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हिंदी से ही हिंद की है जग में पहचान

Sun, 05 Sep 2021 12:06 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 12:06 AM IST
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Hindi is the identity of Hind in the world.
नजर बिजनौरी। - फोटो : DHAMPUR
हिंदी से ही हिंद की है जग में पहचान
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धामपुर/बिजनौर। हिंदी से ही हिंद की है जग में पहचान, करना है हमको सदा हिंदी का सम्मान। यह बात शनिवार को धामपुर में आए साहित्यकार नजर बिजनौरी ने कही है। उनका कहना है कि उनका लक्ष्य हिंदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकाना है। नजर बिजनौरी वर्तमान में मुंबई में साहित्य के क्षेत्र में बिजनौर के नाम को देश में विख्यात करने में लगे हैं।
शनिवार को धामपुर एसबीडी कालेज में वार्ता के दौरान नजर बिजनौरी ने बताया कि उनकी शिक्षा दीक्षा तो बिजनौर में ही हुई है। वह बिजनौर जिले के सहसपुर मेवा नवादा में 4 मार्च 1977 में पैदा हुए हैं। उन्होंने हाईस्कूल की परीक्षा सहसपुर से ही उत्तीर्ण की और अब वर्तमान में मुंबई में साहित्य के क्षेत्र में बिजनौर के नाम को देश में विख्यात करने में लगे हैं। उनका लक्ष्य साहित्य के क्षेत्र में दुनिया के लोगों को जागरूक कर हिंदी और हिंदुस्तान के नाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है। वह बिजनौर से 1997 में कुछ साहित्य के क्षेत्र में नया करने को मुंबई चले गए थे। जो वहीं के होकर रह गए। लेकिन वे आज भी अपनी जन्मभूमि को नहीं भूले हैं। दुनिया उन्हें और उनके नाम को नजर बिनजौरी से जाने, ऐसा कुछ करने का सदैव प्रयास करते रहते हैं। अब तक उनके स्तर से साहित्य के क्षेत्र में करीब 75 साहित्यिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों मंचों के माध्यम से प्रचारित और प्रसारित कर चुके हैं। इनमें मुशायरे, कवि सम्मेलन आदि शामिल हैं। इस क्षेत्र में अब तक उन्हें अखिल स्तर पर अवार्ड भी मिल चुके हैं। साल 2001 में वेस्ट नौजवान कवि का अवार्ड दिल्ली से मिल चुका है। जिगर मंच मुरादाबाद से जिगर मुरादाबादी अवार्ड 2008 में मिला है। 2010 में महाराष्ट्र उर्दू साहित्य एकादमी अवार्ड महाराष्ट्र सरकार की ओर से ओर से मिल चुका है। उनके द्वारा 2007 से साहित्य के क्षेत्र में संस्थाओं, संगठनों व युवाओं को आगे लाने को अखिल स्तर पर एक टॉप टेन कनविनर अवार्ड शुरू किया था। अब वह जल्द ही कोई बड़ा फेस्टीबल करने की प्लॉन बना रहे हैं, जिसका शीर्षक हम फेस्ट मुंबई हिंदी, उर्दू व मराठी है।
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साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं नजर बिजनौरी
नजर बिजनौरी बताते हैं कि वे एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। परिवार के सदस्य आज भी अपने परंपरागत कार्य से जुड़े हैं। वे चाहते हैं कि युवा वर्ग अपने सामाजिक दायित्वों के साथ साथ साहित्य के क्षेत्र में भी कुछ नया करें, जिससे हमारे देश का नाम विश्वपटल पर चमकता रहे।
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40 से ज्यादा साहित्यकारों को तैयार कर देश को समर्पित किया
बताते हैं कि वह अब तक अपनी मेहनत से संजोकर कर करीब 40 से ज्यादा साहित्यकार, कवि व शायर देश को समर्पित कर चुके हैं। उन्हें इस क्षेत्र में बढ़ने के लिए उनके शिक्षक मास्टर अब्दुल रसीद ने प्रेरित किया था। उन्होंने उनकी वजह से स्कूल में अंताक्षरी कार्यक्रम को चालू किया था।
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