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Bijnor News: बिजनौर - सीवर लाइन में चार करोड़ का घोटाला, दर्ज होगी रिपोर्ट
Sat, 25 Mar 2023 12:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 25 Mar 2023 12:34 AM IST
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- विभाग की ओर से शहर कोतवाली में सौंपी गई तहरीर
- जल निगम के छह तत्कालीन अधिकारियों पर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप
- सीवर लाइन बिछाने के लिए शटरिंग (लकड़ी) की एवज में किया गया था भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। यूं तो बिजनौर शहर में सीवर लाइन बनाने का काम पूरा करीब छह साल पहले पूरा हो चुका है, लेकिन इसमें किए गए घोटाले का जिन्न अब बाहर आया है। इस परियोजना में चार करोड़ का घोटाला किया गया था, मामले में अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। मामले में शहर कोतवाली में तहरीर सौंपी जा चुकी है। हालांकि रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अभी अफसरों से राय मशविरा होना बाकी है।
12 साल पहले करीब 115 करोड़ रुपये की लागत से शहर में सीवर लाइन और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की परियोजना चालू हुई। करीब 70 करोड़ की लागत से सीवर लाइन बनी, बाकी बजट ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च हुआ। साल 2017 में यह परियोजना पूरी हो गई लेकिन अब इसमें घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है। करीब चार करोड़ का घोटाला किए जाने की बात सामने आई है।
दो साल पहले हुई थी जांच
साल 2021 में इस परियोजना पर पांच बैठी। जांच कमेटी ने अपनी जांच करते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। जिसमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता जेके गहलौत, तत्कालीन परियोजना अभियंता अमरकांत गुप्ता, परियोजना प्रबंधक अजय कुमार, संगणक एसके जैन, परियोजना अभियंता ब्रहमानंद, सहायक अभियंता अजीत सिंह को दोषी माना गया है। इनमें अधिक्षण अभियंता की मौत हो चुकी है और परियोजना अभियंता ब्रहमानंद को छोड़ बाकी सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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शटरिंग की आड़ में घोटाले के आरोप
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि शटरिंग में लगने वाली लकड़ी के नाम पर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। बता दें कि सीवर लाइन बिछाने के लिए गहरी खाई खोदी गई थी, जिसमें मिट्टी को गिरने से रोकने के लिए लकड़ी की शटरिंग लगाई गई। सीवर लाइन बिछने के बाद कुछ लकड़ी अंदर ही छोड़ दी गई। दो तरह की ओपर शटरिंग और क्लोज शटरिंग का इस्तेमाल हुआ था, क्लोज शटरिंग में मिट्टी की ढांग काे पूरी तरह से ढक दिया जाता था बल्कि ओपर शटरिंग दोनों ओर की क्लोज शटरिंग को सपोर्ट देने के लिए लगाई गई थी।
मूल्य तय करने वालों की जांच में फंसी गर्दन
सीवर लाइन में शटरिंग के मूल्य को तय करने वाले इंजीनियरों और अधिकारियों की इस जांच में गर्दन फंसी ही है। बता दें कि लकड़ी के मूल्य पर अंतिम मुहर जल निगम के अधीक्षण अभियंता ने लगाई थी, जिनकी मौत हो चुकी है। जिन पर आरोप हैं, उनमें चार सेवानिवृत्त हो चुके हैं, सिर्फ एक ही कर्मी अभी तक नौकरी में है।
फर्म को कर दिए थे सभी भुगतान
सीवर परियोजना को पूरा करने के बाद नगर पालिका को भी सौंप दिया गया था। निर्माण कंपनी को एक एक पाई का भुगतान किया जा चुका है। सिर्फ इतना ही नहीं निर्माण कंपनी की धरोहर राशि भी जारी कर दी गई थी।
पुलिस को सौंपी गई मामले की तहरीर
जल निगम के अधिशासी अभियंता सैय्यद तारिक अली की ओर से तहरीर सौंपी गई है। जिसमें तत्कालीन अधिसाशी अभियंता एवं परियोजना प्रबंधक अजय कुमार और संगणक एसके जैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही गई है।
वर्जन::
जल निगम की ओर से कुछ लोग जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आए थे, जोकि बाद में उच्च अफसरों के पास चले गए। मामले में अभी तक तहरीर नहीं मिली है।...नरेंद्र गौड़ शहर कोतवाल
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- जल निगम के छह तत्कालीन अधिकारियों पर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप
- सीवर लाइन बिछाने के लिए शटरिंग (लकड़ी) की एवज में किया गया था भुगतान
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। यूं तो बिजनौर शहर में सीवर लाइन बनाने का काम पूरा करीब छह साल पहले पूरा हो चुका है, लेकिन इसमें किए गए घोटाले का जिन्न अब बाहर आया है। इस परियोजना में चार करोड़ का घोटाला किया गया था, मामले में अब रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी चल रही है। मामले में शहर कोतवाली में तहरीर सौंपी जा चुकी है। हालांकि रिपोर्ट दर्ज करने के लिए अभी अफसरों से राय मशविरा होना बाकी है।
12 साल पहले करीब 115 करोड़ रुपये की लागत से शहर में सीवर लाइन और सीवर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की परियोजना चालू हुई। करीब 70 करोड़ की लागत से सीवर लाइन बनी, बाकी बजट ट्रीटमेंट प्लांट पर खर्च हुआ। साल 2017 में यह परियोजना पूरी हो गई लेकिन अब इसमें घोटाले का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है। करीब चार करोड़ का घोटाला किए जाने की बात सामने आई है।
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दो साल पहले हुई थी जांच
साल 2021 में इस परियोजना पर पांच बैठी। जांच कमेटी ने अपनी जांच करते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को दी। जिसमें तत्कालीन अधीक्षण अभियंता जेके गहलौत, तत्कालीन परियोजना अभियंता अमरकांत गुप्ता, परियोजना प्रबंधक अजय कुमार, संगणक एसके जैन, परियोजना अभियंता ब्रहमानंद, सहायक अभियंता अजीत सिंह को दोषी माना गया है। इनमें अधिक्षण अभियंता की मौत हो चुकी है और परियोजना अभियंता ब्रहमानंद को छोड़ बाकी सभी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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शटरिंग की आड़ में घोटाले के आरोप
जांच रिपोर्ट में कहा गया कि शटरिंग में लगने वाली लकड़ी के नाम पर ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। बता दें कि सीवर लाइन बिछाने के लिए गहरी खाई खोदी गई थी, जिसमें मिट्टी को गिरने से रोकने के लिए लकड़ी की शटरिंग लगाई गई। सीवर लाइन बिछने के बाद कुछ लकड़ी अंदर ही छोड़ दी गई। दो तरह की ओपर शटरिंग और क्लोज शटरिंग का इस्तेमाल हुआ था, क्लोज शटरिंग में मिट्टी की ढांग काे पूरी तरह से ढक दिया जाता था बल्कि ओपर शटरिंग दोनों ओर की क्लोज शटरिंग को सपोर्ट देने के लिए लगाई गई थी।
मूल्य तय करने वालों की जांच में फंसी गर्दन
सीवर लाइन में शटरिंग के मूल्य को तय करने वाले इंजीनियरों और अधिकारियों की इस जांच में गर्दन फंसी ही है। बता दें कि लकड़ी के मूल्य पर अंतिम मुहर जल निगम के अधीक्षण अभियंता ने लगाई थी, जिनकी मौत हो चुकी है। जिन पर आरोप हैं, उनमें चार सेवानिवृत्त हो चुके हैं, सिर्फ एक ही कर्मी अभी तक नौकरी में है।
फर्म को कर दिए थे सभी भुगतान
सीवर परियोजना को पूरा करने के बाद नगर पालिका को भी सौंप दिया गया था। निर्माण कंपनी को एक एक पाई का भुगतान किया जा चुका है। सिर्फ इतना ही नहीं निर्माण कंपनी की धरोहर राशि भी जारी कर दी गई थी।
पुलिस को सौंपी गई मामले की तहरीर
जल निगम के अधिशासी अभियंता सैय्यद तारिक अली की ओर से तहरीर सौंपी गई है। जिसमें तत्कालीन अधिसाशी अभियंता एवं परियोजना प्रबंधक अजय कुमार और संगणक एसके जैन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही गई है।
वर्जन::
जल निगम की ओर से कुछ लोग जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए आए थे, जोकि बाद में उच्च अफसरों के पास चले गए। मामले में अभी तक तहरीर नहीं मिली है।...नरेंद्र गौड़ शहर कोतवाल