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जिले में बासमती धान की नई प्रजातियों की दस्तक
Thu, 30 May 2019 12:02 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Thu, 30 May 2019 12:02 AM IST
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बिजनौर में पंजाब में बासमती धान की पैदावार का रिकॉर्ड बनाने वाली नई प्रजाति अब जिले में धमाल मचाएगी। जिले में यह प्रजाति आ गई है। नर्सरी तैयार करने के लिए बीज जिले के राजकीय बीज बिक्री केंद्र पर उपलब्ध है। इसी के साथ प्रशासन ने मध्य महीन व सामान्य धान के बीज की भी कई किस्म मंगवाई है।
शासन का बासमती धान की पैदावार बढ़ाने पर जोर है। पिछले साल किसानों ने बासमती धान का रकबा बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई थी। इसके कारण जिले में बासमती धान का रकबा बढ़कर 30 हजार हेक्टेयर हो गया था। प्रशासन इससे उत्साहित है। बासमती चावल का रकबा बढ़ाने के लिए बीज व खाद की सुविधा देने में जुटा है। जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्र के अनुसार जिले में बासमती धान की नर्सरी जून में डलनी शुरू होगी। जो 15 जून तक चलेगी । जून के तीसरे सप्ताह में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। विभाग ने बासमती धान की नर्सरी डालने के लिए पंजाब से नई प्रजाति पीबी 1509 मंगवाई है। यह प्रजाति जिले में पहली बार आई है। प्रजाति जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल है। इसकी पैदावार 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
मिश्र के मुताबिक पूसा इंस्टीट्यूट दिल्ली से मध्य महीन धान की प्रजाति पीआर 124 व पंतनगर से सामान्य प्रजाति का पंत धान 24 , फैजाबाद से एनडीआर 2065 प्रजाति मंगवाई गई है। सभी प्रजाति की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान है। अनुदान अधिकतम दो हजार रुपये होगा। बीज सीमित मात्रा में हैं। किसान दलालों के चक्कर में न पड़े। सीधे राजकीय बीज केंद्र पर जाएं। परेशानी के लिए जिला कृषि अधिकारी के दफ्तर में संपर्क करें।
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बासमती धान के मिलती हैं अच्छे रेट
बिजनौर। बासमती धान की जबरदस्त मांग है। बासमती चावल विदेश में भी जाता है। जिले के कुछ व्यापारी विदेशी व्यापारियों के साथ संपर्क में हैं। दिल्ली के व्यापारी किसान के खेत पर आकर ही बासमती धान की खरीददारी कर लेते.हैं। किसान को घर बैठे रेट भी अच्छे मिल जाते हैं। आने-जाने के खर्च की बचत होती है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार विभाग भी बासमती धान की बिक्री में किसानों को सलाह मशविरा देता है।
जिले में ही तैयार होगा नई प्रजाति का बीज
बिजनौर। जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्र के अनुसार अब विभाग बासमती चावल की प्रजाति पीबी 1637, पीबी 1718 व पीबी 1509 का बीज जिले में ही पैदा करेगा। किसानों को इन प्रजातियों का बीज अगले साल से मिलने लगेगा। बीज राजकीय कृषि फार्म कादराबाद व पृथ्वीपुर में करीब 30 हजार हेक्टेयर में पैदा किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने इस पर काम शुरू कर दिया है।
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शासन का बासमती धान की पैदावार बढ़ाने पर जोर है। पिछले साल किसानों ने बासमती धान का रकबा बढ़ाने में दिलचस्पी दिखाई थी। इसके कारण जिले में बासमती धान का रकबा बढ़कर 30 हजार हेक्टेयर हो गया था। प्रशासन इससे उत्साहित है। बासमती चावल का रकबा बढ़ाने के लिए बीज व खाद की सुविधा देने में जुटा है। जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्र के अनुसार जिले में बासमती धान की नर्सरी जून में डलनी शुरू होगी। जो 15 जून तक चलेगी । जून के तीसरे सप्ताह में धान की रोपाई शुरू हो जाएगी। विभाग ने बासमती धान की नर्सरी डालने के लिए पंजाब से नई प्रजाति पीबी 1509 मंगवाई है। यह प्रजाति जिले में पहली बार आई है। प्रजाति जिले की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल है। इसकी पैदावार 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।
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मिश्र के मुताबिक पूसा इंस्टीट्यूट दिल्ली से मध्य महीन धान की प्रजाति पीआर 124 व पंतनगर से सामान्य प्रजाति का पंत धान 24 , फैजाबाद से एनडीआर 2065 प्रजाति मंगवाई गई है। सभी प्रजाति की खरीद पर 50 प्रतिशत अनुदान है। अनुदान अधिकतम दो हजार रुपये होगा। बीज सीमित मात्रा में हैं। किसान दलालों के चक्कर में न पड़े। सीधे राजकीय बीज केंद्र पर जाएं। परेशानी के लिए जिला कृषि अधिकारी के दफ्तर में संपर्क करें।
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बासमती धान के मिलती हैं अच्छे रेट
बिजनौर। बासमती धान की जबरदस्त मांग है। बासमती चावल विदेश में भी जाता है। जिले के कुछ व्यापारी विदेशी व्यापारियों के साथ संपर्क में हैं। दिल्ली के व्यापारी किसान के खेत पर आकर ही बासमती धान की खरीददारी कर लेते.हैं। किसान को घर बैठे रेट भी अच्छे मिल जाते हैं। आने-जाने के खर्च की बचत होती है। जिला कृषि अधिकारी के अनुसार विभाग भी बासमती धान की बिक्री में किसानों को सलाह मशविरा देता है।
जिले में ही तैयार होगा नई प्रजाति का बीज
बिजनौर। जिला कृषि अधिकारी अवधेश कुमार मिश्र के अनुसार अब विभाग बासमती चावल की प्रजाति पीबी 1637, पीबी 1718 व पीबी 1509 का बीज जिले में ही पैदा करेगा। किसानों को इन प्रजातियों का बीज अगले साल से मिलने लगेगा। बीज राजकीय कृषि फार्म कादराबाद व पृथ्वीपुर में करीब 30 हजार हेक्टेयर में पैदा किया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों ने इस पर काम शुरू कर दिया है।