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जुल्म है तीन तलाक और हलाला

Tue, 10 Oct 2017 12:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Tue, 10 Oct 2017 12:14 AM IST
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Julim is three divorce and halala
बिजनौर में मदरसे में आयोजित कांफ्रेंस को संबोधित करते उलमा। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर  में मदरसा जमियत-उल-कुरान अलखैयरिया के तीन तलाक के मुद्दे पर आयोजित कांफ्रेंस में तीन तलाक देने को जुल्म बताया गया। मुस्लिम समुदाय में महिलाओं पर तलाके बिदअत और हलाला जैसे संगीन जुर्म का जिम्मेदार शिक्षा के अभाव को बताया गया। मुस्लिम समुदाय को शिक्षित करने का आह्वान किया गया। तीन तलाक पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया गया। 
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पैगाम-ए-अमन कमेटी के संरक्षक डा.फुरकान मेहरबान अली अल मदनी ने कहा कि एक मजलिस की तीन तलाक एक ही तलाके रजई साबित होती है और सबसे पहले इसका फतवा अल्लाह के रसूल ने दिया था। इसी फतवे के अनुसार उलमा-ए-इस्लाम फतवे देते चले आए हैं और बहुत से मुल्कों ने इसी को अपना कानून बना लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक साथ तीन तलाक देने को जुल्म बताया है। उन्होंने कहा कि अब तक एक साथ तीन तलाक देना जैसे गैर इस्लामी था, अब गैर कानूनी भी हो गया है। उन्होंने कहा कि कुरान व हदीस को मानने वाले मुसलमानों को बिना किसी खौफ या झिझक के इस पर अमल करना चाहिए। अपने दीन पर अमल करने के बारे में किसी की भी आलोचना की परवाह नहीं करनी चाहिए।
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दीनी अहकाम के मामले में सिर्फ अल्लाह से डरना चाहिए और किसी से नहीं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केंद्र सरकार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुसलमान औरतों की हिमायत, मदद करने की कोशिशों का नतीजा है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला शरीयत में कोई हस्तक्षेप नहीं करता है बल्कि शरीअत के मुताबिक ही है। ये किसी नए हुक्म का फैसला नहीं है बल्कि सही हुक्म के मुताबिक 1400 साल पहले से कुरान व हदीस में मौजूद इस्लामी फैसले को याद दिलाता है। मुख्य अतिथि जमियत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सुहैब कासमी रहे। मुफ्ती आसिफ नदवी, डा.असलम कासमी, मौलाना अब्दुल कय्यूम, मौलाना शौकीन, मौलाना मुजाहिद मदनी, खान जफर सुल्तान, मौलाना कासिम मदनी, कमेटी अध्यक्ष शहबाज अंसारी मौलाना आमिर, डा.अब्दुल्ला साबिर जौनपुरी आदि मौजूद रहे। 
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