{"_id":"608314b98ebc3eb9222cbbc4","slug":"giloy-is-the-perfect-medicine-to-bring-down-fever-bijnor-news-mrt5357590125","type":"story","status":"publish","title_hn":"बुखार उतारने के लिए रामबाण है गिलोय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बुखार उतारने के लिए रामबाण है गिलोय
विज्ञापन
गिलोय।
- फोटो : ??????
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुखार उतारने के लिए रामबाण है गिलोय
बिजनौर। बुखार उतारने और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय का सेवन करें। चिकित्सकों के अनुसार 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर, मिट्टी के बर्तन में रख लें और इसे 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर रातभर ढककर रख लें। सुबह होने पर इसे मसल-छानकर प्रयोग करें। इसे 20 मिली की मात्रा में दिन में तीन बार पीने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है।
वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी से पार पाने के लिए हर कोई प्रयास कर रहा है। ऐसे में देसी नुस्खे भी काफी कारगर हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. इसम पाल सिंह के अनुसार 20 एमएल गिलोय के रस में एक ग्राम पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, तिल्ली बढ़ना, खांसी, अरुचि आदि रोग ठीक हो जाते हैं। बेल, अरणी, गंभारी, श्योनाक (सोनापाठा) तथा पाढ़ल की जड़ की छाल लें। इसके साथ ही गिलोय, आंवला, धनिया लें। इन सभी की बराबर-बराबर लेकर इनका काढ़ा बना लें और 20-30 मिली काढ़ा को दिन में दो बार सेवन करने से वातज विकार के कारण होने वाला बुखार ठीक होता है।
उन्होंने बताया कि मुनक्का, गिलोय, गंभारी, त्रायमाण तथा सारिवा से बना काढ़ा (20-30 मिली) में गुड़ मिला लें। इसे पीने अथवा बराबर-बराबर भाग में गुडूची तथा शतावरी के रस (10-20 मिली) में गुड़ मिलाकर पीने से वात विकार के कारण होने वाला बुखार उतर जाता है। इसके अलावा 20-30 मिली गुडूची के काढ़ा में पिप्पली चूर्ण मिला लें। छोटी कटेरी, सोंठ तथा गुडूची के काढ़ा (20-30 मिली) में पिप्पली चूर्ण मिलाकर पीने से वात और कफ विकार के कारण होने वाला बुखार, सांस के उखड़ने की परेशानी, सूखी खांसी तथा दर्द की परेशानी ठीक होती है। सुबह के समय 20-40 मिली गुडूची के चटनी में मिश्री मिलाकर पीने से पित्त विकार के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।
विज्ञापन
यह भी है कारगर
योगाचार्य ओमप्रकाश राणा ने बताया कि बराबर मात्रा में गुडूची, नीम, आंवला से बने 25-50 मिली काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार की गंभीर स्थिति में भी लाभ होता है। इसके अलावा 100 ग्राम गुडूची के चूर्ण को कपड़े से छान लें। इसमें 16-16 ग्राम गुड़, मधु तथा गाय का घी मिला लें। इसका लड्डू बनाकर पाचन क्षमता के अनुसार रोज खाएं। इससे पुराना बुखार, गठिया, आंखों की बीमारी आदि रोगों में फायदा होता है। इससे याददाश्त भी बढ़ती है और गिलोय के रस तथा पेस्ट से घी को पकाएं। इसका सेवन करने से पुराना बुखार ठीक होता है। गुडूची काढ़ा में पिप्पली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बुखार की गंभीर स्थिति में लाभ होता है।
विज्ञापन
बिजनौर। बुखार उतारने और अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गिलोय का सेवन करें। चिकित्सकों के अनुसार 40 ग्राम गिलोय को अच्छी तरह मसलकर, मिट्टी के बर्तन में रख लें और इसे 250 मिलीलीटर पानी मिलाकर रातभर ढककर रख लें। सुबह होने पर इसे मसल-छानकर प्रयोग करें। इसे 20 मिली की मात्रा में दिन में तीन बार पीने से पुराना बुखार ठीक हो जाता है।
वर्तमान में चल रही कोरोना महामारी से पार पाने के लिए हर कोई प्रयास कर रहा है। ऐसे में देसी नुस्खे भी काफी कारगर हैं। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. इसम पाल सिंह के अनुसार 20 एमएल गिलोय के रस में एक ग्राम पिप्पली तथा एक चम्मच मधु मिला लें। इसे सुबह और शाम सेवन करने से पुराना बुखार, कफ, तिल्ली बढ़ना, खांसी, अरुचि आदि रोग ठीक हो जाते हैं। बेल, अरणी, गंभारी, श्योनाक (सोनापाठा) तथा पाढ़ल की जड़ की छाल लें। इसके साथ ही गिलोय, आंवला, धनिया लें। इन सभी की बराबर-बराबर लेकर इनका काढ़ा बना लें और 20-30 मिली काढ़ा को दिन में दो बार सेवन करने से वातज विकार के कारण होने वाला बुखार ठीक होता है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि मुनक्का, गिलोय, गंभारी, त्रायमाण तथा सारिवा से बना काढ़ा (20-30 मिली) में गुड़ मिला लें। इसे पीने अथवा बराबर-बराबर भाग में गुडूची तथा शतावरी के रस (10-20 मिली) में गुड़ मिलाकर पीने से वात विकार के कारण होने वाला बुखार उतर जाता है। इसके अलावा 20-30 मिली गुडूची के काढ़ा में पिप्पली चूर्ण मिला लें। छोटी कटेरी, सोंठ तथा गुडूची के काढ़ा (20-30 मिली) में पिप्पली चूर्ण मिलाकर पीने से वात और कफ विकार के कारण होने वाला बुखार, सांस के उखड़ने की परेशानी, सूखी खांसी तथा दर्द की परेशानी ठीक होती है। सुबह के समय 20-40 मिली गुडूची के चटनी में मिश्री मिलाकर पीने से पित्त विकार के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।
विज्ञापन
यह भी है कारगर
योगाचार्य ओमप्रकाश राणा ने बताया कि बराबर मात्रा में गुडूची, नीम, आंवला से बने 25-50 मिली काढ़ा में मधु मिलाकर पीने से बुखार की गंभीर स्थिति में भी लाभ होता है। इसके अलावा 100 ग्राम गुडूची के चूर्ण को कपड़े से छान लें। इसमें 16-16 ग्राम गुड़, मधु तथा गाय का घी मिला लें। इसका लड्डू बनाकर पाचन क्षमता के अनुसार रोज खाएं। इससे पुराना बुखार, गठिया, आंखों की बीमारी आदि रोगों में फायदा होता है। इससे याददाश्त भी बढ़ती है और गिलोय के रस तथा पेस्ट से घी को पकाएं। इसका सेवन करने से पुराना बुखार ठीक होता है। गुडूची काढ़ा में पिप्पली चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बुखार की गंभीर स्थिति में लाभ होता है।