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गंगा की भूमि पर माफिया काबिज
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 17 Feb 2017 11:33 PM IST
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मंडावर के खादर क्षेत्र में वन विभाग की जमीन पर पलेज लगाते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में बालावाली से लेकर रावली तक वन विभाग की हजारों बीघा जमीन पर भूमाफिया फिर से काबिज हो गए हैं। गंगा की रेती में पलेज लगाकर फिर धारा में केमिकल का जहर घोलने की तैयारी हो गई है। पलेज लगाने का काम खादर में युद्धस्तर पर चल रहा है। विभागीय अधिकारियों ने अभी तक इसकी सुध नहीं ली है। बरसात में मैदान में गंगा की धारा सिकुड़ती चली जाती है। गंगा की धारा सिकुड़ने के साथ ही हजारों बीघा जमीन खाली हो जाती है। इस जमीन में भूमाफिया और किसान पलेज लगाते हैं। खीरा, ककड़ी, तरबूज, खरबूजा आदि की खेती इस पलेज में की जाती है। इस साल भी पलेज लगाने की तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। भूमाफिया ने इस क्षेत्र में बीज बोने के लिए तीन से चार फीट के गड्ढे खोदकर उसमें अनेक रसायनिक खाद डालना शुरू कर दिया है। फसलों पर भी खतरनाक केमिकल वाली पेस्टीसाइट छिड़की जाती हैं। पलेज में इस्तेमाल होने वाली पेस्टीसाइट और रसायनिक खाद गंगा के पानी में मिल जाती है। इससे गंगा का पानी प्रदूषित होता है और जलीय जीवों के जीवन पर भी खतरा पैदा हो जाता है। पिछले साल प्रशासनिक टीम ने अभियान चलाकर ये पलेज नष्ट करा दी थी और पलेजों की रखवाली के लिए लगाई गईं बाढ़ भी जला दी थी। कुछ लोगों पर जुर्माना भी लगाया गया था। लेकिन इस साल अभी तक ऐसा कुछ नजर नहीं आया है। रावली क्षेत्र से बालावाली तक हजारों बीघा जमीन में पलेज लगभग लग चुकी हैं।
डीएफओ ने कहा- रेंजर से मांगा जा रहा स्पष्टीकरण
पलेज में बरसात की शुरूआत तक खेती होती है। यह खेती करीब छह महीने की होती है। हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। जिले भर से लोग यहां आकर खेती करते हैं। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक मामला उनके संज्ञान में है। जहां खेती हो रही है, उसमें कुछ जमीन एक किसान के नाम है। अवैध तरीके से गंगा में खेती करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। इस मामले में रेंजर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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डीएफओ ने कहा- रेंजर से मांगा जा रहा स्पष्टीकरण
पलेज में बरसात की शुरूआत तक खेती होती है। यह खेती करीब छह महीने की होती है। हर साल यही कहानी दोहराई जाती है। जिले भर से लोग यहां आकर खेती करते हैं। डीएफओ डा.एम सेम्मारन के मुताबिक मामला उनके संज्ञान में है। जहां खेती हो रही है, उसमें कुछ जमीन एक किसान के नाम है। अवैध तरीके से गंगा में खेती करने वालों को चिह्नित किया जा रहा है। इस मामले में रेंजर से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
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