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कालागढ़-रामनगर मार्ग पर बंद रहेगी कांवड़ यात्रा
Tue, 26 Feb 2019 12:04 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Tue, 26 Feb 2019 12:04 AM IST
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वेंडरों की बैठक लेते जीआरपी प्रभारी जगत सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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कालागढ़ में कालागढ़ से रानीखेत जा रहे कांवड़ियों को वन विभाग ने रामनगर मार्ग पर जाने पर पाबंदी लगा देने से जनता व कांवड़ियों में रोष फैल गया। वनक्षेत्राधिकारी आरके भट्ट के अनुसार विभाग के उच्चाधिकारियों के आदेशों पर हाईकोर्ट के आदेशों के तहत इस मार्ग पर वाहनों व नेशनल पार्क के नियमों के तहत पैदल आवागमन पर प्रतिबंध लगा है।
गढ़वाल व कुमायूं के इतिहास में आजादी के पहले व बाद से ही कालागढ़ से रामनगर व कोटद्वार के लिए इस मार्ग का प्रयोग किया जाता रहा है। वर्तमान में इस मार्ग को पहली बार वन विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए आम यातायात के लिए बंद कर रखा है, जिससे इस क्षेत्र के नागरिकों व ग्रामीणों को बस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मार्ग से कांवड़ यात्रा भी गुजरती है। हरिद्वार से कांवड़ लेकर भक्त नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जनपदों को जाते रहे हैं।
रविवार को हरिद्वार से कालागढ़ पहुंचे लगभग 26 कांवड़ियों को कालागढ़ में रुकने को मजबूर होना पड़ा। कांवड़ लेकर कालागढ़ पहुंचे दिनेश चंद्र उपाध्याय, हिमांशु वर्तियाल, विनोद रावत, बहादुर सिंह रावत, दिग्पाल सिंह खाती व ताड़ीखेत के महाराज नीलकंठ नाथ ने बताया कि वह मध्य प्रदेश से शिवलिंग लेकर हरिद्वार पहुंचे। जहां से कांवड़ लेकर कालागढ़ होते हुए वह अपने गंतव्य को जा रहे है। ऐसे में यहां से जंगल के रास्ते जाने पर रोक लगी होने से परेशान है। 11 बार से वह कांवड़ लेकर यहां से जाते रहे हैं। रानीखेत, मोड़ी, थापला, ताड़ीखेत, लेटी, स्वामी, मच्छखाली, डूबा व तौड़ा न्यू कालोनी को वह इस मार्ग से जाने पर दो मार्च को अपने अपने गांव पहुंचेंगे। शिव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना होनी है। यदि यहां से नहीं जाने दिया तो वह समय से नहीं पहुंच पाएंगे। वन विभाग के साथ साथ राज्य सरकार पर भी जनता और शिवभक्तों में रोष है। नागरिकों अंशुल बंसल, कृष्ण कुमार आदि का कहना है कि वह कई वर्ष से कांवड़ सेवा कर रहे हैं, ऐसे में यह पहली बार हुआ है।
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यह उचित कदम नहीं है। पर्यटन के नाम पर भक्तों व श्रद्धालुओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि पार्क व वन विभाग को सुविधा देना चाहिए। यहां तो उन्हें अपने स्थान व गांवों को जाने से रोका जा रहा है। वन विभाग के इस कदम से शिवभक्तों की यात्रा लगभग 50 किमी बढ़ गई है।
कांवड़ मेले को लेकर जीआरपी प्रभारी ने ली बैठक
नजीबाबाद में जीआरपी प्रभारी ने कांवड़ मेले के दौरान कांवड़ियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ पुलिस के साथ कुली और वेंडरों को सतर्क रखने के निर्देश दिए। जीआरपी थाना प्रभारी जगत सिंह ने आरपीएफ इंचार्ज इंद्रकांत शर्मा की उपस्थिति में जीआरपी, आरपीएफ पुलिस के साथ कुली और वेंडरों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व पर रेलवे स्टेशन पर कांवड़ यात्रियों की आवाजाही बढ़ जाएगी। कांवड़ मेले के दौरान कांवड़ियों की सुरक्षा और रेलवे की सुरक्षा के प्रति हम सब का दायित्व है। रेलवे स्टेशन पर लावारिश वस्तु और संदिग्ध व्यक्ति की तत्काल सूचना देने के लिए सचेत रहे। उन्होंने जीआरपी व आरपीएफ पुलिस, कुली और वेंडरों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने के टिप्स दिए।
