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Bijnor News: सुधरेगी सेहत-बरसेगा धन, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा सहजन
Sun, 25 May 2025 11:16 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 25 May 2025 11:16 PM IST
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बिजनौर में वन विभाग की नर्सरी में तैयार की जा रही सहजन की पौध। संवाद
बिजनौर। सहजन (मोरिंगा) औषधीय गुणों की वजह से दुनियाभर में मशहूर है। अब सहजन बिजनौर में महिलाओं के लिए आमदनी का जरिया बनने जा रहा है। दरअसल जिले के 11 गांव में सहजन के बाग विकसित करने की कवायद धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। जुलाई में 22 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और मनरेगा के तालमेल से जिले के 11 ब्लॉक में एक-एक गांव में ग्राम समाज की जमीनों को चिह्नित किया गया है। पांच-पांच एकड़ जमीन में दो-दो हजार सहजन के पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए बीते एक साल से तैयारी चल रही थी। इसी क्रम में वन विभाग का सहयोग लेकर अलग-अलग नर्सरी में 32 हजार सहजन की पौध तैयार करवाई गई हैं।
पत्ते, फली और तना सभी हैं उपयोगी
सहजन की खासियत यह है कि इस पेड़ के सभी भाग सेहत के लिए फायदेमंद है। विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर ये पेड़ पूरे 300 रोगों के उपचार में उपयोग लाया जाता है। बताते हैं कि पत्तों में संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी और केले से 15 गुना ज्यादा पोटैशियम पाया जाता है।
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दो साल तक देखभाल करेंगे मनरेगा मजदूर
सिर्फ पौध रोपित करने के बाद ही काम नहीं निबट जाएगा बल्कि पौध से पेड़ बनने तक पूरे दो साल मनरेगा मजदूरों की जिम्मेदारी रहेगी। उक्त मजदूर पौधों की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई करेंगे। इसके बाद इन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के कलस्टर स्तरीय संगठन के हवाले कर दिया जाएगा।
बनेगा मोरिंगा पाउडर और टेबलेट
आयुर्वेदिक चिकित्सा में मोरिंगा की जबरदस्त डिमांड है। ऐसे में महिलाओं का समूह उद्यम लगाएगा। जिसमें पत्तियों और सूखी फलियों का पाउडर तैयार होगा। साथ ही टेबलेट भी बनाई जाएगी। जिसे बाजार में बेचा जाएगा। साथ ही फलियों का अचार बनाकर बेचने की भी योजना है।
इन जगहों पर होगा पौधारोपण
अफजलगढ़ ब्लॉक के गांव कांधला, स्योहारा के अमानतपुर, धामपुर के गांव नवादा केशों, हल्दौर के गांव शरीफपुर, जलीलपुर के गांव धींवरपुरा में जमीन का चयन कर लिया गया है। इनके अलावा किरतपुर के गांव भोजपुर, कोतवाली के गांव जाफरपुर, मोहम्मदपुर देवमल के गांव धर्मनगरी, नजीबाबाद के गांव जसवंतपुर, नहटौर के महमूदपुर और नूरपुर के गांव औरंगाबाद में भी ग्राम समाज की जमीन पर मोरिंगा के दो दो हजार पौधे लगाए जाएंगे।
11 गांव में पांच पांच एकड़ जमीन पर सहजन के 22 हजार पौध लगाने की योजना है। जुलाई में पौधारोपण किया जाएगा। एनआरएलएम से बात हो चुकी है। समूहों के कलस्टर फेडरेशन पत्तियों का पाउडर, टेबलेट बनाएंगे। अचार, सब्जी और चारे में भी इसका प्रयोग होता। ...डीसी यादव, उपायुक्त मनरेगा
ट्री ऑफ लाइफ
