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नगीना में सपा से नहीं टूटा परंपरागत वोट
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नगीना में सपा से नहीं टूटा परंपरागत वोट
नगीना। नगीना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी व रालोद गठबंधन के परंपरागत वोट का एकजुटता के साथ सपा प्रत्याशी मनोज पारस के साथ खड़े रहना उनकी जीत का प्रमुख आधार रहा। बसपा के परंपरागत वोट में सेंधमारी लगाने के भाजपा के प्रयास असफल रहने व मुस्लिमों का बंटवारा न होना यहां भाजपा की हार का मुख्य कारण रहा।
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मनोज पारस ने जहां मुस्लिम समाज का एकजुटता के साथ वोट हासिल किया, वहीं रालोद के परंपरागत जाट वोट ने भी सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। भाजपा के परंपरागत वोट में सेंधमारी लगाने के साथ-साथ स्थानीय होने का लाभ भी सपा प्रत्याशी मनोज पारस मिला। बसपा प्रत्याशी के पक्ष में मुस्लिमों का रुझान नहीं होने से मनोज पारस की राह आसान हुई, जिसके चलते वह 26451 मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए।
भाजपा प्रत्याशी डॉ. यशवंत सिंह के समर्थक मुस्लिम वोटों के बंटवारा होने, बसपा के दलित वोटों में सेंधमारी के भरोसे अपनी जीत का गणित लगा रहे थे। लेकिन चुनाव परिणामों ने भाजपा के गणित को पूरी तरह असफल साबित कर दिया। जिस किरतपुर क्षेत्र से भाजपा परंपरागत वोट व हिंदू वोटों के सहारे अपनी जीत का ख्वाब देख रही थी उसी क्षेत्र से भाजपा को 18 हजार से अधिक वोटों से हार झेलनी पड़ी। बाद में नगीना पहुंचते-पहुंचते भाजपा की हार का अंतर 26 हजार से ऊपर पहुंच गया। बसपा प्रत्याशी की कमजोर स्थिति का लाभ भी भाजपा के बजाय समाजवादी पार्टी को ही मिलता दिखाई दिया, हालांकि पतंग करीब 10 हजार के करीब वोट लेने में कामयाब हो गई, जिसका दावा भी 20 हजार वोटों तक मिलने का किया जा रहा था। कांग्रेस की खराब स्थिति का लाभ भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के हक में गया। सूत्रों की मानें तो भाजपा के परंपरागत काफी संख्या में वोटरों ने गुपचुप तरीके से यशवंत सिंह की बजाय मनोज पारस को ही वोट किया। जिसके चलते भाजपा को नगीना सीट पर बड़ी हार झेलनी पड़ी।
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नगीना। नगीना विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी व रालोद गठबंधन के परंपरागत वोट का एकजुटता के साथ सपा प्रत्याशी मनोज पारस के साथ खड़े रहना उनकी जीत का प्रमुख आधार रहा। बसपा के परंपरागत वोट में सेंधमारी लगाने के भाजपा के प्रयास असफल रहने व मुस्लिमों का बंटवारा न होना यहां भाजपा की हार का मुख्य कारण रहा।
समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मनोज पारस ने जहां मुस्लिम समाज का एकजुटता के साथ वोट हासिल किया, वहीं रालोद के परंपरागत जाट वोट ने भी सपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। भाजपा के परंपरागत वोट में सेंधमारी लगाने के साथ-साथ स्थानीय होने का लाभ भी सपा प्रत्याशी मनोज पारस मिला। बसपा प्रत्याशी के पक्ष में मुस्लिमों का रुझान नहीं होने से मनोज पारस की राह आसान हुई, जिसके चलते वह 26451 मतों से जीत दर्ज करने में कामयाब हुए।
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भाजपा प्रत्याशी डॉ. यशवंत सिंह के समर्थक मुस्लिम वोटों के बंटवारा होने, बसपा के दलित वोटों में सेंधमारी के भरोसे अपनी जीत का गणित लगा रहे थे। लेकिन चुनाव परिणामों ने भाजपा के गणित को पूरी तरह असफल साबित कर दिया। जिस किरतपुर क्षेत्र से भाजपा परंपरागत वोट व हिंदू वोटों के सहारे अपनी जीत का ख्वाब देख रही थी उसी क्षेत्र से भाजपा को 18 हजार से अधिक वोटों से हार झेलनी पड़ी। बाद में नगीना पहुंचते-पहुंचते भाजपा की हार का अंतर 26 हजार से ऊपर पहुंच गया। बसपा प्रत्याशी की कमजोर स्थिति का लाभ भी भाजपा के बजाय समाजवादी पार्टी को ही मिलता दिखाई दिया, हालांकि पतंग करीब 10 हजार के करीब वोट लेने में कामयाब हो गई, जिसका दावा भी 20 हजार वोटों तक मिलने का किया जा रहा था। कांग्रेस की खराब स्थिति का लाभ भी समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी के हक में गया। सूत्रों की मानें तो भाजपा के परंपरागत काफी संख्या में वोटरों ने गुपचुप तरीके से यशवंत सिंह की बजाय मनोज पारस को ही वोट किया। जिसके चलते भाजपा को नगीना सीट पर बड़ी हार झेलनी पड़ी।
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