कांवड़ियों की सुरक्षा पुख्ता रखने की मांग
बिजनौर में शिव सेना ने महाशिवरात्रि पर कांवड़ियों की सुरक्षा व सड़कों की मरम्मत के संबंध में डीएम सुजीत कुमार व एसपी संजीव त्यागी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि महाशिवरात्रि पर जिले से भारी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं। बिजनौर से होकर कई जिलों के कांवड़िए जाते हैं। जिला प्रशासन से कांवड़ियों की सुरक्षा में महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाने, कांवड़ियों के मार्ग की सभी मीट की दुकान व ई रिक्शा का संचालन 26 फरवरी से पांच मार्च तक बंद रखने, मार्गों से अतिक्रमण हटवाने, ओवरलोड वाहनों का संचालन बंद कराने, सड़कों को गड्ढामुक्त करने, पेयजल, चिकित्सा व विद्युत आपूर्ति दुरुस्त रखने की मांग की। इस दौरान जिला प्रमुख आरके आर्य, रंजीत सिंह, अक्षय कुमार, हिमांशु, अमित वर्मा, रवि प्रकाश, रामपाल सिंह, पंकज रहे।
कड़ी सुरक्षा के बीच गुजरेगी कांवड़यात्रा
कालागढ़ में कालागढ़ होकर पाखरो व ढेला के बीच से होकर जाने वाली कांवड़ यात्रा को वन विभाग कड़ी सुरक्षा के बीच होकर जाने देगा। अभी पैदल कांवड़ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल ने जानकारी देते हुए कहा कि वन विभाग जनता व श्रद्धालुओं को असुविधा नहीं होने देगा। कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क के बीच से होकर कालागढ़ से ढेला व पाखरो होकर जाने वाले कांवड़ियों को सोमवार को भी अनुमति नहीं दे पाया। जिसके चलते कांवड़ियों को जसपुर आदि होकर जाना पड़ा। देर शाम कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क के निदेशक राहुल ने बताया कि मंगलवार से कांवड़ यात्रा के वाहनों को वन विभाग के सुरक्षा वाहनों के साथ ढेला से कालागढ़ पाखरो होकर गुजारा जाएगा। इस दौरान पार्क के नियमों का पालन करना होगा। वाहनों में डीजे आदि बजाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा पैदल कांवड़ यात्रा के लिए अभी कोई अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारियों के आदेशों का इंतेजार है। संबधित वनक्षेत्राधिकारियों से उनके क्षेत्र से होकर जाने वाले वाहनों को सुरक्षा देने को कहा गया है।
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गढ़वाल व कुमायूं के इतिहास में आजादी के पहले व बाद से ही कालागढ़ से रामनगर व कोटद्वार के लिए इस मार्ग का प्रयोग किया जाता रहा है। वर्तमान में इस मार्ग को पहली बार वन विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए आम यातायात के लिए बंद कर रखा है, जिससे इस क्षेत्र के नागरिकों व ग्रामीणों को बस सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस मार्ग से कांवड़ यात्रा भी गुजरती है। हरिद्वार से कांवड़ लेकर भक्त नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ आदि जनपदों को जाते रहे हैं।
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रविवार को हरिद्वार से कालागढ़ पहुंचे लगभग 26 कांवड़ियों को कालागढ़ में रुकने को मजबूर होना पड़ा। कांवड़ लेकर कालागढ़ पहुंचे दिनेश चंद्र उपाध्याय, हिमांशु वर्तियाल, विनोद रावत, बहादुर सिंह रावत, दिग्पाल सिंह खाती व ताड़ीखेत के महाराज नीलकंठ नाथ ने बताया कि वह मध्य प्रदेश से शिवलिंग लेकर हरिद्वार पहुंचे। जहां से कांवड़ लेकर कालागढ़ होते हुए वह अपने गंतव्य को जा रहे है। ऐसे में यहां से जंगल के रास्ते जाने पर रोक लगी होने से परेशान है। 11 बार से वह कांवड़ लेकर यहां से जाते रहे हैं। रानीखेत, मोड़ी, थापला, ताड़ीखेत, लेटी, स्वामी, मच्छखाली, डूबा व तौड़ा न्यू कालोनी को वह इस मार्ग से जाने पर दो मार्च को अपने अपने गांव पहुंचेंगे। शिव मंदिर में शिवलिंग की स्थापना होनी है। यदि यहां से नहीं जाने दिया तो वह समय से नहीं पहुंच पाएंगे। वन विभाग के साथ साथ राज्य सरकार पर भी जनता और शिवभक्तों में रोष है। नागरिकों अंशुल बंसल, कृष्ण कुमार आदि का कहना है कि वह कई वर्ष से कांवड़ सेवा कर रहे हैं, ऐसे में यह पहली बार हुआ है।
