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क्रांतिकारियों की याद में बने कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण
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फीना में कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण
शिवाला कला। गांव फीना में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण किया गया। अगस्त क्रांति की 79वीं सालगिरह फीना वासियों ने अनूठे ढंग से मनाई। गांव के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति को सहेजने के लिए कारगिल शहीद नायक अशोक कुमार की समाधि के निकट फीना ग्राम कल्याण समिति ने एक भव्य स्वतंत्र संग्राम सेनानी कीर्ति स्तंभ का निर्माण कराया। सोमवार को इस कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप जिला अधिकारी चांदपुर, समाजसेवी रुमाल सिंह, चांदपुर विधायक कमलेश सैनी रहे। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के विभिन्न चरणों में जैसे 1932 के सभी ने अवज्ञा आंदोलन, 1941 के व्यक्ति सत्याग्रह एवं 1942 के अगस्त क्रांति आंदोलन में फीना वासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा ध्वज फहराने के लिए एक जुलूस फीना की ओर से क्षेत्रपाल सिंह, डॉक्टर भारत सिंह एवं होरी सिंह के नेतृत्व में, दूसरा जुलूस महावर की ओर से प्रवीण सिंह, विक्की सिंह एवं नारायण सिंह आदि के नेतृत्व में तीसरा जुलूस ताजपुर की ओर से डॉ. राजकुमार जी के नेतृत्व में नूरपुर पहुंचा। फीना के जुलूस को तितर-बितर करने के लिए नोट कोड डाक बंगले के समीप पुलिस ने लाठीचार्ज किया गया। लेकिन आंदोलनकारी विभिन्न रास्तों से होकर नूरपुर-धामपुर वाली सड़क पर थाने के निकट पहुंच कर एकत्रित हुए। थाने पर झंडा फहराने से रोकने के लिए पुलिस ने जुलूस को पीछे करने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारी आगे बढ़ते गए।
इसी बीच पुलिस की ओर से फायरिंग कर दी गई। जिसमें बुनिया खेड़ी के प्रवीण सिंह शहीद हो गए। विक्की सिंह जेल अस्पताल में आकर वीरगति को प्राप्त हुए। राम जी की टांग में गोली लगी थी, उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद गांव में चारों ओर पुलिस का आतंक फैल गया। गांव गांव में लूट हुई लोगों को पीटा भी गया। फल स्वरूप गोविंद सहाय जी की सलाह पर एक इश्तहार निकाला गया, जो डीएम एवं एसपी को भेजा गया। जिसका शीर्षक था आम जनता को न सताओ। नूरपुर में जो कुछ हुआ हमने किया है। हम इस सरकार को सरकार नहीं समझते, हम इस सरकार को हटाना चाहते हैं। हम हैं नारायण सिंह गांव गोहावर, क्षेत्रपाल सिंह एवं डॉक्टर भारत सिंह गांव फीना, भूप सिंह गांव ढेली अहीर, चंद्रपाल सिंह गांव झूझैला।
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नूरपुर प्रदर्शन के सिलसिले में फीना गांव के 16 व्यक्तियों को सजा हुई। फीना गांव को बागी मानते हुए 6000 रुपये का जुर्माना हुआ। जिन व्यक्तियों को कैद की सजा हुई थी उन्हें 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया। लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष विश्व पाल सिंह, हरीश कुमार चौहान, मनोज कुमार राजपूत, अशोक कुमार शास्त्री, थाना अध्यक्ष नीरज कुमार शर्मा, हरपाल सिंह, भूदेव सिंह राठौड़, रणवीर सिंह, शमशेर सिंह आदि मौजूद रहे।
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शिवाला कला। गांव फीना में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण किया गया। अगस्त क्रांति की 79वीं सालगिरह फीना वासियों ने अनूठे ढंग से मनाई। गांव के महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की स्मृति को सहेजने के लिए कारगिल शहीद नायक अशोक कुमार की समाधि के निकट फीना ग्राम कल्याण समिति ने एक भव्य स्वतंत्र संग्राम सेनानी कीर्ति स्तंभ का निर्माण कराया। सोमवार को इस कीर्ति स्तंभ का लोकार्पण हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि उप जिला अधिकारी चांदपुर, समाजसेवी रुमाल सिंह, चांदपुर विधायक कमलेश सैनी रहे। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन के विभिन्न चरणों में जैसे 1932 के सभी ने अवज्ञा आंदोलन, 1941 के व्यक्ति सत्याग्रह एवं 1942 के अगस्त क्रांति आंदोलन में फीना वासियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा ध्वज फहराने के लिए एक जुलूस फीना की ओर से क्षेत्रपाल सिंह, डॉक्टर भारत सिंह एवं होरी सिंह के नेतृत्व में, दूसरा जुलूस महावर की ओर से प्रवीण सिंह, विक्की सिंह एवं नारायण सिंह आदि के नेतृत्व में तीसरा जुलूस ताजपुर की ओर से डॉ. राजकुमार जी के नेतृत्व में नूरपुर पहुंचा। फीना के जुलूस को तितर-बितर करने के लिए नोट कोड डाक बंगले के समीप पुलिस ने लाठीचार्ज किया गया। लेकिन आंदोलनकारी विभिन्न रास्तों से होकर नूरपुर-धामपुर वाली सड़क पर थाने के निकट पहुंच कर एकत्रित हुए। थाने पर झंडा फहराने से रोकने के लिए पुलिस ने जुलूस को पीछे करने का प्रयास किया, लेकिन आंदोलनकारी आगे बढ़ते गए।
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इसी बीच पुलिस की ओर से फायरिंग कर दी गई। जिसमें बुनिया खेड़ी के प्रवीण सिंह शहीद हो गए। विक्की सिंह जेल अस्पताल में आकर वीरगति को प्राप्त हुए। राम जी की टांग में गोली लगी थी, उन्हें पकड़कर जेल भेज दिया गया। इस घटना के बाद गांव में चारों ओर पुलिस का आतंक फैल गया। गांव गांव में लूट हुई लोगों को पीटा भी गया। फल स्वरूप गोविंद सहाय जी की सलाह पर एक इश्तहार निकाला गया, जो डीएम एवं एसपी को भेजा गया। जिसका शीर्षक था आम जनता को न सताओ। नूरपुर में जो कुछ हुआ हमने किया है। हम इस सरकार को सरकार नहीं समझते, हम इस सरकार को हटाना चाहते हैं। हम हैं नारायण सिंह गांव गोहावर, क्षेत्रपाल सिंह एवं डॉक्टर भारत सिंह गांव फीना, भूप सिंह गांव ढेली अहीर, चंद्रपाल सिंह गांव झूझैला।
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नूरपुर प्रदर्शन के सिलसिले में फीना गांव के 16 व्यक्तियों को सजा हुई। फीना गांव को बागी मानते हुए 6000 रुपये का जुर्माना हुआ। जिन व्यक्तियों को कैद की सजा हुई थी उन्हें 15 अगस्त 1972 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की ओर से स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ताम्र पत्र देकर सम्मानित किया गया। लोकार्पण समारोह कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष विश्व पाल सिंह, हरीश कुमार चौहान, मनोज कुमार राजपूत, अशोक कुमार शास्त्री, थाना अध्यक्ष नीरज कुमार शर्मा, हरपाल सिंह, भूदेव सिंह राठौड़, रणवीर सिंह, शमशेर सिंह आदि मौजूद रहे।