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‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिंदी में है समाहित’

Sat, 11 Sep 2021 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 11 Sep 2021 11:27 PM IST
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'Freedom of expression is contained in Hindi'
डा.रजनी शर्मा। - फोटो : NAZIBABAD
‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिंदी में है समाहित’
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नजीबाबाद। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हिंदी में समाहित है। हिंदी एक भाषा है जो मन में छिपे उद्गार व्यक्त करने और दूसरों की बातों को समझने में अहम भूमिका अदा करती है। राष्ट्रपति से साहित्य के क्षेत्र में प्रशस्ति पत्र प्राप्त बचपन से हिंदी और संस्कृत में अभिरुचि रखने वाली शिक्षिका डा.रजनी शर्मा की ऐसी सोच है।
चांदपुर के बहमनशोरा में 1963 में जन्मी डा.रजनी शर्मा की रग रग में हिंदी और संस्कृत बसी है। बचपन से साहित्य रुचि रखने वाली रजनी शर्मा ने साहित्य विधा और काव्य सृजन के माध्यम से हिंदी को जीवन का लक्ष्य बनाया। उन्होंने हिंदी में साहित्यिक लेख लिखे और हिंदी के ही माध्यम से काव्य विधा को आगे बढ़ाया। डा.रजनी को कम उम्र में ही साहित्यिक और काव्य विधा से जुड़े मंच मिले, जिससे उनकी हिंदी के प्रति अभिरुचि लगातार बढ़ती गई। हिंदी अनुरागी डा.रजनी शर्मा ने हिंदी साहित्य से जुड़े लेख, मुक्तक, कहानियां लिखीं।
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वर्तमान में डा.रजनी शर्मा संस्कृत और हिंदी की शिक्षिका के रूप में आरआर मोरारका पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को हिंदी, संस्कृत की शिक्षा देकर दोनों भाषाओं को समृद्ध बनाने में प्रयासरत हैं। हिंदी में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में मौलिक लेख, काव्य सृजन से अपनी साहित्यिक पहचान बना चुकीं रजनी शर्मा को हरिद्वार में दीप शिखा साहित्य सम्मान सहित हिंदी साहित्य के क्षेत्र में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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हिंदी पुरोधा बाबा नागार्जुन, हजारी प्रसाद द्विवेदी, डा.रविंद्र सेठ, डा.ऋषभ देव शर्मा, डा.देवराज आर्य से साहित्यिक विधाओं में विचार-विमर्श कर हिंदी को व्यवहारिक रूप में स्वीकार करने वाली रजनी शर्मा ने सहस्त्र धारा काव्य संकलन का संपादन किया। माखनलाल चतुर्वेदी और सुब्रमण्यम भारती के काव्य का तुलनात्मक अध्ययन करने पर डा.रजनी को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा शुभकामनाओं स्वरूप प्रशस्ति पत्र दिया जा चुका है।

रजनी कहती हैं कि हिंदी की जननी संस्कृत है, संस्कृत की देवनागरी लिपि को ही हिंदी ने अपनाकर विश्व में अपना मस्तक ऊंचा किया है। राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय हिंदी सेमिनार और वेबिनार के माध्यम से समय-समय पर सशक्त अभिव्यक्ति देने वाली डा.रजनी शर्मा ने हिंदी पीएचडी की। इनका कहना है कि हिंदी जन-जन की भाषा है, नई शिक्षा नीति हिंदी के अस्तित्व को सुरक्षित कर उन्नत शिखर पर पहुंचाने में कारगर साबित होगी, बशर्ते हिंदवासी अंग्रेजी का मोह त्याग कर हिंदी को व्यवहारिक रूप में स्वीकार करें।
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