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जेल में बिताई गई अवधि पर नहीं रिहा होंगे इंडोनेशियाई जमाति

Tue, 28 Jul 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2020 11:39 PM IST
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Indonesians not released on billet term in jail will deposit Indonesian
जेल में बिताई अवधि पर नहीं रिहा होंगे इंडोनेशियाई जमाती
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बिजनौर। एसीजेएम रचना सिंह ने लॉकडाउन के दौरान नगीना की मस्जिद से गिरफ्तार आठ इंडोनेशियाई जमातियों की जेल में बिताई गई अवधि को सजा मानते हुए उन्हें रिहा किए जाने का प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया है।

पुलिस द्वारा लॉकडाउन के दौरान नगीना से गिरफ्तार किये गए इंडोनेशिया के आठ जमातियों महादिखोरिक, वासिन करेसना, नूर मोहम्मद, इलम बिक्का, इटाक सोतियान, मोहम्मद इरशियाद, ओकी अरी सेमरी द्वारा न्यायालय में दिए प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि वे टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। इस दौरान उन्हें धार्मिक प्रचार करने एवं लॉकडाउन उल्लंघन करने और बीमारी फैलाने के झूठे आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया था। उनके पास न तो पैसे हैं और वे न ही अपनी पैरवी करने में समर्थ हैं। वे अपने देश जाना चाहते हैं, यदि अदालत उन्हें अचानक हुए लॉकडाउन के आधार पर दोषी मानता है तो उनकी जेल में बिताई गई अवधि को सजा मानते हुए उनका मुकदमा समाप्त कर उन्हें उनके देश भिजवाने की कृपा करें। इस मामले में सहायक अभियोजन अधिकारी सतेंद्र कुमार ने न्यायालय को अवगत कराया कि विदेशी अधिनियम में दो से आठ वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। अभियुक्तों द्वारा अपने अपराध की सस्वयंकृति नहीं की जा सकती। अदालत ने इस मामले में अपने एक निर्णय में कहा है कि आरोपियों की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में उनके अपराध नहीं बनने का कथन किया गया है। उन्होंने अपने द्वारा सस्वीकृति नहीं की है। बल्कि जेल में बिताई अवधि पर उन्हें छोड़ जाने का अनुरोध किया है। जेल में बिताई गई अवधि को सजा मानते हुए उनके देश भिजवाने का कथन किया गया है। सस्वीकृति सशर्त नहीं हो सकती है। विदेशी अधिनियम में न्यूनतम दंड दो वर्ष है। जेल में बिताई गई अवधि पर प्रस्तुत इस मामले में न्यूनतम दो वर्ष का दंड दिए बिना छोड़ा जाना न्यायोचित नहीं है। इसलिए उनका प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है।
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