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यह उचित कदम नहीं है। पर्यटन के नाम पर भक्तों व श्रद्धालुओं को परेशान किया जा रहा है, जबकि पार्क व वन विभाग को सुविधा देना चाहिए। यहां तो उन्हें अपने स्थान व गांवों को जाने से रोका जा रहा है। वन विभाग के इस कदम से शिवभक्तों की यात्रा लगभग 50 किमी बढ़ गई है।
कांवड़ मेले को लेकर जीआरपी प्रभारी ने ली बैठक
नजीबाबाद में जीआरपी प्रभारी ने कांवड़ मेले के दौरान कांवड़ियों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए रेलवे स्टेशन पर जीआरपी व आरपीएफ पुलिस के साथ कुली और वेंडरों को सतर्क रखने के निर्देश दिए। जीआरपी थाना प्रभारी जगत सिंह ने आरपीएफ इंचार्ज इंद्रकांत शर्मा की उपस्थिति में जीआरपी, आरपीएफ पुलिस के साथ कुली और वेंडरों की बैठक ली। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि पर्व पर रेलवे स्टेशन पर कांवड़ यात्रियों की आवाजाही बढ़ जाएगी। कांवड़ मेले के दौरान कांवड़ियों की सुरक्षा और रेलवे की सुरक्षा के प्रति हम सब का दायित्व है। रेलवे स्टेशन पर लावारिश वस्तु और संदिग्ध व्यक्ति की तत्काल सूचना देने के लिए सचेत रहे। उन्होंने जीआरपी व आरपीएफ पुलिस, कुली और वेंडरों को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रखने के टिप्स दिए।
कांवड़ियों की सुरक्षा पुख्ता रखने की मांग
बिजनौर में शिव सेना ने महाशिवरात्रि पर कांवड़ियों की सुरक्षा व सड़कों की मरम्मत के संबंध में डीएम सुजीत कुमार व एसपी संजीव त्यागी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया कि महाशिवरात्रि पर जिले से भारी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार से गंगाजल लेकर आते हैं। बिजनौर से होकर कई जिलों के कांवड़िए जाते हैं। जिला प्रशासन से कांवड़ियों की सुरक्षा में महिला पुलिसकर्मियों की भी ड्यूटी लगाने, कांवड़ियों के मार्ग की सभी मीट की दुकान व ई रिक्शा का संचालन 26 फरवरी से पांच मार्च तक बंद रखने, मार्गों से अतिक्रमण हटवाने, ओवरलोड वाहनों का संचालन बंद कराने, सड़कों को गड्ढामुक्त करने, पेयजल, चिकित्सा व विद्युत आपूर्ति दुरुस्त रखने की मांग की। इस दौरान जिला प्रमुख आरके आर्य, रंजीत सिंह, अक्षय कुमार, हिमांशु, अमित वर्मा, रवि प्रकाश, रामपाल सिंह, पंकज रहे।
कड़ी सुरक्षा के बीच गुजरेगी कांवड़यात्रा
कालागढ़ में कालागढ़ होकर पाखरो व ढेला के बीच से होकर जाने वाली कांवड़ यात्रा को वन विभाग कड़ी सुरक्षा के बीच होकर जाने देगा। अभी पैदल कांवड़ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल ने जानकारी देते हुए कहा कि वन विभाग जनता व श्रद्धालुओं को असुविधा नहीं होने देगा। कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क के बीच से होकर कालागढ़ से ढेला व पाखरो होकर जाने वाले कांवड़ियों को सोमवार को भी अनुमति नहीं दे पाया। जिसके चलते कांवड़ियों को जसपुर आदि होकर जाना पड़ा। देर शाम कार्बेट टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क के निदेशक राहुल ने बताया कि मंगलवार से कांवड़ यात्रा के वाहनों को वन विभाग के सुरक्षा वाहनों के साथ ढेला से कालागढ़ पाखरो होकर गुजारा जाएगा। इस दौरान पार्क के नियमों का पालन करना होगा। वाहनों में डीजे आदि बजाने पर रोक रहेगी। इसके अलावा पैदल कांवड़ यात्रा के लिए अभी कोई अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके लिए उच्च अधिकारियों के आदेशों का इंतेजार है। संबधित वनक्षेत्राधिकारियों से उनके क्षेत्र से होकर जाने वाले वाहनों को सुरक्षा देने को कहा गया है।