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1937 के उपचुनाव में जिन्ना ने बिजनौर में डाल लिया था डेरा

Mon, 24 Jan 2022 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 24 Jan 2022 12:06 AM IST
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Jinnah had camped in Bijnor in the 1937 elections.
हाफिज मोहम्मद इब्राहिम। - फोटो : BIJNOR
1937 के चुनाव में जिन्ना ने बिजनौर में डाल दिया था डेरा
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बिजनौर। आजादी से पहले 1937 में हुए विधान परिषद चुनाव में मुस्लिम लीग के अध्यक्ष मोहम्मद अली जिन्ना ने बिजनौर में डेरा डाल दिया था। उनके तमाम प्रयासों के बाद भी उस समय कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े नगीना के हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने मुस्लिम लीग प्रत्याशी अब्दुल समी को हरा दिया था। इसी चुनाव से मुस्लिम लीग और कांग्रेस के बीच खाई पैदा हुई थी, जिसे पाटा नहीं जा सका और देश को बंटवारे का दंश झेलना पड़ा।
तब मुस्लिम लीग और जिन्ना ने बिजनौर सीट के इस चुनाव को प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था। नफरत भरी तकरीरें पेश की गई। लेकिन मुस्लिम लीग के उम्मीदवार अब्दुल समी केवल 1972 वोट ही हासिल कर पाए थे। कांग्रेस के प्रत्याशी नगीना निवासी हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने 7939 वोट लेकर जीत हासिल की। 24 जनवरी 1967 को दिल्ली के एम्स में बीमारी से लड़ते हुए हाफिज मोहम्मद इब्राहिम की मौत हो गई थी। साल 1888 में मोहल्ला काजी सराय में नजमुल हुदा व हसमत निशा के घर जन्म लेने वाले हाफिज इब्राहिम को कुरान कंठस्थ करने पर हाफिज कहा जाने लगा था। नगीना निवासी शिक्षाविद परवेज आदिल बताते हैं कि 1958 में राज्यसभा सदस्य हाफिज मोहम्मद इब्राहिम को प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू कैबिनेट में मंत्री भी बनाया गया था। 1964 में अविभाजित पंजाब के गवर्नर भी वह बने थे।
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पाक भारत के बीच कराया सिंधु जल समझौता
परवेज आदिल बताते हैं कि भारत पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के जल बंटवारे को विवाद चल रहा था। जिसके लिए हाफिज मोहम्मद इब्राहिम पंडित नेहरू के साथ पाकिस्तान गए। उन्होंने ही दोनों प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी में समझौते पर हस्ताक्षर कराए। मुस्लिम वक्फ का संविधान बनवाने में भी उनका योगदान था।
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1919 में स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे
हाफिज इब्राहिम ने छात्र जीवन से ही राजनीति में प्रवेश किया। उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में सेक्रेटरी का चुनाव लड़ कर जीत हासिल की थी। कुछ समय नगीना और बिजनौर में वकालत की और सन 1919 में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। आठ अगस्त 1942 को अंग्रेजों भारत छोड़ो का बिगुल बजा तो दिल्ली में हाफिज मोहम्मद इब्राहिम सक्रिय हुए। 9 अगस्त को उन्हें दिल्ली में गिरफ्तार कर लिया गया। उनके बहनोई अब्दुल लतीफ को बिजनौर में गिरफ्तार किया गया थे। उनके साले को भेज जेल जाना पड़ा था।
कश्मीर पर पास कराया था प्रस्ताव
परवेज आदिल बताते हैं कि हाफिज मोहम्मद इब्राहिम ने साल 1955 में लखनऊ में कश्मीर कांफ्रेंस बुलाई। जिसमें पूरे भारत के सांसद और सभी राज्यों के मुस्लिम विधायक बुलाए गए। जिसमें एक मत होकर प्रस्ताव पास हुआ कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और रहेगा। इस सिलसिले में कभी पाक से बात नहीं होगी।
दिलचस्प था 1937 का चुुनाव
परवेज आदिल बताते हैं कि उस वक्त विधान परिषद की सीट पर 11 हजार वोट हुआ करते थे, जोकि जमींदारों के थे। सीट में बिजनौर, किरतपुर, मंडावर, अकबरादबाद, गंज, बरुकी, झालू, चांदपुर, हल्दौर, गजरौला, गढ़वाल, श्यामपुर कांगड़ी, ब्रहमपुर, गंजालपुर, बास्टा, नांगल, खानपुर, नंगला इलाके शामिल थे।

बताते हैं कि जिन्ना के साथ राजा महमूदाबाद भी आए थे। जिन्होंने हाथ में गीता और कुरान लेकर तकरीर की थी कि हाफिज मोहम्मद इब्राहिम यानी कांग्रेस को वोट देना गीता को वोट देना है। मुस्लिम लीग को दिया वोट कुरान पर जाएगा।

तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन के साथ हाफिज मोहम्मद इब्राहिम।

तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन के साथ हाफिज मोहम्मद इब्राहिम।- फोटो : BIJNOR

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