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Bijnor News: रसोई की पहली रोटी गाय को समर्पित करने का प्रण लिया
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हल्दौर। नगर के मोहल्ला चमनवाला में आयोजित 24 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का बुधवार को पूर्णाहुति के साथ विधिवत समापन हो गया। चार दिवसीय यह आयोजन गायत्री तीर्थ शांतिकुंज हरिद्वार के गायत्री परिवार तत्वावधान में संपन्न हुआ। उपस्थित जनसमुदाय ने एक बुराई त्यागने और एक अच्छाई अपनाने, नशे जैसी कुरीतियों से दूर रहने के साथ अहंकार, निंदा का त्याग करने का संकल्प दोहराया। साथ ही प्रतिदिन प्राणायाम व ध्यान-योग करने, तुलसी के पौधे में जल अर्पित कर सूर्य देव को प्रणाम करने, घर में गायत्री यज्ञ व 16 संस्कारों के पालन का भी संकल्प लिया गया। महिलाओं ने रसोई की पहली रोटी गाय को समर्पित करने का प्रण लिया।
कथावाचक डॉ. अशोक ने कहा कि कथा व्यक्ति की व्यथा को हर लेती है। उन्होंने कहा कि पूर्व समय में बच्चों को दादा-दादी व नाना-नानी से प्रेरक कथाएं सुनने को मिलती थीं, जिससे उनमें अच्छे संस्कार विकसित होते थे। पावन प्रज्ञा पुराण, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित, 18 पुराणों का सार है और वर्तमान समय की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। महायज्ञ में गोला, सुपारी एवं अन्य पूजन सामग्री के साथ पूर्णाहुति अर्पित कर आध्यात्मिक व भौतिक उन्नति की कामना की गई। कार्यक्रम के अंत में कृष्णा देवी चौहान ने सभी का आभार व्यक्त किया, जबकि जिला समन्वयक इंद्रदेव शर्मा ने शांतिकुंज टोली का तिलक कर विदाई दी।
गायत्री शांति पीठ नजीबाबाद व गायत्री परिवार के विभिन्न जनपदों से आए समन्वयकों में डॉ. दीपक कुमार ने भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति बताते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से विवेकानंद, दयानंद और निवेदिता जैसे संस्कृति प्रचारक बनने का संदेश दिया। इस दौरान कौशल चौहान, नीतू चौहान, रजनीश राजपूत, निधि राजपूत, नरेश सैनी, सोमेश्वर दत्त पंकज, अनीता यादव, श्रुतिकीर्ति, अंकित, शालू, शिवानी सहित गायत्री परिवार के अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग सराहनीय रहा।
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कथावाचक डॉ. अशोक ने कहा कि कथा व्यक्ति की व्यथा को हर लेती है। उन्होंने कहा कि पूर्व समय में बच्चों को दादा-दादी व नाना-नानी से प्रेरक कथाएं सुनने को मिलती थीं, जिससे उनमें अच्छे संस्कार विकसित होते थे। पावन प्रज्ञा पुराण, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा रचित, 18 पुराणों का सार है और वर्तमान समय की समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। महायज्ञ में गोला, सुपारी एवं अन्य पूजन सामग्री के साथ पूर्णाहुति अर्पित कर आध्यात्मिक व भौतिक उन्नति की कामना की गई। कार्यक्रम के अंत में कृष्णा देवी चौहान ने सभी का आभार व्यक्त किया, जबकि जिला समन्वयक इंद्रदेव शर्मा ने शांतिकुंज टोली का तिलक कर विदाई दी।
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गायत्री शांति पीठ नजीबाबाद व गायत्री परिवार के विभिन्न जनपदों से आए समन्वयकों में डॉ. दीपक कुमार ने भारतीय संस्कृति को विश्व की सर्वश्रेष्ठ संस्कृति बताते हुए ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से विवेकानंद, दयानंद और निवेदिता जैसे संस्कृति प्रचारक बनने का संदेश दिया। इस दौरान कौशल चौहान, नीतू चौहान, रजनीश राजपूत, निधि राजपूत, नरेश सैनी, सोमेश्वर दत्त पंकज, अनीता यादव, श्रुतिकीर्ति, अंकित, शालू, शिवानी सहित गायत्री परिवार के अनेक कार्यकर्ताओं का सहयोग सराहनीय रहा।
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