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बेलपत्र से करें महादेव का जलाभिषेक
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बेलपत्र से करें महादेव का जलाभिषेक
बिजनौर। महाशिवरात्रि के पर्व के लिए सभी शिवालय सजाए गए। जगह-जगह भंडारे का आयोजन हुआ तो कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर लगाए गए। आज पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। शिवभक्त पूरे दिन भोले का जलाभिषेक करेंगे। शिव और शक्ति के मिलन का पर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल में हर माह मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि में फाल्गुन माह की महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण और मनोकामना को पूर्ण करने वाली होती है। महाशिवरात्रि के पर्व का शुभ मुहूर्त एक मार्च को सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर दो मार्च बुधवार को सुबह 10 बजे तक है।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि देवों के देव महादेव, व्यक्ति की चेतना के अंतर्यामी हैं। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है। इस दिन ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जाएं चरम पर होती हैं। शिव उपासना में बेलपत्र का भी विशेष महत्व होता है। तीन दलों से युक्त बिल्व पत्र जो व्यक्ति भगवान शिव को अर्पित करता है, उसके तीन जन्मों के पापों का अंत होता है।
शिवरात्रि के दिन ये करना चाहिए
शिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव पुराण, शिव पंचाक्षर आदि का पाठ करना चाहिए। प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर घर या मंदिर में शिवजी की आराधना करनी चाहिए। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, इत्र, चंदन, भांग, धतूरा, बेलपत्र, रुद्राक्ष एवं सफेद फूल चढ़ाने से भगवान शिव मनोकामना पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला से महादेव के मंत्रों का जाप करना खहिए।
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बिजनौर। महाशिवरात्रि के पर्व के लिए सभी शिवालय सजाए गए। जगह-जगह भंडारे का आयोजन हुआ तो कांवड़ियों की सेवा के लिए शिविर लगाए गए। आज पूरे दिन शुभ मुहूर्त रहेगा। शिवभक्त पूरे दिन भोले का जलाभिषेक करेंगे। शिव और शक्ति के मिलन का पर्व महाशिवरात्रि फाल्गुन माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। साल में हर माह मनाई जाने वाली मासिक शिवरात्रि में फाल्गुन माह की महाशिवरात्रि सबसे महत्वपूर्ण और मनोकामना को पूर्ण करने वाली होती है। महाशिवरात्रि के पर्व का शुभ मुहूर्त एक मार्च को सुबह 3 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर दो मार्च बुधवार को सुबह 10 बजे तक है।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि देवों के देव महादेव, व्यक्ति की चेतना के अंतर्यामी हैं। महाशिवरात्रि को वर्षभर में पड़ने वाली सिद्ध रात्रियों में से एक माना गया है। इस दिन ब्रह्मांड में दिव्य ऊर्जाएं चरम पर होती हैं। शिव उपासना में बेलपत्र का भी विशेष महत्व होता है। तीन दलों से युक्त बिल्व पत्र जो व्यक्ति भगवान शिव को अर्पित करता है, उसके तीन जन्मों के पापों का अंत होता है।
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शिवरात्रि के दिन ये करना चाहिए
शिवरात्रि के दिन शिव स्तुति, शिव सहस्रनाम, शिव चालीसा, रुद्राष्टकम, शिव पुराण, शिव पंचाक्षर आदि का पाठ करना चाहिए। प्रात: काल स्नान आदि से निवृत्त होकर घर या मंदिर में शिवजी की आराधना करनी चाहिए। शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, इत्र, चंदन, भांग, धतूरा, बेलपत्र, रुद्राक्ष एवं सफेद फूल चढ़ाने से भगवान शिव मनोकामना पूर्ण करते हैं। इसके साथ ही रुद्राक्ष की माला से महादेव के मंत्रों का जाप करना खहिए।
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