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फसल अवशेष से खाद बना आमदनी बढ़ाएं: डीएम
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जिनौर में काकरान वाटिका में किसान मेले में किसानों को वितरित किए गए सरसों के बीच।
- फोटो : BIJNOR
फसल अवशेष से खाद बना आमदनी बढ़ाएं: डीएम
बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि हर खेत हर गांव की सेटेेलाइट से निगरानी की जा रही है। किसान खेतों में पराली, पत्ती न जलाएं। फसलों के अवशेष गलाकर उन्हें खाद में इस्तेमाल करें और आमदनी बढ़ाएं। 20 किसानों को सरसों की मिनी किट नि:शुल्क दी गईं।
डीएम रमाकांत पांडेय बुधवार को कृषि विभाग द्वारा आयोजित फसल अवशेष प्रबंधन व रबी उत्पादकता गोष्ठी में किसानों को जागरूक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी के तापमान में भी बढ़ोतरी होती है। अवशेषों से खाद बनाकर किसान रासायनिक खाद के दो हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से बचा सकते हैं। कूड़े का भी जैविक खाद बनाने का आह्वान किया। सीडीओ केपी सिंह ने फसल चक्र अपनाने पर जोर देकर कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी।
संयुक्त कृषि निदेशक जेपी चौधरी ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है। मिट्टी में जीवांश को बचाने के लिए फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डा.नरेंद्र सिंह ने फसल अवशेष जोतने वाले कृषि यंत्रों के बारे में बताया। उप कृषि निदेशक डा.अवधेश मिश्र ने राजकीय कृषि निवेश बीज भंडारों पर गेहूं, दलहनी व तिलहनी फसलों के बीज के बारे में बताया। फसल बोने के समय व बीज से होने वाले उत्पादन की भी जानकारी दी। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.भूपेंद्र सिंह, एसडीएम विक्रमादित्य सिंह, कृषि वैज्ञानिक डा.केके सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन योगेंद्र पाल सिंह योगी ने किया।
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बिजनौर। डीएम रमाकांत पांडेय ने कहा कि हर खेत हर गांव की सेटेेलाइट से निगरानी की जा रही है। किसान खेतों में पराली, पत्ती न जलाएं। फसलों के अवशेष गलाकर उन्हें खाद में इस्तेमाल करें और आमदनी बढ़ाएं। 20 किसानों को सरसों की मिनी किट नि:शुल्क दी गईं।
डीएम रमाकांत पांडेय बुधवार को कृषि विभाग द्वारा आयोजित फसल अवशेष प्रबंधन व रबी उत्पादकता गोष्ठी में किसानों को जागरूक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मित्र कीट नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी के तापमान में भी बढ़ोतरी होती है। अवशेषों से खाद बनाकर किसान रासायनिक खाद के दो हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से बचा सकते हैं। कूड़े का भी जैविक खाद बनाने का आह्वान किया। सीडीओ केपी सिंह ने फसल चक्र अपनाने पर जोर देकर कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी।
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संयुक्त कृषि निदेशक जेपी चौधरी ने कहा कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होती है। मिट्टी में जीवांश को बचाने के लिए फसल अवशेष नहीं जलाने चाहिए। कृषि वैज्ञानिक डा.नरेंद्र सिंह ने फसल अवशेष जोतने वाले कृषि यंत्रों के बारे में बताया। उप कृषि निदेशक डा.अवधेश मिश्र ने राजकीय कृषि निवेश बीज भंडारों पर गेहूं, दलहनी व तिलहनी फसलों के बीज के बारे में बताया। फसल बोने के समय व बीज से होने वाले उत्पादन की भी जानकारी दी। इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.भूपेंद्र सिंह, एसडीएम विक्रमादित्य सिंह, कृषि वैज्ञानिक डा.केके सिंह आदि मौजूद रहे। संचालन योगेंद्र पाल सिंह योगी ने किया।
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