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पूर्व प्रधान, सचिव से होगी वसूली
अमर उजाला/ब्यूरो
Updated Mon, 26 Sep 2016 12:32 AM IST
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बिजनौर जिले के नहटौर में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित पूर्व ग्राम प्रधान विकास कार्यों में बड़े गोलमाल में फंस गया है। जांच में गड़बड़ी पाए जाने के बाद डीएम की ओर से पूर्व प्रधान और सचिव से नौ लाख रुपये वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं।
सांसद के गोद लिए गांव बेगराजपुर में गंभीर वित्तीय अनियमित्ताआें की यह जांच एक साल से चल रही थी। बता दें कि ग्राम पंचायत बेगराजपुर निवासी देवदत्त शर्मा, राजेश चंद आदि ने करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान वीर सिंह एवं सचिव राकेश कुमार सैनी के खिलाफ विकास कार्याें में बड़े गोलमाल की शिकायत की थी। आरोप था कि गांव में तालाब के सौंदर्यीकरण और खड़ंजों के निर्माण में लाखों रुपये की हेराफरी की गई है। इस मामले में तत्कालीन जिला विकास अधिकारी एवं तकनीकी मूल्याकंन के लिए नानकचंद अवर अभियंता आरईएस बिजनौर ने मामले की जांच की।
जांच टीम ने पूर्व ग्राम प्रधान वीर सिंह और ग्राम सचिव राकेश सैनी के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की रिपोर्ट पेश की। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम जगतराज त्रिपाठी के निर्देश पर पंचायत राज विभाग ने वीर सिंह और राकेश सैनी से शासकीय धनराशि को क्षति पहुंचाने का जिम्मेदार मानते हुए दोनों से 9,05,500 रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं। यह राशि दोनों में बराबर बंटेगी। यह भी चेतावनी दी गई कि भुगतान न करने की हालत में भू-राजस्व से वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि वीर सिंह लगातार दो बार गांव के प्रधान चुने गए थे। वर्ष 2006-07 में ग्राम पंचायत की अच्छी देखरेख के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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सांसद के गोद लिए गांव बेगराजपुर में गंभीर वित्तीय अनियमित्ताआें की यह जांच एक साल से चल रही थी। बता दें कि ग्राम पंचायत बेगराजपुर निवासी देवदत्त शर्मा, राजेश चंद आदि ने करीब डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन ग्राम प्रधान वीर सिंह एवं सचिव राकेश कुमार सैनी के खिलाफ विकास कार्याें में बड़े गोलमाल की शिकायत की थी। आरोप था कि गांव में तालाब के सौंदर्यीकरण और खड़ंजों के निर्माण में लाखों रुपये की हेराफरी की गई है। इस मामले में तत्कालीन जिला विकास अधिकारी एवं तकनीकी मूल्याकंन के लिए नानकचंद अवर अभियंता आरईएस बिजनौर ने मामले की जांच की।
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जांच टीम ने पूर्व ग्राम प्रधान वीर सिंह और ग्राम सचिव राकेश सैनी के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या शासकीय धनराशि के दुरुपयोग की रिपोर्ट पेश की। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम जगतराज त्रिपाठी के निर्देश पर पंचायत राज विभाग ने वीर सिंह और राकेश सैनी से शासकीय धनराशि को क्षति पहुंचाने का जिम्मेदार मानते हुए दोनों से 9,05,500 रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं। यह राशि दोनों में बराबर बंटेगी। यह भी चेतावनी दी गई कि भुगतान न करने की हालत में भू-राजस्व से वसूलने की कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि वीर सिंह लगातार दो बार गांव के प्रधान चुने गए थे। वर्ष 2006-07 में ग्राम पंचायत की अच्छी देखरेख के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
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