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गृहिणी से लेकर बीटीसी पास तक युवतियां बनी नलकूप चालक
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बिजनौर। महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। सरकार भी महिला सशक्तिकरण पर जोर दे रही है। प्रदेश सरकार ने नलकूप विभाग में पहली बार महिलाओं की नलकूप चालकों के रूप में भर्ती कर इसे साबित कर दिया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के माध्यम से प्रदेश में 3209 आईटीआई पास नलकूप चालकों की भर्ती की गई है। इनमें 516 महिलाएं भी शामिल हैं। जनपद में कुल 38 नलकूप चालकों की भर्ती की गई है, इनमें दस महिलाएं भी शामिल हैं। जिले के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। अमर उजाला ने नव नियुक्त महिला नलकूप चालकों से बातचीत की।
किसानों की मददगार बनने को बनी नलकूप चालक
मूल रूप से प्रयागराज जनपद के गांव बरदाहा निवासी नव नियुक्त महिला नलकूप चालक सोनाली कुशवाहा ने बताया कि वह आईटीआई पास हैं और इस साल बीटीसी की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है। वह किसान की बेटी हैं और किसानों की विभिन्न समस्याओं को देखते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में आकर किसानों की मदद करने के लिए इस विभाग में आवेदन किया।
घर वालों ने हर तरह से किया सहयोग
कानपुर नगर की रहने वाली एकता गुप्ता के अनुसार उनके पिता शिवकृष्ण गुप्ता किसान हैं। नलकूप चालक की नौकरी मिलने पर वे बेहद ही खुश हैं। इससे पूर्व भी वह रेलवे, स्वास्थ्य आदि विभागों में विभिन्न पदों के लिए आवेदन कर चुकी हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इस नौकरी में आने के लिए घर वालों ने काफी सहयोग किया।
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होटल संचालक की बेटी बनी नलकूप चालक
कानपुर नगर निवासी ही महेश सैनी की पुत्र ज्योति सैनी की शैक्षिक योग्यता 12वीं और आईटीआई है। ज्योति ने बताया कि उनके पिता छोटा सा होटल चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि परिस्थितियां चाहें जो भी हों, वे हर हालत में अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन करेंगी।
बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से पाई नौकरी
काशी विश्वनाथ की नगरी की रहने वाली वाराणसी के मोहल्ला रामनगर निवासी सीमा पाल का कहना है कि जल्दी नौकरी लेने के लिए उन्होंने नलकूप चालक की नौकरी के लिए वर्ष 2016 में आवेदन किया था। बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें इस विभाग में नौकरी मिली। वर्तमान में उनकी ढाई साल की एक बच्ची है। वे पति सहित अब बिजनौर में ही आ गई हैं।
शादी से पहले किया था आवेदन, बाद में मिली नौकरी
बिजनौर चीनी मिल के पास स्थित सर्वोदय कालोनी निवासी ललिता बताती हैं कि उन्होंने समाजशास्त्र में एमए किया। उनके पिता ऋषिपाल सिंह राज मिस्त्री हैं और उनके पति शीतल कुमार एक निजी कंपनी में काम करते थे। कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में उनकी नौकरी छूट गई, लेकिन उन्होंने और उनके परिजनों ने धैर्य नहीं खोया। पिता और पति ने उन्हें नौकरी दिलाने के लिए बहुत सहयोग किया।
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किसानों की मददगार बनने को बनी नलकूप चालक
मूल रूप से प्रयागराज जनपद के गांव बरदाहा निवासी नव नियुक्त महिला नलकूप चालक सोनाली कुशवाहा ने बताया कि वह आईटीआई पास हैं और इस साल बीटीसी की पढ़ाई भी पूरी हो चुकी है। वह किसान की बेटी हैं और किसानों की विभिन्न समस्याओं को देखते हुए उन्होंने इस क्षेत्र में आकर किसानों की मदद करने के लिए इस विभाग में आवेदन किया।
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घर वालों ने हर तरह से किया सहयोग
कानपुर नगर की रहने वाली एकता गुप्ता के अनुसार उनके पिता शिवकृष्ण गुप्ता किसान हैं। नलकूप चालक की नौकरी मिलने पर वे बेहद ही खुश हैं। इससे पूर्व भी वह रेलवे, स्वास्थ्य आदि विभागों में विभिन्न पदों के लिए आवेदन कर चुकी हैं लेकिन सफलता नहीं मिल पाई। इस नौकरी में आने के लिए घर वालों ने काफी सहयोग किया।
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होटल संचालक की बेटी बनी नलकूप चालक
कानपुर नगर निवासी ही महेश सैनी की पुत्र ज्योति सैनी की शैक्षिक योग्यता 12वीं और आईटीआई है। ज्योति ने बताया कि उनके पिता छोटा सा होटल चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि परिस्थितियां चाहें जो भी हों, वे हर हालत में अपने दायित्वों का बखूबी निर्वहन करेंगी।
बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद से पाई नौकरी
काशी विश्वनाथ की नगरी की रहने वाली वाराणसी के मोहल्ला रामनगर निवासी सीमा पाल का कहना है कि जल्दी नौकरी लेने के लिए उन्होंने नलकूप चालक की नौकरी के लिए वर्ष 2016 में आवेदन किया था। बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें इस विभाग में नौकरी मिली। वर्तमान में उनकी ढाई साल की एक बच्ची है। वे पति सहित अब बिजनौर में ही आ गई हैं।
शादी से पहले किया था आवेदन, बाद में मिली नौकरी
बिजनौर चीनी मिल के पास स्थित सर्वोदय कालोनी निवासी ललिता बताती हैं कि उन्होंने समाजशास्त्र में एमए किया। उनके पिता ऋषिपाल सिंह राज मिस्त्री हैं और उनके पति शीतल कुमार एक निजी कंपनी में काम करते थे। कोरोना महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में उनकी नौकरी छूट गई, लेकिन उन्होंने और उनके परिजनों ने धैर्य नहीं खोया। पिता और पति ने उन्हें नौकरी दिलाने के लिए बहुत सहयोग किया।