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गुलदार की तलाश : दो दिन में 15 किलोमीटर चलीं सुलोचना और डायना
Tue, 01 Aug 2023 12:08 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Tue, 01 Aug 2023 12:08 AM IST
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नगीना के ग्राम तेलीपुरा व जलालपुर के जंगल में कांबिंग करती हथिनी व साथ में वन विभाग की टीम व ग्
नगीना (बिजनौर)। क्षेत्र के ग्राम तेलीपुरा में गुलदार के हमले में एक युवक की मौत के 96 घंटे बीत जाने के बाद भी हमलावर गुलदार को पकड़ने के लिए मैदान में उतरी वन विभाग की पूरी फौज खाली हाथ है। दुधवा राष्ट्रीय पार्क से आई दो हथिनी को मैदान में उतार देने के बाद भी गुलदार पकड़ा जाना तो दूर अभी तक चिह्नित भी नहीं हो पाया है। जबकि दोनों हथिनी दो दिनों में जंगल की 15 किलोमीटर की खाक छान चुकी हैं।
बृहस्पतिवार की शाम जलालपुर के जंगल में गए 20 वर्षीय संदीप की गुलदार के हमले में मौत के बाद ग्रामीणों व किसान यूनियन के आक्रोश के बाद वन विभाग के आला अधिकारियों ने प्रदेश स्तरीय अधिकारियों के साथ-साथ विशेषज्ञों की टीम को गुलदार को पकड़ने के लिए मैदान में उतार दिया था। हद तो तब हो गई जब विभाग ने लखीमपुर खीरी से दो हथिनी भी कांबिंग के लिए नगीना के ग्राम तेलीपुरा के जंगल में कांबिंग के लिए भेज दी और वह दो दिन काबिंग करने के बाद भी कोई रिजल्ट नहीं दे सकी।
हथिनी के सर्च ऑपरेशन के दौरान यदि गुलदार दिखाई दिया तो उसका क्या होगा इस बारे में भी अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं हैं। कहने को तो दावा किया गया था कि सर्च ऑपरेशन के दौरान हथिनी के साथ विशेषज्ञ टीम व चिकित्सक साथ रहेंगे लेकिन जमीनी हकीकत में हथिनी के ऊपर महावत, चारा कटर के अलावा सिर्फ वनरक्षक ही बैठे हुए दिखाई दिए।
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नगीना वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि हथिनी 2 दिनों में 15 किलोमीटर तेलीपुरा व जलालपुर के जंगल में घूमकर कांबिंग का काम कर चुकी है। उन्होंने बताया कि दोनों हथिनी के साथ गोरखपुर से आए चिकित्सक रवि यादव भी साथ चल रहे हैं। उनका कहना है कि अभी गुलदार को चिह्नित नहीं किया जा सका है। एक दिन में दोनों हथिनी के खानपान पर विभाग का करीब दो हज़ार रुपये का खर्च आ रहा है। उनका कहना है कि हथिनी पर बैठकर चलने वाले वनरक्षक के पास शस्त्र के तौर पर राइफल है, जबकि चिकित्सक के पास गुलदार को बेहोश करने वाली बंदूक है।
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बृहस्पतिवार की शाम जलालपुर के जंगल में गए 20 वर्षीय संदीप की गुलदार के हमले में मौत के बाद ग्रामीणों व किसान यूनियन के आक्रोश के बाद वन विभाग के आला अधिकारियों ने प्रदेश स्तरीय अधिकारियों के साथ-साथ विशेषज्ञों की टीम को गुलदार को पकड़ने के लिए मैदान में उतार दिया था। हद तो तब हो गई जब विभाग ने लखीमपुर खीरी से दो हथिनी भी कांबिंग के लिए नगीना के ग्राम तेलीपुरा के जंगल में कांबिंग के लिए भेज दी और वह दो दिन काबिंग करने के बाद भी कोई रिजल्ट नहीं दे सकी।
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हथिनी के सर्च ऑपरेशन के दौरान यदि गुलदार दिखाई दिया तो उसका क्या होगा इस बारे में भी अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं हैं। कहने को तो दावा किया गया था कि सर्च ऑपरेशन के दौरान हथिनी के साथ विशेषज्ञ टीम व चिकित्सक साथ रहेंगे लेकिन जमीनी हकीकत में हथिनी के ऊपर महावत, चारा कटर के अलावा सिर्फ वनरक्षक ही बैठे हुए दिखाई दिए।
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नगीना वन क्षेत्राधिकारी प्रदीप शर्मा ने बताया कि हथिनी 2 दिनों में 15 किलोमीटर तेलीपुरा व जलालपुर के जंगल में घूमकर कांबिंग का काम कर चुकी है। उन्होंने बताया कि दोनों हथिनी के साथ गोरखपुर से आए चिकित्सक रवि यादव भी साथ चल रहे हैं। उनका कहना है कि अभी गुलदार को चिह्नित नहीं किया जा सका है। एक दिन में दोनों हथिनी के खानपान पर विभाग का करीब दो हज़ार रुपये का खर्च आ रहा है। उनका कहना है कि हथिनी पर बैठकर चलने वाले वनरक्षक के पास शस्त्र के तौर पर राइफल है, जबकि चिकित्सक के पास गुलदार को बेहोश करने वाली बंदूक है।