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Bijnor News: आजीविका के लिए खादर वासी पार करते हैं खतरों की लहर
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- सैकड़ों किसान गंगा के पार जाकर करते हैं खेती का कामकाज
- पहले भी नाव पलटने से गंगा में डूब चुके हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। उफान की वजह से मंगलवार को नाव पलटने से गंगा में दो लोग डूब गए। नाव पलटने या डूबने का सिलसिला खादर में सालों से चला आ रहा है। दरअसल, पेट की भूख की खातिर खादरवासी जान जोखिम में डालकर खतरों की लहर को पार करते हुए खेती करने उस पार आते जाते हैं।
पहाड़ पर हो रही बरसात की वजह से मंगलवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.70 मीटर रहा। यह खतरे के निशान से महज 0.30 मीटर दूर है। खतरे का निशान 220 मीटर दूरी पर लगा हुआ है। उधर, बैराज के अप स्ट्रीम में गंगा में करीब एक लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। साथ ही धारा में भी तेजी है।
गंगा में उफान होने के बाद भी खादर के गांव सेवारामपुर के तीन लोग मंगलवार को गंगा के उस पार चारा लेने के लिए चले गए। लौटते हुए इनकी नाव पलट गई और दो लोग डूब गए, जबकि एक ग्रामीण तैरकर बच निकला। यह हादसा सिर्फ बानगी नहीं है बल्कि खादरवासियों के लिए हर रोज गंगा को पार करने की चुनौती होती है। गंगा की मझधार को पार ना करें तो इनके पशुओं को चारा नहीं मिलेगा और परिवार का भी लालन पोषण नहीं हो सकेगा।
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लोगों को नहीं किया गया अलर्ट
गंगा में उफान आने पर पुलिस प्रशासन की ओर से हमेशा लोगों को अलर्ट किया जाता है। गंगा से दूर रहने और नाव नहीं चलाने की हिदायत दी जाती है। मगर, सोमवार को पानी में उफान आया, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से कोई हिदायत खादर के लोगों को नहीं दी गई थी।
जेहन में ताजा हो गया छह साल पहले हुआ हादसा
25 अगस्त 2018 को गंगा खादर के गांव राजारामपुर और डैबलगढ़ के सामने ही गंगा में तेज बहाव के चलते एक नाव पलट गई थी। हादसे के वक्त नाव में 28 लोग सवार थे। गांव वालों और पुलिस-प्रशासन ने राहत बचाव कार्य कर 18 लोगों को बचा लिया था, जबकि 10 महिलाएं लापता हो गई थीं। लापता हुई सभी महिलाएं डैबलगड़ गांव की रहने वाली थीं। साल 2021 में दस नवंबर को भी गंगा में एक नाव पलट गई थी। इसमें 20 लोगों की जिंदगी खतरे में आ गईं थी। हालांकि समय रहते राहत और बचाव कार्य के बाद सभी को सुरक्षित निकाल लिया था।
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- पहले भी नाव पलटने से गंगा में डूब चुके हैं लोग
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। उफान की वजह से मंगलवार को नाव पलटने से गंगा में दो लोग डूब गए। नाव पलटने या डूबने का सिलसिला खादर में सालों से चला आ रहा है। दरअसल, पेट की भूख की खातिर खादरवासी जान जोखिम में डालकर खतरों की लहर को पार करते हुए खेती करने उस पार आते जाते हैं।
पहाड़ पर हो रही बरसात की वजह से मंगलवार को बिजनौर बैराज पर गंगा का जलस्तर 219.70 मीटर रहा। यह खतरे के निशान से महज 0.30 मीटर दूर है। खतरे का निशान 220 मीटर दूरी पर लगा हुआ है। उधर, बैराज के अप स्ट्रीम में गंगा में करीब एक लाख क्यूसेक पानी बह रहा है। साथ ही धारा में भी तेजी है।
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गंगा में उफान होने के बाद भी खादर के गांव सेवारामपुर के तीन लोग मंगलवार को गंगा के उस पार चारा लेने के लिए चले गए। लौटते हुए इनकी नाव पलट गई और दो लोग डूब गए, जबकि एक ग्रामीण तैरकर बच निकला। यह हादसा सिर्फ बानगी नहीं है बल्कि खादरवासियों के लिए हर रोज गंगा को पार करने की चुनौती होती है। गंगा की मझधार को पार ना करें तो इनके पशुओं को चारा नहीं मिलेगा और परिवार का भी लालन पोषण नहीं हो सकेगा।
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लोगों को नहीं किया गया अलर्ट
गंगा में उफान आने पर पुलिस प्रशासन की ओर से हमेशा लोगों को अलर्ट किया जाता है। गंगा से दूर रहने और नाव नहीं चलाने की हिदायत दी जाती है। मगर, सोमवार को पानी में उफान आया, लेकिन पुलिस प्रशासन की ओर से कोई हिदायत खादर के लोगों को नहीं दी गई थी।
जेहन में ताजा हो गया छह साल पहले हुआ हादसा
25 अगस्त 2018 को गंगा खादर के गांव राजारामपुर और डैबलगढ़ के सामने ही गंगा में तेज बहाव के चलते एक नाव पलट गई थी। हादसे के वक्त नाव में 28 लोग सवार थे। गांव वालों और पुलिस-प्रशासन ने राहत बचाव कार्य कर 18 लोगों को बचा लिया था, जबकि 10 महिलाएं लापता हो गई थीं। लापता हुई सभी महिलाएं डैबलगड़ गांव की रहने वाली थीं। साल 2021 में दस नवंबर को भी गंगा में एक नाव पलट गई थी। इसमें 20 लोगों की जिंदगी खतरे में आ गईं थी। हालांकि समय रहते राहत और बचाव कार्य के बाद सभी को सुरक्षित निकाल लिया था।