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इमाम हुसैन की कुर्बानियों का किया जिक्र
ब्यूरो/अमर उजाला, नजीबाबाद
Updated Fri, 19 May 2017 01:27 AM IST
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नजीबाबाद की जोगीरम्पुरी दरगाह पर मातमी जुलूस निकालती अंजुमन।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की इस्लाम और इंसानियत को बचाने के लिए दी गई कुर्बानियों के जिक्र के साथ जोगीरम्पुरी की सालाना मजलिसें शुरू हुईं। शिया विद्वानों ने शम्सुल हसन हॉल से अपने खिताब में वाकयाते-करबला के जिक्र के साथ इस्लाम के रहबरों पर हुए जुल्म की दास्तां बयां की।
नजफे हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह क्षेत्र एक बार फिर तंबुओं के शहर में तब्दील हो चुका है। जहां-तहां जिक्रे शहादते इमाम हुसैन और साथियों के साथ पूरे क्षेत्र में अली-अली की गूंज है। शम्सुल हसन हॉल से दरगाह के पेश इमाम मौलाना आबिद मैहदी ने मातमी मजलिसों का आगाज करते हुए वाकयाते करबला का जिक्र किया।
उन्होंने क्रूर बादशाह यजीद के जुल्म-ओ-सितम सहकर हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों द्वारा इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत के लिए दी गई कुर्बानियों से सबक लेने की सलाह दी।
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मुजफ्फरनगर से आए मौलाना सय्यद मो.आबिद ने कहा कि इंसान का किरदार और अखलाक उसकी पहचान होती है। हजरत इमाम हुसैन का मानना था कि अपने किरदार और पहचान से दुश्मन को भी अपना बनाया जा सकता है। वाकयाते करबला हमें पैगाम देता है कि चाहे आतंकवाद हो या कोई सा भी जुल्म, संगठित होकर उसका मुकाबला किया जा सकता है।
मौलाना वजीर अब्बास, तंजीम हुसैन, इरशाद अब्बास, डॉ. हुसैन अफजल, मौलाना सय्यद मो. असगर ने कहा कि करबला के शहीदों ने दुनिया को पैगाम दिया है कि इंसानियत, इत्तेहाद और जुल्म से लड़ने की ताकत से कोई भी जंग जीती जा सकती है। करबला की जंग में शहीद हुए 72 लोगों के लश्कर ने इस्लाम और इंसानियत के लिए जो कुर्बानियां दीं, वो हमेशा याद की जाएंगी।
मातमी मजलिसों के साथ मौला अली की बारगाह में मन्नतें मांगने और चादर चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। दूरदराज से आए लोग नम आंखों से मौला अली को याद कर उन्हें नजराना ए अकीदत पेश कर रहे हैं। सचिव विसाल मैहदी के साथ डीएम जगतराज, एसपी अतुल शर्मा, एडीएम मदन सिंह गबरियाल, एसडीएम पीके सिंह, तहसीलदार देवेंद्र पांडेय, सीओ रामानंद कुशवाहा, अशोक कुमार, ट्रेनी सीओ मो.खिराज ने दरगाह की जियारत कर चादर चढ़ाई।
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नजफे हिंद जोगीरम्पुरी दरगाह क्षेत्र एक बार फिर तंबुओं के शहर में तब्दील हो चुका है। जहां-तहां जिक्रे शहादते इमाम हुसैन और साथियों के साथ पूरे क्षेत्र में अली-अली की गूंज है। शम्सुल हसन हॉल से दरगाह के पेश इमाम मौलाना आबिद मैहदी ने मातमी मजलिसों का आगाज करते हुए वाकयाते करबला का जिक्र किया।
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उन्होंने क्रूर बादशाह यजीद के जुल्म-ओ-सितम सहकर हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों द्वारा इंसानियत और इस्लाम की हिफाजत के लिए दी गई कुर्बानियों से सबक लेने की सलाह दी।
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मुजफ्फरनगर से आए मौलाना सय्यद मो.आबिद ने कहा कि इंसान का किरदार और अखलाक उसकी पहचान होती है। हजरत इमाम हुसैन का मानना था कि अपने किरदार और पहचान से दुश्मन को भी अपना बनाया जा सकता है। वाकयाते करबला हमें पैगाम देता है कि चाहे आतंकवाद हो या कोई सा भी जुल्म, संगठित होकर उसका मुकाबला किया जा सकता है।
मौलाना वजीर अब्बास, तंजीम हुसैन, इरशाद अब्बास, डॉ. हुसैन अफजल, मौलाना सय्यद मो. असगर ने कहा कि करबला के शहीदों ने दुनिया को पैगाम दिया है कि इंसानियत, इत्तेहाद और जुल्म से लड़ने की ताकत से कोई भी जंग जीती जा सकती है। करबला की जंग में शहीद हुए 72 लोगों के लश्कर ने इस्लाम और इंसानियत के लिए जो कुर्बानियां दीं, वो हमेशा याद की जाएंगी।
मातमी मजलिसों के साथ मौला अली की बारगाह में मन्नतें मांगने और चादर चढ़ाने का सिलसिला शुरू हो गया। दूरदराज से आए लोग नम आंखों से मौला अली को याद कर उन्हें नजराना ए अकीदत पेश कर रहे हैं। सचिव विसाल मैहदी के साथ डीएम जगतराज, एसपी अतुल शर्मा, एडीएम मदन सिंह गबरियाल, एसडीएम पीके सिंह, तहसीलदार देवेंद्र पांडेय, सीओ रामानंद कुशवाहा, अशोक कुमार, ट्रेनी सीओ मो.खिराज ने दरगाह की जियारत कर चादर चढ़ाई।