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Bijnor: गोद लेने हैं टीबी के मरीज तो खिलाना होगा अंडा और पनीर

Mon, 19 Sep 2022 12:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बिजनौर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 19 Sep 2022 12:18 AM IST
सार

टीवी के मरीजों को गोद लेने से पहले अब रजिस्ट्रेशन कराना पड़ेगा। यह भी तय करना पड़ेगा कि उन्हें भरपूर पोषण दिया जाएगा।

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If TB patients are to be adopted, then egg and cheese will have to be fed
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विस्तार

 अब टीबी के मरीजों को गोद लेने से पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। रजिस्ट्रेशन करते समय यह बताना होगा कि मरीजों को पोषण देंगे या नहीं। टीबी मरीजों को गोद लेने के बाद स्वास्थ्य विभाग बाद में जांच भी करेगा कि मरीजों को पोषण दिया जा रहा है या नहीं।
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स्वास्थ्य विभाग अभी तक ऑफलाइन ही संस्थाओं को टीबी मरीज गोद देता था। मगर अब ऐसा नहीं होगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने निक्षय 2.0 पोर्टल का लोकार्पण किया है।
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जिस पर टीबी के मरीजों की जानकारी उपलब्ध है। जिसके चलते कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर टीबी के मरीजों को गोद ले सकता है। इसके लिए उसे पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करते समय ही भरना होगा कि वह कितने मरीजों को गोद लेगा।
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किस क्षेत्र के मरीजों को गोद लेगा। साथ ही यह भी भरना होगा कि गोद लेने के बाद मरीज को पोषण देगा या नहीं। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन करते समय व्यक्ति को यह बताना होगा कि वह मरीजों को कितने दिनों के लिए गोद लेगा। रजिस्ट्रेशन में व्यक्ति की ईमेल आईडी, मोबाइल नंबर जरूरी है। 

टीबी मरीजों को गोद लेने वाले कहलाएंगे निक्षय मित्र
टीबी रोगियों को गोद लेने वाली सामाजिक संस्थाओं, औद्योगिक घरानों, शैक्षणिक संस्थाओं और व्यक्ति निक्षय मित्र कहलाएंगे। निक्षय 2.0 पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करने के बाद ही व्यक्ति निक्षय मित्र कहलाएगा। इसके बाद निक्षय मित्र टीबी मरीजों को गोद ले सकेगा। वह खुद चयन करेगा कि वह क्षेत्र, जिले कहां के टीबी मरीज गोद लेगा।
टीबी मरीजों को देना होगा ये पोषण
टीबी मरीजों को गोद लेने वाली संस्थाओं को हर महीने एक मरीज को फूड बास्केट देनी होगी। जिसमें अनाज, दाल, वेजीटेबिल कुकिंग ऑयल, दूध पाउडर या दूध, अंडा देना होगा। बड़ों और बच्चों के लिए मात्रा अलग-अलग रखी गई है।
इस साल गोद दिए 3551 टीबी मरीज
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में 7288 टीबी मरीजों का इलाज किया जा रहा है। वहीं साल 2022 में सामाजिक संस्थाओं, व्यक्ति, प्राइवेट अस्पतालों को 3551 टीबी मरीज गोद दिए गए। जिनमें से 2637 मरीज ठीक हो चुके हैं। जिसके चलते इस समय गोद लिए हुए 914 मरीजों का इलाज चल रहा है।

टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए अब ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होगा। जिसके लिए औद्योगिक घरानों से बातचीत की जा रही है। उन्हें ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के बारे में बताया जा रहा है। ऑनलाइन पंजीकरण कराकर टीबी मरीजों को गोद लेने की बात चीनी मिलों और अन्य फैक्टरी मालिकों से बात हो रही है।
-डॉ. वीएस रावत, जिला क्षय रोग अधिकारी
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