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पत्थरगढ़ पर फहराए तिरंगे के साक्षी थे जगदीश वैश्य

Thu, 11 Aug 2022 12:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 11 Aug 2022 12:54 AM IST
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Jagdish Vaish was a witness to the tricolor hoisted on Patthargarh
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगदीश वैश्य। (फाइल फोटो) - फोटो : BIJNOR
पत्थरगढ़ पर फहराए तिरंगे के साक्षी थे जगदीश वैश्य
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बिजनौर। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगदीश वैश्य देश की आजादी के बाद 15 अगस्त 1947 को नजीबाबाद के निकट स्थित पत्थर गढ़ के किले में पहली बार फहराए गए तिरंगे के साक्षी बने थे। स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए उन्हें ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था।
जगदीश प्रसाद वैश्य का जन्म नजीबाबाद में हुआ था। उनके पिता रामचंद्र वैश्य की नजीबाबाद में आलू की आढ़त थी। पढ़ाई के दौरान ही वह स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ गए थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर उन्होंने स्वदेशी वस्त्र धारण किए थे। वह लोगों को स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ते थे। गांधी जी के आह्वान पर उन्होंने नजीबाबाद में विदेशी कपड़ों की होली जलाई थी। जगदीश प्रसाद की पौत्री अंशिका वैश्य बताती हैं कि उनके दादा का पूरा जीवन देश के लिए समर्पित रहा। विदेशी कपड़ों की होली जलाने पर अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। उन्हें सश्रम कारावास की सजा हुई थी। जेल से छूटने के बाद जगदीश प्रसाद पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए थे। उनके नजदीकी मित्र जेपी जाखेटिया, मुकेश चंद जैन, शिवचरण जाखेटिया आदि के साथ मिलकर वह क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल रहे। 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान वह बेहद सक्रिय रहे।
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गांधीजी के निर्देश पर चलाए जाने वाले जेल भरो आंदोलन में उन्होंने भाग लिया। तत्कालीन अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उन्हें गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया। स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने के कारण उन्हें दो बार जेल जाना पड़ा। 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिलने की खुशी में पत्थर गढ़ के किले में ध्वजारोहण किया गया था। कांग्रेस के तत्कालीन जिला अध्यक्ष चंद्रशेखर गोविल के नेतृत्व में हजारों लोगों की भीड़ पत्थर गढ़ के किले पर एकत्र हुई थी । 14 वर्षीया बालिका करुणा महेश्वरी ने उस दिन ध्वजारोहण किया था। जगदीश वैश्य भी उस क्षण के साक्षी बने थे। अंशिका वैश्य बताती हैं कि उनके दादा जगदीश प्रसाद वैश्य आजादी के बाद हर वर्ष एक जनवरी को गरीबों तथा जरूरतमंदों को सूती कपड़े भेंट करते थे। यह क्रम जीवन पर्यंत जारी रहा। स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में भाग लेने पर देश की आजादी के बाद जगदीश प्रसाद वैश्य को सरकार द्वारा ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया गया था। जगदीश प्रसाद वैश्य की मृत्यु 31 दिसंबर 1971 में हुई थी।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगदीश वैश्य की पौत्री अंशिका वैश्य।

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जगदीश वैश्य की पौत्री अंशिका वैश्य।- फोटो : BIJNOR

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