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युवा थियेटर नहीं, सीधे फिल्म में जाना चाहता है : जाय मितई
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धामपुर में पत्रकारों से वार्ता करते डायरेक्टर जाय मितई और साजिदा
- फोटो : DHAMPUR
साक्षात्कार : युवा थियेटर नहीं, सीधे फिल्म में जाना चाहता है - जाय मितई
धामपुर। आजादी के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे अमृत महोत्सव के तहत ओपन थियेटर में प्रदर्शित नाटक ‘युग’ के निर्देशक जाय मितई (मणिपुर) ने कहा कि थियेटर का प्रशिक्षण ही किसी कलाकार को आगे बढ़ने के लिये बहुत महत्व रखता है।
धामपुर में अक्षर संस्था, ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन के संयुक्त आयोजन में 40 दिवसीय कार्यशाला के बाद प्रस्तुत नाटक ‘युग’ नाट्य इतिहास में एक मील का पत्थर बताया जा रहा है। इस नाटक के निर्देशक जाय मितई और साजिदा हैं। डायरेक्टर जाय मितई ने शुक्रवार को वार्ता के दौरान बताया कि उन्होंने एनएसडी दिल्ली से डिग्री के बाद लंदन इंटरनेशनल स्कूल ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स लंदन से दो वर्षीय कोर्स भी किया है। सरकारी खर्चे पर ही जाय मितई ने लंदन और जर्मनी में एक्टिंग और निर्देशन आदि का कोर्स किया है। साजिद और जाय मितई पति-पत्नी हैं। दोनों दिल्ली में श्रखंलाबद्ध तरीके से थियेटर वर्कशॉप चलाते हैं।
जाय मितई का कहना है कि आज हर युवा सीधे फिल्म में जाना चाहता है, लेकिन थियेटर की शिक्षा से आगे बढ़ने वाला युवा ही बेहतर कलाकार बनता है। छोटे शहरों में अभी दर्शक नाटकों को फिल्मी मानसिकता के रूप में देखते हैं। बॉलीवुड में थियेटर जरूरी नहीं है। लेकिन हालीवुड में थियेटर के बाद ही फिल्मों में प्रवेश मिलता है। वहां शक्ल सूरत मायने नहीं रखती। साजिदा बताती हैं कि दो वर्षों के कोविड काल में थियेटर कलाकारों ने भुखमरी जैसे हालात देखे हैं। सामान्य समय में भी सरकार को अब कलाकारों को आर्थिक योजनाएं देनी चाहिए। अभी कोई मां-बाप अपनी संतान को थियेटर लाइन में भेजना नहीं चाहता है। ज्यादातर बच्चे अपने रिस्क पर ही आगे बढ़ते हैं।
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धामपुर। आजादी के 75 वर्ष के उपलक्ष्य में चल रहे अमृत महोत्सव के तहत ओपन थियेटर में प्रदर्शित नाटक ‘युग’ के निर्देशक जाय मितई (मणिपुर) ने कहा कि थियेटर का प्रशिक्षण ही किसी कलाकार को आगे बढ़ने के लिये बहुत महत्व रखता है।
धामपुर में अक्षर संस्था, ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन के संयुक्त आयोजन में 40 दिवसीय कार्यशाला के बाद प्रस्तुत नाटक ‘युग’ नाट्य इतिहास में एक मील का पत्थर बताया जा रहा है। इस नाटक के निर्देशक जाय मितई और साजिदा हैं। डायरेक्टर जाय मितई ने शुक्रवार को वार्ता के दौरान बताया कि उन्होंने एनएसडी दिल्ली से डिग्री के बाद लंदन इंटरनेशनल स्कूल ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स लंदन से दो वर्षीय कोर्स भी किया है। सरकारी खर्चे पर ही जाय मितई ने लंदन और जर्मनी में एक्टिंग और निर्देशन आदि का कोर्स किया है। साजिद और जाय मितई पति-पत्नी हैं। दोनों दिल्ली में श्रखंलाबद्ध तरीके से थियेटर वर्कशॉप चलाते हैं।
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जाय मितई का कहना है कि आज हर युवा सीधे फिल्म में जाना चाहता है, लेकिन थियेटर की शिक्षा से आगे बढ़ने वाला युवा ही बेहतर कलाकार बनता है। छोटे शहरों में अभी दर्शक नाटकों को फिल्मी मानसिकता के रूप में देखते हैं। बॉलीवुड में थियेटर जरूरी नहीं है। लेकिन हालीवुड में थियेटर के बाद ही फिल्मों में प्रवेश मिलता है। वहां शक्ल सूरत मायने नहीं रखती। साजिदा बताती हैं कि दो वर्षों के कोविड काल में थियेटर कलाकारों ने भुखमरी जैसे हालात देखे हैं। सामान्य समय में भी सरकार को अब कलाकारों को आर्थिक योजनाएं देनी चाहिए। अभी कोई मां-बाप अपनी संतान को थियेटर लाइन में भेजना नहीं चाहता है। ज्यादातर बच्चे अपने रिस्क पर ही आगे बढ़ते हैं।
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