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Bijnor News: कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों की जीपीएस से होगी निगरानी
Fri, 07 Jul 2023 11:16 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 07 Jul 2023 11:16 PM IST
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- कूड़ा उठाने के साथ साथ सफाई कर्मी घर के बाहर लगे बार कोड को भी करेगा स्कैन
- गली में कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी पहुंची या नहीं, कंट्रोल रूम में तुरंत लगेगा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की निगरानी के लिए अब तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। जी हां, कूड़ा गाड़ियों को जीपीएस से लैस किया जाएगा। गाड़ी किस गली में पहुंची या नहीं, इसकी जानकारी कंट्रोल में सीधे मिलेगी। उधर, कूड़ा उठाने के साथ साथ कर्मचारी घर के बाहर लगे बार कोड को स्कैन करेंगे, जिसे यह साफ हो जाएगा कि उस घर से कूड़ा उठा लिया गया है।
हाल ही में नगर पालिका बिजनौर के 25 हजार घरों का सर्वे किया गया है। यह कवायद डोर डू डोर कूड़ा कलेक्शन को और भी अधिक प्रभावी बनाने के लिए की गई। इसके साथ साथ पालिका में कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी चल रही है। इस कंट्रोल रूम में स्क्रीन पर यह पता लगा जाया करेगा कि कूड़ा उठाने की कौन सी गाड़ी किस जगह पर है। यह निगरानी गाड़ी में लगे जीपीएस से होगी। इसके लिए बाकायदा गाड़ियों का रूट भी तय किया जा रहा है। किस गाड़ी को किस गली या मोहल्ले में जाना है, यह भी तय होगा।
तय मार्ग से अलग जाने पर सुनाई देगी बीप की आवाज
तय मार्ग से अलग जाने या कूड़ा निस्तारण केंद्र तक नहीं पहुंचने पर पालिका के कंट्रोल रूम में तुरंत ही अलर्ट मैसेज आएगा और बीप की आवाज सुनाई देगी। जिस पर कंट्रोल में बैठे कर्मचारी उस गाड़ी के चालक को भी अलर्ट करेंगे। बता दें कि अभी तक यह शिकायत मिलती रही है कि उनकी गली में कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी नहीं पहुंची या फिर कूड़ा निस्तारण के बजाए कहीं और कूड़ा फेंक दिया गया।
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बार कोड स्कैन करना होगा जरूरी
सभी घरों के बाहर बार कोड लगा दिए गए हैं। उधर, जीपीएस लगी गाड़ियों के साथ जो कूड़ा उठाने वाले कर्मी रहेंगे, उनके पास एक स्कैनर मशीन होगी। जो घर के बाहर लगे बार कोड को स्कैन करेंगे। यह इस बात का सबूत होगा कि इस घर से कूड़ा उठा लिया गया है।
बेचा जाने लगा आडीएफ
बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर समेत जिले की चार पालिकाओं ने आरडीएफ बेचने के लिए कंपनियों से अनुबंध किया है। कूड़ा निस्तारण केंद्र से निकलने वाला आरडीएफ बेचा भी जाने लगा है। बृहस्पतिवार को आरडीएफ की पहली गाड़ी बिजनौर से मेरठ के लिए भेजी गई थी। यानि वैज्ञानिक विधि से कूड़े का निस्तारण होने लगा है।
वर्जन::
कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगाकर निगरानी की जाएगी। गाड़ी गली या मोहल्ले से गुजरने की जानकारी कंट्रोल में सीधे मिलेगी। इससे यह पता लग जाएगा कि गाड़ी कूड़ा उठाने पहुंची है या नहीं। कूड़ा उठाने के साथ साथ घरों के बार लगे बार कोड को भी स्कैन किया जाएगा - विकास कुमार, ईओ पालिका बिजनौर
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- गली में कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी पहुंची या नहीं, कंट्रोल रूम में तुरंत लगेगा पता
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की निगरानी के लिए अब तकनीक का भी उपयोग किया जाएगा। जी हां, कूड़ा गाड़ियों को जीपीएस से लैस किया जाएगा। गाड़ी किस गली में पहुंची या नहीं, इसकी जानकारी कंट्रोल में सीधे मिलेगी। उधर, कूड़ा उठाने के साथ साथ कर्मचारी घर के बाहर लगे बार कोड को स्कैन करेंगे, जिसे यह साफ हो जाएगा कि उस घर से कूड़ा उठा लिया गया है।
हाल ही में नगर पालिका बिजनौर के 25 हजार घरों का सर्वे किया गया है। यह कवायद डोर डू डोर कूड़ा कलेक्शन को और भी अधिक प्रभावी बनाने के लिए की गई। इसके साथ साथ पालिका में कंट्रोल रूम बनाने की तैयारी चल रही है। इस कंट्रोल रूम में स्क्रीन पर यह पता लगा जाया करेगा कि कूड़ा उठाने की कौन सी गाड़ी किस जगह पर है। यह निगरानी गाड़ी में लगे जीपीएस से होगी। इसके लिए बाकायदा गाड़ियों का रूट भी तय किया जा रहा है। किस गाड़ी को किस गली या मोहल्ले में जाना है, यह भी तय होगा।
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तय मार्ग से अलग जाने पर सुनाई देगी बीप की आवाज
तय मार्ग से अलग जाने या कूड़ा निस्तारण केंद्र तक नहीं पहुंचने पर पालिका के कंट्रोल रूम में तुरंत ही अलर्ट मैसेज आएगा और बीप की आवाज सुनाई देगी। जिस पर कंट्रोल में बैठे कर्मचारी उस गाड़ी के चालक को भी अलर्ट करेंगे। बता दें कि अभी तक यह शिकायत मिलती रही है कि उनकी गली में कूड़ा उठाने के लिए गाड़ी नहीं पहुंची या फिर कूड़ा निस्तारण के बजाए कहीं और कूड़ा फेंक दिया गया।
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बार कोड स्कैन करना होगा जरूरी
सभी घरों के बाहर बार कोड लगा दिए गए हैं। उधर, जीपीएस लगी गाड़ियों के साथ जो कूड़ा उठाने वाले कर्मी रहेंगे, उनके पास एक स्कैनर मशीन होगी। जो घर के बाहर लगे बार कोड को स्कैन करेंगे। यह इस बात का सबूत होगा कि इस घर से कूड़ा उठा लिया गया है।
बेचा जाने लगा आडीएफ
बिजनौर, चांदपुर और नूरपुर समेत जिले की चार पालिकाओं ने आरडीएफ बेचने के लिए कंपनियों से अनुबंध किया है। कूड़ा निस्तारण केंद्र से निकलने वाला आरडीएफ बेचा भी जाने लगा है। बृहस्पतिवार को आरडीएफ की पहली गाड़ी बिजनौर से मेरठ के लिए भेजी गई थी। यानि वैज्ञानिक विधि से कूड़े का निस्तारण होने लगा है।
वर्जन::
कूड़ा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस लगाकर निगरानी की जाएगी। गाड़ी गली या मोहल्ले से गुजरने की जानकारी कंट्रोल में सीधे मिलेगी। इससे यह पता लग जाएगा कि गाड़ी कूड़ा उठाने पहुंची है या नहीं। कूड़ा उठाने के साथ साथ घरों के बार लगे बार कोड को भी स्कैन किया जाएगा - विकास कुमार, ईओ पालिका बिजनौर