{"_id":"636559259f342e6cc01621d9","slug":"in-the-mushaira-the-poets-presented-excellent-kalam-nazibabad-news-mrt6122307107","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुशायरे में शायरों ने पेश किए उम्दा कलाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुशायरे में शायरों ने पेश किए उम्दा कलाम
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुशायरे में शायरों ने पेश किए उम्दा कलाम
जलालाबाद। एक शाम मोहम्मद जीशान के नाम महफिल-ए-मुशायरे में शायरों ने अपने उम्दा कलाम पेशकर समा बाधां। मोहल्ला गुलिस्तान राहुखेड़ी में मो. जैद के आवास पर मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसका आगाज अकरम जलालाबादी के नाते पाक से हुआ।
मुशायरे में शायर सज्जाद झंझट ने मैं झंझट हूं विरासत में मिली है शायरी मुझको, मेरे अब्बा के दादा जान के दादा भी शायर थे.., डॉ. नदीम ने जाने किसका हक दबाकर घर में दौलत लाए हो, और उसपे यह सितम इसमें भी बरकत चाहिए.., वकार फराजी ने भूल जाने की जब भी कसम खाई है, बेवफा मुझको तेरी और भी याद आई है.., अरकम हसनपुरी ने वो दिन को रात कहे रात मानी जाती है, अमीरे शहर की हर बात मानी जाती है.., अल्तमश अब्बास ने मेरे लिए मेरा जैसा ढूंढकर लाओ, किसी भी हाल में हिम्मत न हारने वाला लाओ.., इम्तियाज अजहर ने महक रही है इसलिए खूशबू-ए-अजहर, मैं अपनी मां को गले लगाके आया हूं.., समेत सय्यद अहमद, फरीद, असरार, उबैद अहमद, नदीम, मुंशी अकरम, रफी बढ़ापुरी आदि शायरों ने कलाम पेश किए। मुशायरे में जलालाबाद चौकी प्रभारी दीपक, अबरार सलमानी, अजीज मुल्तानी, फिरोज सैफी, शाही अराफात, एमडी खान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
जलालाबाद। एक शाम मोहम्मद जीशान के नाम महफिल-ए-मुशायरे में शायरों ने अपने उम्दा कलाम पेशकर समा बाधां। मोहल्ला गुलिस्तान राहुखेड़ी में मो. जैद के आवास पर मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसका आगाज अकरम जलालाबादी के नाते पाक से हुआ।
मुशायरे में शायर सज्जाद झंझट ने मैं झंझट हूं विरासत में मिली है शायरी मुझको, मेरे अब्बा के दादा जान के दादा भी शायर थे.., डॉ. नदीम ने जाने किसका हक दबाकर घर में दौलत लाए हो, और उसपे यह सितम इसमें भी बरकत चाहिए.., वकार फराजी ने भूल जाने की जब भी कसम खाई है, बेवफा मुझको तेरी और भी याद आई है.., अरकम हसनपुरी ने वो दिन को रात कहे रात मानी जाती है, अमीरे शहर की हर बात मानी जाती है.., अल्तमश अब्बास ने मेरे लिए मेरा जैसा ढूंढकर लाओ, किसी भी हाल में हिम्मत न हारने वाला लाओ.., इम्तियाज अजहर ने महक रही है इसलिए खूशबू-ए-अजहर, मैं अपनी मां को गले लगाके आया हूं.., समेत सय्यद अहमद, फरीद, असरार, उबैद अहमद, नदीम, मुंशी अकरम, रफी बढ़ापुरी आदि शायरों ने कलाम पेश किए। मुशायरे में जलालाबाद चौकी प्रभारी दीपक, अबरार सलमानी, अजीज मुल्तानी, फिरोज सैफी, शाही अराफात, एमडी खान आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन