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भारतीय सेना ने तोड़ा है चीन के सैनिकों का गुरूर
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सरदार रणबीर सिंह
- फोटो : BIJNOR
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भारतीय सेना ने तोड़ा है चीन के सैनिकों का गुरूर
बिजनौर। गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के सामने भारत का एक एक फौजी हिमालय की चोटी की तरह खड़ा है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन कभी भी भारत की सेना से अब पार नहीं पा सकता। बॉर्डर पर तैनात रह चुके पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारतीय सेना किसी भी हाल में तिरंगे को नीचे नहीं होने देगी। भारतीय सेना बिना हथियारों के भी चीन के सैनिकों को हड्डियां तोड़ कर मार सकती है।
गांव बीरूवाला निवासी सरदार रणबीर सिंह चाइना बॉर्डर की चौकियों पर तैनात रह चुके हैं। वहां के हालात से वे परिचित हैं। वे डोकलाम में भी तैनात रह चुके हैं। उन्होंने देखा है कि अब चीन की सेना भारतीय सेना से भयभीत रहती है। भारतीय सैनिक हर वक्त दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार रहता है। देशभक्ति का जज्बा उनके खून में दौड़ता रहता है। भारतीय सैनिकों ने चीन के सैनिकों की गर्दन की हड्डी नहीं बल्कि उनका गुरूर तोड़ा है।
गांव सौफतपुर निवासी पूर्व सैनिक संजीव सिंह लद्दाख व एलएसी पर तैनात रह चुके हैं। उनका कहना है कि हौसले के अलावा भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से भी भारतीय सेना चीनी सेना पर भारी है। हमारी सेना के पास अत्याधुनिक हथियार हैं जिनका खौफ चीनी सैनिकों में है। भारतीय सेना का मनोबल चीन के सैनिकों से ज्यादा मजबूत है।
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गांव धामपुर निवासी योगेंद्रपाल सिंह भी डोकलाम में तैनात रह चुके हैं। उनका कहना है कि भारतीय सेना चीन की सेना का मनोबल तोड़ चुकी है। दुश्मन देशों की नापाक हरकतों से निपटने के लिए पूर्व सैनिक 24 घंटे तैनात हैं। लेकिन यह केवल बॉर्डर पर लड़ी जाने वाली लड़ाई ही नहीं है। हमारे देश के लोगों को चीन के सामान का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए।
बिजनौर निवासी आलोक कुमार का कहना है कि भारत के सैनिकों पर धोखे से हमला करना चमगादड़ चीन की सेना की धोखेबाजी का सबसे बड़ा सबूत है। देश की सरकार को चीन की सेना के खिलाफ सेना को मुंहतोड़ जवाब देने की छूट दे ताकि चीन की सेना फिर से पीठ में छुरा घोंपने का काम न कर सके।
बिजनौर निवासी सैनिक लवकुश कुमार का कहना है कि चीन की सेना ने हमारी जांबाज सेना के साथ झड़प करके जो गलती की है उसका खामियाजा वह भुगत रही है। अब हमारी सेना 1962 वाली नहीं है। कहा कि भारतीय सेना चीन की आधी सेना को बिना हथियारों के ही हड्डी तोड़कर मार सकती है। भारतीय जवान देशभक्ति के कारण सेना में जाते हैं जबकि चीन के सैनिक जबरन भर्ती किए जाते हैं।
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बिजनौर। गलवां घाटी में चीनी सैनिकों के सामने भारत का एक एक फौजी हिमालय की चोटी की तरह खड़ा है। पूर्व सैनिकों का कहना है कि चीन कभी भी भारत की सेना से अब पार नहीं पा सकता। बॉर्डर पर तैनात रह चुके पूर्व सैनिकों का कहना है कि भारतीय सेना किसी भी हाल में तिरंगे को नीचे नहीं होने देगी। भारतीय सेना बिना हथियारों के भी चीन के सैनिकों को हड्डियां तोड़ कर मार सकती है।
गांव बीरूवाला निवासी सरदार रणबीर सिंह चाइना बॉर्डर की चौकियों पर तैनात रह चुके हैं। वहां के हालात से वे परिचित हैं। वे डोकलाम में भी तैनात रह चुके हैं। उन्होंने देखा है कि अब चीन की सेना भारतीय सेना से भयभीत रहती है। भारतीय सैनिक हर वक्त दुश्मन से लोहा लेने के लिए तैयार रहता है। देशभक्ति का जज्बा उनके खून में दौड़ता रहता है। भारतीय सैनिकों ने चीन के सैनिकों की गर्दन की हड्डी नहीं बल्कि उनका गुरूर तोड़ा है।
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गांव सौफतपुर निवासी पूर्व सैनिक संजीव सिंह लद्दाख व एलएसी पर तैनात रह चुके हैं। उनका कहना है कि हौसले के अलावा भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से भी भारतीय सेना चीनी सेना पर भारी है। हमारी सेना के पास अत्याधुनिक हथियार हैं जिनका खौफ चीनी सैनिकों में है। भारतीय सेना का मनोबल चीन के सैनिकों से ज्यादा मजबूत है।
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गांव धामपुर निवासी योगेंद्रपाल सिंह भी डोकलाम में तैनात रह चुके हैं। उनका कहना है कि भारतीय सेना चीन की सेना का मनोबल तोड़ चुकी है। दुश्मन देशों की नापाक हरकतों से निपटने के लिए पूर्व सैनिक 24 घंटे तैनात हैं। लेकिन यह केवल बॉर्डर पर लड़ी जाने वाली लड़ाई ही नहीं है। हमारे देश के लोगों को चीन के सामान का पूरी तरह बहिष्कार करना चाहिए।
बिजनौर निवासी आलोक कुमार का कहना है कि भारत के सैनिकों पर धोखे से हमला करना चमगादड़ चीन की सेना की धोखेबाजी का सबसे बड़ा सबूत है। देश की सरकार को चीन की सेना के खिलाफ सेना को मुंहतोड़ जवाब देने की छूट दे ताकि चीन की सेना फिर से पीठ में छुरा घोंपने का काम न कर सके।
बिजनौर निवासी सैनिक लवकुश कुमार का कहना है कि चीन की सेना ने हमारी जांबाज सेना के साथ झड़प करके जो गलती की है उसका खामियाजा वह भुगत रही है। अब हमारी सेना 1962 वाली नहीं है। कहा कि भारतीय सेना चीन की आधी सेना को बिना हथियारों के ही हड्डी तोड़कर मार सकती है। भारतीय जवान देशभक्ति के कारण सेना में जाते हैं जबकि चीन के सैनिक जबरन भर्ती किए जाते हैं।

संजीव सिंह।- फोटो : BIJNOR

योगेंद्रपाल सिंह।- फोटो : BIJNOR

आलोक कुमार।- फोटो : BIJNOR

लवकुश कुमार।- फोटो : BIJNOR