{"_id":"62950e991e2e6c3ac97c43e4","slug":"kanshi-ram-housing-turned-into-ruins-even-before-allotment-dhampur-news-mrt590850027","type":"story","status":"publish","title_hn":"आवंटन से पहले ही खंडहर में तब्दील हुए कांशीराम आवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आवंटन से पहले ही खंडहर में तब्दील हुए कांशीराम आवास
विज्ञापन
खंडहर में तब्दील धामपुर में एक दशक पहले बनी काशीराम शहरी गरीब आवासीय कॉलोनी में बने आवास।
- फोटो : DHAMPUR
आवंटन से पहले ही खंडहर में तब्दील हुए कांशीराम आवास
धामपुर। एक दशक पहले धामपुर में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत बने 250 आवासों का आवंटन होना मुश्किल हो गया है। कॉलोनी में आज तक न तो विद्युत निगम की ओर से बिजली की लाइन बनी और न ही पानी की पाइप लाइन बिछी है। रखरखाव न होने से आवास भी खंडहर बन गए हैं।
धामपुर में वर्ष 2010-11 में 250 कांशीराम आवासों का निर्माण कराया गया था। तब से आज तक इन आवासों का आवंटन नहीं हुआ। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन ले आवास आबाद नहीं हो सके। कई बार आवंटन कराने की मांग भी की गई। पालिका के सहयोग से डूडा ने आवंटन प्रक्रिया पूरा करने के लिए आवेदन मांगे। पर वे रद्दी के टोकरे में जाते रहे। लोगों का कहना है कि अधिकांश आवास खंडहर बन चुके हैं। आवासों से खिड़की और दरवाजे चोरी हो गए हैं। आवासों का समय से आवंटन हो गया होता तो इसका गरीबों का लाभ मिलता।
सहायक परियोजना अधिकारी पवन कुमार शर्मा का कहना है कि कॉलोनी में पेयजलापूर्ति के लिए जलनिगम से पाइप लाइन और विद्युत निगम से बिजली लाइन नहीं बनाई। उन्होंने सामान्य सुविधाओं को मुहैया कराने और अब आवासों की फिर से मरम्मत कराने को शासन को फाइल भेजी गई है। मरम्मत के बाद फिर से आवंटन की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। जिले में तीन शहरों चांदपुर, हल्दौर और धामपुर में भी आवासों का निर्माण हुआ था। वहां भी आवासों का आवंटन अभी तक नहीं हो सका है।
विज्ञापन
विज्ञापन
धामपुर। एक दशक पहले धामपुर में कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत बने 250 आवासों का आवंटन होना मुश्किल हो गया है। कॉलोनी में आज तक न तो विद्युत निगम की ओर से बिजली की लाइन बनी और न ही पानी की पाइप लाइन बिछी है। रखरखाव न होने से आवास भी खंडहर बन गए हैं।
धामपुर में वर्ष 2010-11 में 250 कांशीराम आवासों का निर्माण कराया गया था। तब से आज तक इन आवासों का आवंटन नहीं हुआ। सरकारें बदलती रहीं, लेकिन ले आवास आबाद नहीं हो सके। कई बार आवंटन कराने की मांग भी की गई। पालिका के सहयोग से डूडा ने आवंटन प्रक्रिया पूरा करने के लिए आवेदन मांगे। पर वे रद्दी के टोकरे में जाते रहे। लोगों का कहना है कि अधिकांश आवास खंडहर बन चुके हैं। आवासों से खिड़की और दरवाजे चोरी हो गए हैं। आवासों का समय से आवंटन हो गया होता तो इसका गरीबों का लाभ मिलता।
विज्ञापन
सहायक परियोजना अधिकारी पवन कुमार शर्मा का कहना है कि कॉलोनी में पेयजलापूर्ति के लिए जलनिगम से पाइप लाइन और विद्युत निगम से बिजली लाइन नहीं बनाई। उन्होंने सामान्य सुविधाओं को मुहैया कराने और अब आवासों की फिर से मरम्मत कराने को शासन को फाइल भेजी गई है। मरम्मत के बाद फिर से आवंटन की प्रक्रिया को शुरू किया जाएगा। जिले में तीन शहरों चांदपुर, हल्दौर और धामपुर में भी आवासों का निर्माण हुआ था। वहां भी आवासों का आवंटन अभी तक नहीं हो सका है।
विज्ञापन