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हर-हर महादेव के जयकारों से गूंज उठा शहर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 20 Feb 2017 12:08 AM IST
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नजीबाबाद में हरिद्वार से कांवड़ लेकर पहुंचीं रूद्रपुर क्षेत्र कीं महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
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नजीबाबाद में लब पर महादेव का गुणगान और गंतव्य की ओर कदमताल। कुछ ऐसा ही नजारा था रविवार को नजीबाबाद क्षेत्र का। हरिद्वार से कांवड़ में गंगाजल लेकर शिवभक्त कांवड़ियों के जत्थे नजीबाबाद से गंतव्य की ओर आगे बढ़े। इससे पहले कांवड़ियों ने प्राचीन स्वयंभू सिद्ध पीठ मोटा महादेव मंदिर पर परंपरागत जलाभिषेक किया।
ज्यों-ज्यों महाशिवरात्रि पर्व पास आ रहा है, कांवड़ियों में उत्साह और भी बढ़ता जा रहा है। महज 24 घंटे के भीतर हजारों कांवड़िये हरिद्वार से चलकर नजीबाबाद होते हुए शाहजहांपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, रूद्रपुर आदि क्षेत्रों के लिए निकल चुके हैं। सोमवार से बरेली एवं उसके आसपास क्षेत्रों के कांवड़िये नजीबाबाद से गुजरेंगे। पुरुष कांवड़ियों के साथ साथ महिलाएं और बच्चे भी भोलेनाथ की भक्ति से सराबोर नजर आ रहे हैं। रविवार को महिलाओं का जत्था मोटा महादेव मंदिर पर पहुंचा। रूद्रपुर निवासी तरु सरकार, खेड़ा निवासी कौशल्या व इंद्रा ने बताया कि जिस भक्त पर भगवान शिव की कृपा हो जाए, उसका लोक-परलोक संवर जाता है। इसी कामना के साथ वे
कांवड़ लेकर निकली हैं। खेड़ा निवासी एक महिला तो सात और नौ वर्ष के दो पुत्रों के साथ कांवड़ यात्रा कर रही है।
गौरीशंकर मंदिर में स्वीकार होती है प्रार्थना
मंडावर में गांव तितरवाला के पास गंगा किनारे बने गौरी शंकर मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर आसपास के गांवों के सैकड़ों कांवड़िये जल चढ़ाते हैं। मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना स्वीकार होती है। इस मंदिर से जुड़ी अनेक धार्मिक व रोचक कहानियां हैं। आसपास के ग्रामीणों के अनुसार, 100 साल से पहले गांव तितरवाला के पास गंगा बहती थी। गंगा की धारा पीछे सिमटी तो रेत में एक शिवलिंग निकला। पास के गांव काजीवाला के लोगों को इसके बारे में पता चला तो वे शिवलिंग लेने पहुंच गए। ग्रामीणों ने शिवलिंग को अपनी बैलगाड़ी में रख लिया, लेकिन वह बैलगाड़ी को तोड़ता हुआ फिर गंगा की रेती में जम गया। ग्रामीणों ने एक-एक कर सात गाड़ियों में शिवलिंग को रखा, लेकिन हर बार वह गंगा की रेती में जा समाता। इसके बाद ग्रामीणों ने वहीं मंदिर बनवा दिया। यहां महाशिवरात्रि पर सैकड़ों कांवड़िये कांवड़ चढ़ाते हैं, लेकिन शिवलिंग पर सबसे जल गांव काजीवाला के ग्रामीण चढ़ाते हैं। पुजारी कूड़वा गिरि के अनुसार, मंदिर में सच्ची कामना स्वीकार होने की मान्यता है।
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ज्यों-ज्यों महाशिवरात्रि पर्व पास आ रहा है, कांवड़ियों में उत्साह और भी बढ़ता जा रहा है। महज 24 घंटे के भीतर हजारों कांवड़िये हरिद्वार से चलकर नजीबाबाद होते हुए शाहजहांपुर, हल्द्वानी, नैनीताल, रूद्रपुर आदि क्षेत्रों के लिए निकल चुके हैं। सोमवार से बरेली एवं उसके आसपास क्षेत्रों के कांवड़िये नजीबाबाद से गुजरेंगे। पुरुष कांवड़ियों के साथ साथ महिलाएं और बच्चे भी भोलेनाथ की भक्ति से सराबोर नजर आ रहे हैं। रविवार को महिलाओं का जत्था मोटा महादेव मंदिर पर पहुंचा। रूद्रपुर निवासी तरु सरकार, खेड़ा निवासी कौशल्या व इंद्रा ने बताया कि जिस भक्त पर भगवान शिव की कृपा हो जाए, उसका लोक-परलोक संवर जाता है। इसी कामना के साथ वे
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कांवड़ लेकर निकली हैं। खेड़ा निवासी एक महिला तो सात और नौ वर्ष के दो पुत्रों के साथ कांवड़ यात्रा कर रही है।
गौरीशंकर मंदिर में स्वीकार होती है प्रार्थना
मंडावर में गांव तितरवाला के पास गंगा किनारे बने गौरी शंकर मंदिर में हर साल महाशिवरात्रि पर्व पर आसपास के गांवों के सैकड़ों कांवड़िये जल चढ़ाते हैं। मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से की गई प्रार्थना स्वीकार होती है। इस मंदिर से जुड़ी अनेक धार्मिक व रोचक कहानियां हैं। आसपास के ग्रामीणों के अनुसार, 100 साल से पहले गांव तितरवाला के पास गंगा बहती थी। गंगा की धारा पीछे सिमटी तो रेत में एक शिवलिंग निकला। पास के गांव काजीवाला के लोगों को इसके बारे में पता चला तो वे शिवलिंग लेने पहुंच गए। ग्रामीणों ने शिवलिंग को अपनी बैलगाड़ी में रख लिया, लेकिन वह बैलगाड़ी को तोड़ता हुआ फिर गंगा की रेती में जम गया। ग्रामीणों ने एक-एक कर सात गाड़ियों में शिवलिंग को रखा, लेकिन हर बार वह गंगा की रेती में जा समाता। इसके बाद ग्रामीणों ने वहीं मंदिर बनवा दिया। यहां महाशिवरात्रि पर सैकड़ों कांवड़िये कांवड़ चढ़ाते हैं, लेकिन शिवलिंग पर सबसे जल गांव काजीवाला के ग्रामीण चढ़ाते हैं। पुजारी कूड़वा गिरि के अनुसार, मंदिर में सच्ची कामना स्वीकार होने की मान्यता है।
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