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नहर की पटरी टूटने से सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 18 Jun 2016 12:24 AM IST
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ग्राम शादीपुर मिलक के पास नहर की पटरी टूटने से जलमग्न हुईं फसल।
- फोटो : अमर उजाला
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हल्दौर में गांव शादीपुर मिलक के निकट नहर की पटरी टूट जाने से किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। पटरी ठीक करने पहुंचे ठेकेदार का गांव वालों ने घेराव कर जमकर खरी खोटी सुनाई। ठेकेदार द्वारा अधिकारियों को सूचित करने के बाद भी कोई मौके पर आकर नहीं फटका। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को न आता देखकर किसानों ने पटरी की मरम्मत करवानी शुरू कर दी।
नहर आजकल पानी से लबालब चल रही है। गांव वालों के अनुसार नहर की पटरी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त थी। उन्होंने कमजोर पटरी की मरम्मत कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को बताया था, लेकिन किसी ने भी नहर की पटरी की मरम्मत नहीं कराई। बृहस्पतिवार को नहर पानी से लबालब भरी हुई थी। रात में किसी समय नहर की पटरी गांव की ओर से टूट गई। नहर का पानी किसानों के खेत में खड़े गन्ने, चरी, बाजरा, धान आदि के फसलों में भर गया। किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। पानी धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ने लगा। गांव वालों ने विभागीय अधिकारियों को फोन पर इसकी सूचना दी। सूचना पाकर ठेकेदार नासिर पटरी की मरम्मत कराने लेवर को साथ लेकर मौके पर पहुंचा तो वहाँ पर मौजूद किसानों ओमपाल सिंह, विपिन कुमार, वीरेन्द्र, ग्राम प्रधान यशवीर सिंह, महेंद्र सिंह, तनवीर, रामकुमार, अंकित कुमार, इंद्रजीत, भीम सिंह आदि किसानों ने ठेकेदार का घेराव कर जमकर हंगामा किया और उसे खरी-खोटी सुनाई। किसानों का आरोप था कि नहर की पटरी दुरुस्त न होने की सूचना देने के बावजूद भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से पटरी टूट गई। यदि पहले से ही पटरी की मरम्मत करा दी जाती तो पटरी नहीं टूटती। किसानों के अनुसार पटरी टूटने से जलमग्न हुई फसल दोबारा नहीं विकसित होगी। कुछ किसान फसल बर्बाद होने पर मानदेय की मांग को लेकर भी अड़ गए। ठेकेदार ने इस मामले की सूचना विभागीय अधिकारियों को दी लेकिन कोई भी अधिकारी किसानों की समस्या का समाधान कराने नही पहुंचा। इस बात को लेकर किसानों में रोष व्याप्त रहा।
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नहर आजकल पानी से लबालब चल रही है। गांव वालों के अनुसार नहर की पटरी जगह-जगह से क्षतिग्रस्त थी। उन्होंने कमजोर पटरी की मरम्मत कराने के लिए विभागीय अधिकारियों को बताया था, लेकिन किसी ने भी नहर की पटरी की मरम्मत नहीं कराई। बृहस्पतिवार को नहर पानी से लबालब भरी हुई थी। रात में किसी समय नहर की पटरी गांव की ओर से टूट गई। नहर का पानी किसानों के खेत में खड़े गन्ने, चरी, बाजरा, धान आदि के फसलों में भर गया। किसानों की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न हो गई। पानी धीरे-धीरे गांव की ओर बढ़ने लगा। गांव वालों ने विभागीय अधिकारियों को फोन पर इसकी सूचना दी। सूचना पाकर ठेकेदार नासिर पटरी की मरम्मत कराने लेवर को साथ लेकर मौके पर पहुंचा तो वहाँ पर मौजूद किसानों ओमपाल सिंह, विपिन कुमार, वीरेन्द्र, ग्राम प्रधान यशवीर सिंह, महेंद्र सिंह, तनवीर, रामकुमार, अंकित कुमार, इंद्रजीत, भीम सिंह आदि किसानों ने ठेकेदार का घेराव कर जमकर हंगामा किया और उसे खरी-खोटी सुनाई। किसानों का आरोप था कि नहर की पटरी दुरुस्त न होने की सूचना देने के बावजूद भी विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से पटरी टूट गई। यदि पहले से ही पटरी की मरम्मत करा दी जाती तो पटरी नहीं टूटती। किसानों के अनुसार पटरी टूटने से जलमग्न हुई फसल दोबारा नहीं विकसित होगी। कुछ किसान फसल बर्बाद होने पर मानदेय की मांग को लेकर भी अड़ गए। ठेकेदार ने इस मामले की सूचना विभागीय अधिकारियों को दी लेकिन कोई भी अधिकारी किसानों की समस्या का समाधान कराने नही पहुंचा। इस बात को लेकर किसानों में रोष व्याप्त रहा।
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