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Bijnor News: शासन ने अस्पताल से मांगी वेंटिलेटर और स्टॉफ की सूचना
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-मेडिकल अस्पताल में रखे हुए हैं 17 वेंटिलेटर, लेकिन चला नहीं रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शासन ने मेडिकल अस्पताल में रखे वेंटिलेटर और स्टॉफ की सूचना अधिकारियों से मांगी। जिसके बाद अधिकरियों ने संबंधित जानकारी शासन को भेज दी है। अब अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने वाला स्टाफ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मेडिकल अस्पताल में 17 वेंटिलेटर रखे हुए हैं। सभी सही हालत में हैं। मगर संचालित नहीं किए जा रहे हैं। जिसके चलते गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर चिकित्सक मेेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर रहे हैं। यह बात एक दिन की नहीं, बल्कि रोजाना की है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। बिजनौर से मरेठ तक दूरी करीब 80 किलोमीटर है। इसी बीच मरीज की सांसे अटकीं रहती हैं। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर के स्थान पर कंसंट्रेटर का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मरीजों को ऑक्सजीन उपलब्ध होती है।
वेंटिलेटर नहीं चलने की समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद शासन ने संज्ञान लेते हुए मेडिकल अस्पताल प्रशासन से वेंटिलेटर और स्टॉफ की जानकारी मांगी। जिसके बाद मेडिकल अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सभी वेंटिलेटर चालू हालत में हैं। साथ ही सायरिक्स कंपनी वेंटिलेेटर के मेंटीनेंस का काम करती है। चार टेक्नीशियन कोविड में आउटसोर्सिंग से रखे हुए हैं। वहीं एनेस्थेटिक भी आ गए हैं। मगर स्टॉफ नर्स की कमी है।
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स्टॉफ नर्स की मांग के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। स्टॉफ नर्स सहित अन्य स्टॉफ आते ही सभी वेंटिलेटर संचालित कर दिए जाएंगे। इसका यहां आने वाले मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
-- -- डॉ.मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। शासन ने मेडिकल अस्पताल में रखे वेंटिलेटर और स्टॉफ की सूचना अधिकारियों से मांगी। जिसके बाद अधिकरियों ने संबंधित जानकारी शासन को भेज दी है। अब अस्पताल में वेंटिलेटर चलाने वाला स्टाफ मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
मेडिकल अस्पताल में 17 वेंटिलेटर रखे हुए हैं। सभी सही हालत में हैं। मगर संचालित नहीं किए जा रहे हैं। जिसके चलते गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर की जरूरत पड़ने पर चिकित्सक मेेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर रहे हैं। यह बात एक दिन की नहीं, बल्कि रोजाना की है। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। बिजनौर से मरेठ तक दूरी करीब 80 किलोमीटर है। इसी बीच मरीज की सांसे अटकीं रहती हैं। अधिकारियों का कहना है कि वेंटिलेटर के स्थान पर कंसंट्रेटर का प्रयोग किया जा रहा है। जिससे मरीजों को ऑक्सजीन उपलब्ध होती है।
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वेंटिलेटर नहीं चलने की समस्या को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया। जिसके बाद शासन ने संज्ञान लेते हुए मेडिकल अस्पताल प्रशासन से वेंटिलेटर और स्टॉफ की जानकारी मांगी। जिसके बाद मेडिकल अस्पताल प्रशासन ने बताया कि सभी वेंटिलेटर चालू हालत में हैं। साथ ही सायरिक्स कंपनी वेंटिलेेटर के मेंटीनेंस का काम करती है। चार टेक्नीशियन कोविड में आउटसोर्सिंग से रखे हुए हैं। वहीं एनेस्थेटिक भी आ गए हैं। मगर स्टॉफ नर्स की कमी है।
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स्टॉफ नर्स की मांग के लिए शासन को पत्र भेजा जा चुका है। स्टॉफ नर्स सहित अन्य स्टॉफ आते ही सभी वेंटिलेटर संचालित कर दिए जाएंगे। इसका यहां आने वाले मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।