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आस्था का केंद्र है धामपुर का कालियावाला मंदिर

Wed, 14 Apr 2021 11:50 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 14 Apr 2021 11:50 PM IST
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Kaliwala temple of Dhampur is the center of faith
धामपुर में कालियावाला मंदिर में प्रसाद चढ़ाते श्रद्वालु। - फोटो : DHAMPUR
धामपुर। हाईवे 74 पर कालियावाला मंदिर नगर क्षेत्र का सबसे प्राचीन मंदिर है। मंदिर करीब 300 साल पुराना है। ऐसी मान्यता है कि जो भी यहां सच्चे मन से व्रत रखकर मन्नत मांगता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है।
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बताया जाता है कि करीब 300 साल पहले नगर में नाथ संप्रदाय के कालियानाथ नाम के एक सिद्ध पुरुष हुए थे। वह गुरु गोरखनाथ के शिष्य थे। जप तप करने के बाद वह धामपुर में प्रवास पर आए थे तभी उन्होंने यहां शरीर त्याग दिया था। इनकी यहां समाधि बनी है। इन्हीं के नाम से मंदिर का श्रद्धालुओं ने निर्माण कराया, जो आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। देश के कई राज्यों के श्रद्धालु यहां आकर नवरात्रों के दौरान व्रत रखकर पूजा अर्चना करते हैं। घर परिवार की सुख समृद्धि के लिए कामना करते हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से व्रत रखकर मन्नतें मांगता है, उसकी सभी कामनाएं पूर्ति होती हैं।
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मंदिर के पुजारी सुरेंद्र नाथ, विजय नाथ व रविंद्र नाथ बताते हैं कि साल में दो बार नवरात्रों पर यहां मेला लगता है, बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर पूजा अर्चना करते हैं और प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। वे बताते हैं कि वह कालियानाथ के परिवार के ही सदस्य है। उनकी नवीं पीढ़ी चल रही है। मंदिर परिसर में उनके परिवार के नौ वंशजों की यहां समाधियां बनी हैं। श्रद्धालु यशपाल तुली, दिनेश चंद्र अग्रवाल ने बताया कि कि अब यहां रमणीक स्थान बना है। श्रद्धालु किसी भी समय मंदिर में जाकर पूजा कर सकते हैं। मंदिर में एक प्राचीन कुआं भी था, जिसे कमेटी के लोगों से सुरक्षा की दृष्टि को देखते हुए सीमेंटेड पटों से पाट दिया गया है। सैकड़ों साल पुराना पीपल का वृक्ष है, जिसकी श्रद्धालु पूजा करते हैं। मंदिर में शिव मंदिर व शनिदेव का मंदिर भी है। बलराज सिंह, भारत सिंह, पंकज कुमार शर्मा, रतन सिंह, सुशील कुमार आदि श्रद्धालुओं ने बताया कि वर्तमान में कोरोना महामारी को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने भीड़ पर रोक लगा दी है। पांच पांच श्रद्धालुओं को ही मंदिर में पूजा को एंट्री दी जा रही है।
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