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सांसे कैसे लेते होंगे, जहर फिजा में घोलने वाले...
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सांसें कैसे लेते होंगे, जहर फिजा में घोलने वाले...
नजीबाबाद। गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से आयोजित मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किया। शायर डॉ. आफताब नोमानी को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
आजाद पब्लिक स्कूल हवेलीतला में जश्ने आफताब मुशायरे का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सपा नेता फरहान खान ने उर्दू अदब को जिंदा रखने के लिए समय-समय पर मुशायरे के आयोजन पर जोर दिया। मुशायरा अध्यक्ष हाजी नौशाद अख्तर सैफी ने कहा कि मुशायरों से समाज में भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। आजाद पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर हाजी शमशुल इस्लाम एड. ने कहा मुशायरे समाज को आईना दिखाने का काम भी करते हैं।
मुशायरे में महेंद्र अश्क ने मैं जाम उठा रहा था कि तुम याद आ गए.., शनावर किरतपुरी ने मैं कैसे मोम की कुर्सी पर बैठूं, सियासत आग है पानी नहीं.., डॉ. आफताब नोमानी ने सांसे कैसे लेते होंगे, जहर फिजा में घोलने वाले.., आदि कलाम पेश किया। ं
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इसके अलावा मुशायरे में ताहिर सउद, जहूर अहमद, अशरफ, शाहिद अंजुम, इम्तियाज अजहर, एहतेशाम, डॉ. इलियास अंसारी, हाफिज शादाब, उबेद अहमद, मोनू, अब्दुल, सैयद अहमद, कारी शुऐब, नौशाद अहमद, सुहेल शमसी, अकरम कासमी, अख्तर मुल्तानी, नदीम, हारुन आदि ने अपने कलाम पेश किए।
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नजीबाबाद। गीत गजल संगम एकेडमी की ओर से आयोजित मुशायरे में शायरों ने एक से बढ़कर एक कलाम पेश किया। शायर डॉ. आफताब नोमानी को शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
आजाद पब्लिक स्कूल हवेलीतला में जश्ने आफताब मुशायरे का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि सपा नेता फरहान खान ने उर्दू अदब को जिंदा रखने के लिए समय-समय पर मुशायरे के आयोजन पर जोर दिया। मुशायरा अध्यक्ष हाजी नौशाद अख्तर सैफी ने कहा कि मुशायरों से समाज में भाईचारे को बढ़ावा मिलता है। आजाद पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर हाजी शमशुल इस्लाम एड. ने कहा मुशायरे समाज को आईना दिखाने का काम भी करते हैं।
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मुशायरे में महेंद्र अश्क ने मैं जाम उठा रहा था कि तुम याद आ गए.., शनावर किरतपुरी ने मैं कैसे मोम की कुर्सी पर बैठूं, सियासत आग है पानी नहीं.., डॉ. आफताब नोमानी ने सांसे कैसे लेते होंगे, जहर फिजा में घोलने वाले.., आदि कलाम पेश किया। ं
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इसके अलावा मुशायरे में ताहिर सउद, जहूर अहमद, अशरफ, शाहिद अंजुम, इम्तियाज अजहर, एहतेशाम, डॉ. इलियास अंसारी, हाफिज शादाब, उबेद अहमद, मोनू, अब्दुल, सैयद अहमद, कारी शुऐब, नौशाद अहमद, सुहेल शमसी, अकरम कासमी, अख्तर मुल्तानी, नदीम, हारुन आदि ने अपने कलाम पेश किए।