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वन्य जीवों के लिए जरूरी था मारना
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 22 Oct 2016 12:40 AM IST
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आदमखोर बाधिन को मारने के बाद उसके शव के पास शेरकोट का सैदबिन आसिफ।
- फोटो : अमर उजाला
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कालागढ़ में कार्बेट नेशनल पार्क के बिजरानी इलाके के साथ सटे सीमावर्ती क्षेत्र में आदमखोर बाघिन का अंत करने वाली टीम में शामिल नवाब सैदबिन आसिफ ने कालागढ़ पहुंच कर कहा कि आदमखोर जीव से न केवल लोगों को खतरा है बल्कि वन्य जीव के संतुलन में को भी खतरा है। इसलिए मारा गया।
कार्बेट नेशनल पार्क के बिजरानी इलाके में छह अगस्त से एक बाघिन को वन विभाग ने आदमखोर घोषित कर दिया था, जिसे 20 अक्तूबर को वन विभाग व शिकारियों की टीम ने सीमा से लगे गोरखपुर गांव में मार दिया। टीम में शामिल शेरकोट निवासी नवाब सैदबिन आसिफ ने घटनास्थल से शेरकोट आने के दौरान कालागढ़ में बताया कि बाघिन बहुत ही शातिर थी, उसे मारने में 45 दिनों का समय लगा। इस बाघिन को मारने के लिए वन विभाग की ओर से उन्हें परमिट जारी किया गया था। अन्य शिकारियों व वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ वह भी आपरेशन में शामिल थे। बाघ या बाघिन जब आदमखोर हो जाते हैं तो वह बहुत ही खतरनाक हो जाते हैं।
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कार्बेट नेशनल पार्क के बिजरानी इलाके में छह अगस्त से एक बाघिन को वन विभाग ने आदमखोर घोषित कर दिया था, जिसे 20 अक्तूबर को वन विभाग व शिकारियों की टीम ने सीमा से लगे गोरखपुर गांव में मार दिया। टीम में शामिल शेरकोट निवासी नवाब सैदबिन आसिफ ने घटनास्थल से शेरकोट आने के दौरान कालागढ़ में बताया कि बाघिन बहुत ही शातिर थी, उसे मारने में 45 दिनों का समय लगा। इस बाघिन को मारने के लिए वन विभाग की ओर से उन्हें परमिट जारी किया गया था। अन्य शिकारियों व वन विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के साथ वह भी आपरेशन में शामिल थे। बाघ या बाघिन जब आदमखोर हो जाते हैं तो वह बहुत ही खतरनाक हो जाते हैं।
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