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जेल भरो आंदोलन से छोटी पड़ गई थी जेल

Sat, 01 Aug 2020 11:40 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2020 11:40 PM IST
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Jail became smaller due to Jail Bharo movement
जनार्दन अग्रवाल। - फोटो : BIJNOR
जेल भरो आंदोलन से छोटी पड़ गई थी जेल
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बिजनौर। राम मंदिर आंदोलन के दौरान 30 साल पहले जिले में कार सेवकों को रोकने पर रामभक्त भड़क पड़े थे। जिले के अलावा बाहर से आने वाले कारसेवकों को जेल में ठूंस दिया गया था। जेल में जगह नहीं बचने पर जीजीआईसी बिजनौर को अस्थायी जेल बना दिया गया था। इसमें भी गिरफ्तारी देने वाले रामभक्त रखे गए थे। रामभक्तों ने प्रमुख जेल के गेट नंबर दो को तोड़ने की कोशिश की थी। इसे लेकर काफी हंगामा मचा था व रामभक्तों पर जेल प्रशासन ने लाठीचार्ज कर दिया था। पूर्व मंत्री अमर सिंह समेत कई रामभक्त घायल हुए थे। अधिवक्ता अभय सक्सेना पर रासुका लगा दी गई थी।
1990 में कारसेवकों ने राम मंदिर आंदोलन के दौरान अयोध्या जाने का खूब जुनून था। प्रशासन ने जिले भर में कारसेवकों की धरपकड़ शुरू कर दी थी। प्रमुख लोगों को चिह्नित कर उनके घरों पर दबिश दी जा रही थी। प्रमुख लोगों के पकड़े जाने पर जिले में जेल भरो आंदोलन शुरू कर दिया गया था। बड़ी तादाद में रामभक्तों को जिला कारागार में ठूस दिया गया। पंजाब व अन्य जगह से आने वाले रामभक्तों को भी बिजनौर में ही पकड़कर जेल में डाल दिया गया था। रामभक्तों ने जिले में जेल भरों आंदोलन शुरू कर दिया था। बाहर से आने वाले रामभक्तों के लिए भोजन के अलावा रहने -सहने की स्थानीय लोग व्यवस्था करने में जुटे थे। जेल में जगह न रहने पर जीजीआईसी बिजनौर को अस्थायी जेल बनाया गया था। इसमें भी गिरफ्तारी देने वाले तमाम रामभक्त रखे गए थे।
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जिला जेल में रामभक्त भड़क उठे थे। उन्होंने जेल के गेट नंबर दो को तोड़ने की कोशिश की थी। इस पर जेल प्रशासन ने उन पर लाठी चार्ज कर दिया था। पूर्व मंत्री अमर सिंह समेत तमाम रामभक्त घायल हुए थे। उस समय विश्व हिंदू परिषद से जुड़े अधिवक्ता अभयकृष्ण सक्सेना के हाथ में भी डंडा लगा था। अभयकृष्ण सक्सेना पर 14/15 अक्तूबर को रासुका लगा दी गई थी। उन्हें बिजनौर से लखनऊ सेंट्रल जेल भेज दिया गया था। हाईकोर्ट लखनऊ बेंच में रासुका पर सुनवाई हुई थी। दो दिसंबर 1990 को अभय कृष्ण सक्सेना जेल से बाहर आए। अभय कृष्ण सक्सेना पर रासुका लगने से बहुत बवाल मचा था। जिले के सभी रामभक्त एकजुट हो गए थे। प्रदेश स्तर तक इस मामले को लेकर आंदोलन चलाने की बात कही गई थी। इस दौरान जेल में लाला धनीराम, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रहे राधेश्याम कर्णवाल, विपिन पांडेय, सुनील पांडेय, राकेश वर्मा, हीमपुर निवासी यशपाल सिंह, पूर्व मंत्री महावीर सिंह, डॉ. नेमीशरण वर्मा, बालेश्वर प्रसाद, विद्याभूषण विश्नोई, नगर पालिका बिजनौर के पूर्व चेयरमैन जनार्दन अग्रवाल समेत तमाम लोग उस समय जेल गए थे।

अधिवक्ता अभयकृष्ण सक्सेना।

अधिवक्ता अभयकृष्ण सक्सेना।- फोटो : BIJNOR

पूर्व मंत्री महावीर सिंह।

पूर्व मंत्री महावीर सिंह।- फोटो : BIJNOR

राधेश्याम कर्णवाल।

राधेश्याम कर्णवाल।- फोटो : BIJNOR

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