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विद्युत निगम की कर्जदार बनीं ग्राम पंचायतें

Wed, 10 Feb 2021 12:41 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 12:41 AM IST
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Gram Panchayats became debtors of Electricity Corporation
विद्युत निगम की कर्जदार बनीं ग्राम पंचायतें
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चांदपुर। विद्युत वितरण खंड चांदपुर का सरकारी विभागों पर करीब सात करोड़ रुपया बकाया है। कुल बकाया में से करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये का बकाया ग्रामीण पेयजल योजना समिति पर है। इसके बाद दूसरा नंबर प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों का आता है। इन पर भी एक करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। पेयजल योजना और प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विद्युत कनेक्शनों का बिल ग्राम पंचायतों को जमा करना था, लेकिन पंचायतों ने ढाई साल से बिल जमा नहीं किया है।
विद्युत वितरण खंड चांदपुर के अधिशासी अभियंता अजय कुमार यादव ने बताया कि विद्युत निगम का सरकारी विभागों पर विद्युत बिलों का सात करोड़ रुपया बकाया है। इसमें से सबसे ज्यादा बकाया ग्रामीण पेयजल योजना समिति पर करीब साढे़ पांच करोड़ रुपया बकाया है। करीब 12 गांव ऐसे हैं, जिनमें पेयजल आपूर्ति के लिए लगे विद्युत कनेक्शनों पर बिल बकाया है। बीडीओ दिनेश शर्मा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति के लिए बनी टंकियों को ग्राम पंचायत के सुपुर्द कर दिया गया है। उसके रख रखाव, प्रबंधन, विद्युत बिल जमा करने आदि की व्यवस्था ग्राम पंचायत की है। ग्राम पंचायत जलकर वसूलकर उसे जमा करें, उन्हीं की जिम्मेदारी है।
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विद्युत बिल बकाया में दूसरे स्थान पर बेसिक शिक्षा विभाग आता है। क्षेत्र के 234 प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विद्युत कनेक्शन हैं। प्राथमिक शिक्षा विभाग पर सवा करोड़ से भी अधिक का बकाया है। खंड शिक्षा अधिकारी विश्वास कुमार का कहना है कि अप्रैल 2019 से प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विद्युत कनेक्शन का बिल ग्राम पंचायत को जमा करना था, उससे पहले का बिल शिक्षा विभाग की ओर से जमा किया जाता था। शिक्षा विभाग की ओर जो विद्युत निगम का बिल बकाया निकलता है, उसके लिए शासन से मांग कर रखी है। अधिशासी अभियंता अजय कुमार यादव ने बताया कि वित्त मंत्रालय से आदेश जारी हुआ था कि मार्च 2018 तक का बिल शासन से जमा होगा। अप्रैल 2018 से बाद का बिल ग्राम पंचायत के फंड से जमा होना है। जबकि प्रधान कहते हैं कि उनके पास बिल जमा करने का कोई फंड ही नहीं आता है। इस बारे में जिलाधिकारी की बैठक में भी रखा गया है।
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