आर्युवेदिक चिकित्सक डॉ. सर्वेश चंद्रा ने बताया कि सहजन में एंटी ऑक्सीडेंट, केल्सियम, प्रोटिन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। हृदयरोग, जोड़ों में दर्द, सूजन की दवाओं में सहजन का इस्तेमाल किया जाता है। रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही जरूरी तत्वोेें की पूर्ति करता है। सहजन को ट्री ऑफ लाइफ भी कहा जाता है।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और मनरेगा के तालमेल से जिले के 11 ब्लॉक में एक-एक गांव में ग्राम समाज की जमीनों को चिह्नित किया गया है। पांच-पांच एकड़ जमीन में दो-दो हजार सहजन के पेड़ लगाए जाएंगे। इसके लिए बीते एक साल से तैयारी चल रही थी। इसी क्रम में वन विभाग का सहयोग लेकर अलग-अलग नर्सरी में 32 हजार सहजन की पौध तैयार करवाई गई हैं।
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पत्ते, फली और तना सभी हैं उपयोगी
सहजन की खासियत यह है कि इस पेड़ के सभी भाग सेहत के लिए फायदेमंद है। विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर ये पेड़ पूरे 300 रोगों के उपचार में उपयोग लाया जाता है। बताते हैं कि पत्तों में संतरे से सात गुना ज्यादा विटामिन सी और केले से 15 गुना ज्यादा पोटैशियम पाया जाता है।
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दो साल तक देखभाल करेंगे मनरेगा मजदूर
सिर्फ पौध रोपित करने के बाद ही काम नहीं निबट जाएगा बल्कि पौध से पेड़ बनने तक पूरे दो साल मनरेगा मजदूरों की जिम्मेदारी रहेगी। उक्त मजदूर पौधों की देखभाल, सिंचाई, निराई-गुड़ाई करेंगे। इसके बाद इन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के कलस्टर स्तरीय संगठन के हवाले कर दिया जाएगा।
बनेगा मोरिंगा पाउडर और टेबलेट
आयुर्वेदिक चिकित्सा में मोरिंगा की जबरदस्त डिमांड है। ऐसे में महिलाओं का समूह उद्यम लगाएगा। जिसमें पत्तियों और सूखी फलियों का पाउडर तैयार होगा। साथ ही टेबलेट भी बनाई जाएगी। जिसे बाजार में बेचा जाएगा। साथ ही फलियों का अचार बनाकर बेचने की भी योजना है।
इन जगहों पर होगा पौधारोपण
अफजलगढ़ ब्लॉक के गांव कांधला, स्योहारा के अमानतपुर, धामपुर के गांव नवादा केशों, हल्दौर के गांव शरीफपुर, जलीलपुर के गांव धींवरपुरा में जमीन का चयन कर लिया गया है। इनके अलावा किरतपुर के गांव भोजपुर, कोतवाली के गांव जाफरपुर, मोहम्मदपुर देवमल के गांव धर्मनगरी, नजीबाबाद के गांव जसवंतपुर, नहटौर के महमूदपुर और नूरपुर के गांव औरंगाबाद में भी ग्राम समाज की जमीन पर मोरिंगा के दो दो हजार पौधे लगाए जाएंगे।
11 गांव में पांच पांच एकड़ जमीन पर सहजन के 22 हजार पौध लगाने की योजना है। जुलाई में पौधारोपण किया जाएगा। एनआरएलएम से बात हो चुकी है। समूहों के कलस्टर फेडरेशन पत्तियों का पाउडर, टेबलेट बनाएंगे। अचार, सब्जी और चारे में भी इसका प्रयोग होता। ...डीसी यादव, उपायुक्त मनरेगा
ट्री ऑफ लाइफ
आर्युवेदिक चिकित्सक डॉ. सर्वेश चंद्रा ने बताया कि सहजन में एंटी ऑक्सीडेंट, केल्सियम, प्रोटिन पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। हृदयरोग, जोड़ों में दर्द, सूजन की दवाओं में सहजन का इस्तेमाल किया जाता है। रोग से लड़ने की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही जरूरी तत्वोेें की पूर्ति करता है। सहजन को ट्री ऑफ लाइफ भी कहा जाता है।