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अफसरों ने की मोहित पेपर मिल व जैन डिस्टिलरी की जांच
ब्यूरो, अमर उजाला/ बिजनौर
Updated Thu, 04 Oct 2018 11:22 PM IST
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बिजनौर में फैक्ट्री में जांच करती टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में डीएम अटल कुमार राय की ओर से गठित की गई टीम ने मोहित पेपर मिल व जैन डिस्टिलरी की जांच की। जांच में मोहित पेपर मिल में क्लोरीन से बचने के लिए प्रयोग में आने वाले मास्क स्टोर में रखे मिले। जबकि वह कर्मचारियों के आसपास होने चाहिए थे। खास बात यह है कि दोनों फैक्ट्री मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री के मालिक कुलदीप जैन के भाइयों की हैं।सभी विभागों की टीम अपनी जांच आख्या डीएम को सौंपेगी।
12 सितंबर को मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में मीथेन गैस के टैंक में विस्फोट से सात मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना से लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। जांच में सामने आया था कि फैक्ट्री का संचालन सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। कई विभागों के अधिकारी मौके पर जाकर फैक्ट्री का मुआयना करने के बजाए कार्यालय से ही फिटनेस प्रमाण पत्र आदि बनाकर जारी कर देते थे। कारखाना विभाग तो साल में एक ही बार फैक्ट्री में जांच की औपचारिकता पूरी करता था। डीएम अटल कुमार राय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के अधिकारियों की एक समिति बनाई है। इस समिति को हर तीन महीने में फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दिए हैं। बृहस्पतिवार को एसडीएम बृजेश सिंह, मुजफ्फरनगर के कारखाना सहायक निदेशक विवेक सारस्वत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जीसी वर्मा, अग्निशमन विभाग के अधिकारी संतोष राय, श्रम प्रवर्तन अधिकारी पीएन बिजल्वाण ने जैन डिस्टलरी और मोहित पेपर मिल की जांच की। दोनों फैक्ट्री मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री के मालिक कुलदीप जैन के भाइयों की हैं।
मोहित पेपर मिल में जांच के दौरान क्लोरीन गैस से बचने के लिए कर्मचारियों के लिए आए मास्क एक स्टोर में रखे मिले, जबकि इन्हें कर्मचारियों के आसपास रखा जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार क्लोरीन गैस रिसने पर इसके संपर्क में आने से बेहोशी या फिर मौत भी हो सकती है। अधिकारियों ने इसे फैक्ट्री की बड़ी कमी बताया है। सभी विभागों के अधिकारी अपनी जांच आख्या डीएम को सौंपेंगे। एसडीएम बृजेश कुमार के अनुसार जिले की सभी फैक्ट्रियों की जांच हर तीन महीने में की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था में खामी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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12 सितंबर को मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री में मीथेन गैस के टैंक में विस्फोट से सात मजदूरों की मौत हो गई थी। इस घटना से लखनऊ तक हड़कंप मच गया था। जांच में सामने आया था कि फैक्ट्री का संचालन सुरक्षा नियमों को ताक पर रखकर किया जा रहा था। कई विभागों के अधिकारी मौके पर जाकर फैक्ट्री का मुआयना करने के बजाए कार्यालय से ही फिटनेस प्रमाण पत्र आदि बनाकर जारी कर देते थे। कारखाना विभाग तो साल में एक ही बार फैक्ट्री में जांच की औपचारिकता पूरी करता था। डीएम अटल कुमार राय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिले के अधिकारियों की एक समिति बनाई है। इस समिति को हर तीन महीने में फैक्ट्रियों की जांच के आदेश दिए हैं। बृहस्पतिवार को एसडीएम बृजेश सिंह, मुजफ्फरनगर के कारखाना सहायक निदेशक विवेक सारस्वत, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी जीसी वर्मा, अग्निशमन विभाग के अधिकारी संतोष राय, श्रम प्रवर्तन अधिकारी पीएन बिजल्वाण ने जैन डिस्टलरी और मोहित पेपर मिल की जांच की। दोनों फैक्ट्री मोहित पेट्रो केमिकल फैक्ट्री के मालिक कुलदीप जैन के भाइयों की हैं।
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मोहित पेपर मिल में जांच के दौरान क्लोरीन गैस से बचने के लिए कर्मचारियों के लिए आए मास्क एक स्टोर में रखे मिले, जबकि इन्हें कर्मचारियों के आसपास रखा जाना चाहिए। सूत्रों के अनुसार क्लोरीन गैस रिसने पर इसके संपर्क में आने से बेहोशी या फिर मौत भी हो सकती है। अधिकारियों ने इसे फैक्ट्री की बड़ी कमी बताया है। सभी विभागों के अधिकारी अपनी जांच आख्या डीएम को सौंपेंगे। एसडीएम बृजेश कुमार के अनुसार जिले की सभी फैक्ट्रियों की जांच हर तीन महीने में की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था में खामी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
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