही आते थे।
 

बूढ़े ब्राह्मण को मिली थी आंखों की रोशनी
बतातें हैं कि एक दिन बूढ़ा ब्राह्मण वन में घास लेने गया था। तभी उसे घोड़ों के आने आहट सुनाई दी। ब्राह्मण ने समझा कि शाही फौज सैय्यद राजू को गिरफ्तार करने आ गई है। उसने वहां से भागना चाहा, तभी घोड़ों पर आए लश्कर के सरदार ने उसे बुलाया और सैय्यद राजू को बुलाकर लाने को कहा। ब्राह्मण ने कहा कि उसकी आंखें कमजोर हो गई हैं, इसलिए जल्दी नहीं पहुंच सकता। जिस पर ब्राह्मण को रोशनी की सौगात मिल गई थी।

ब्राह्मण के संदेशा पहुंचाने पर सैय्यद राजू मौके पर पहुंचे तो उस जगह घोड़े के मुंह के झाग और पैरों के निशान ही मिल पाए। इन निशानों को सुरक्षित रखने के लिए सैय्यद राजू ने ईंटों से एक चौकी बना दी थी, बाद में चौकी पर दरगाह की बुनियाद डाली। बाद में रामपुर के नवाब ने एक चौड़ी दरगाह और एक इमामबाड़ा बनवाया।

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