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पूर्व मंत्री ने तीस बीघा जमीन पर कब्जा कर बना दिया था स्कूल, योगी सरकार ने की कड़ी कार्रवाई
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 03 Jul 2017 04:34 PM IST
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धामपुर में राज्य संपत्ति घोषित हुआ आरएन इंटरनेशनल स्कूल।
- फोटो : अमर उजाला
धामपुर (बिजनौर) में सडीएम वीके सिंह ने प्रदेश के पूर्व राज्यमंत्री मूलचंद चौहान द्वारा संचालित आरएन इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल की संपत्ति को राज्य सरकार में निहित कर दिया है। इस संबंध में हुपूई जांच में करीब तीस बीघा पट्टों की जमीन को गलत तरीके से पूर्व मंत्री द्वारा अपने और अपनी पुत्र वधू के नाम कराने की बात कही गई है। इसके बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की है। उधर पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान ने इसे राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई बताया है।
इस संबंध में गांव मोहड़ा के ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की थी कि पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान ने 26 पट्टेदारों की करीब तीस बीघा जमीन को धोखाधड़ी कर डीएम से अपने और अपनी पुत्रवधू सीमा राजपूत पत्नी अमित प्रताप सिंह के नाम करा लिया। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इस जमीन पर स्कूल का निर्माण किया गया।
केवल जमीन की कीमत ही करोड़ों रुपये में है। जबकि इस संबंध में नियम है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पट्टेदार की जमीन को दस साल से पहले और बिना डीएम की अनुमति अपने नाम नहीं करा सकता। जिलाधिकारी ने शिकायत की तहसील से जांच कराई। जांच में पाया गया कि इस मामले में प्रचलित जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम का उल्लंघन किया गया था और पूर्व मंत्री ने धोखाधड़ी कर जमीन को अपने नाम कराया था। एसडीएम धामपुर वीके सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में जिलाधिकारी ने इस प्रतिबंध के साथ पट्टों की भूमि को विक्रय करने की अनुमति दी थी कि यदि कोई भी प्रतिकूल तथ्य संज्ञान में आता है तो यह अनुमति स्वत: निरस्त समझी जाएगी।
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विक्रेता को पट्टेदारी से क्रय भूमि किसी अन्य को दस वर्ष से पहले विक्रय करने पर प्रतिबंध था, लेकिन उसने कूटरचना कर कलक्ट्रर से विक्रय की अनुमति प्राप्त की। ऐसे में अनुमति निरस्त हो जाती है और भूमि सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार निहित किए जाने योग्य है। एसडीएम ने कहा है कि सीमा राजपूत और मूलचंद चौहान अध्यक्ष नौबत सिंह एजूकेशनल ट्रस्ट अल्हैपुर क ा नाम भूमि से निरस्त किया जाता है और भूमि और संपत्ति को राज्य सरकार में निहित किया जाता है। उधर, इस संबंध में पूर्व राज्यमंत्री मूलचंद चौहान से पूछा गया तो उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ राजनीतिक दबाव के कारण किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों और प्रशासन की जांच रिपोर्ट को गलत करार दिया है।
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इस संबंध में गांव मोहड़ा के ग्रामीणों ने डीएम से शिकायत की थी कि पूर्व मंत्री मूलचंद चौहान ने 26 पट्टेदारों की करीब तीस बीघा जमीन को धोखाधड़ी कर डीएम से अपने और अपनी पुत्रवधू सीमा राजपूत पत्नी अमित प्रताप सिंह के नाम करा लिया। ग्रामीणों के मुताबिक, इसके लिए कूटरचित दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया और इस जमीन पर स्कूल का निर्माण किया गया।
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केवल जमीन की कीमत ही करोड़ों रुपये में है। जबकि इस संबंध में नियम है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी पट्टेदार की जमीन को दस साल से पहले और बिना डीएम की अनुमति अपने नाम नहीं करा सकता। जिलाधिकारी ने शिकायत की तहसील से जांच कराई। जांच में पाया गया कि इस मामले में प्रचलित जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम का उल्लंघन किया गया था और पूर्व मंत्री ने धोखाधड़ी कर जमीन को अपने नाम कराया था। एसडीएम धामपुर वीके सिंह ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में जिलाधिकारी ने इस प्रतिबंध के साथ पट्टों की भूमि को विक्रय करने की अनुमति दी थी कि यदि कोई भी प्रतिकूल तथ्य संज्ञान में आता है तो यह अनुमति स्वत: निरस्त समझी जाएगी।
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विक्रेता को पट्टेदारी से क्रय भूमि किसी अन्य को दस वर्ष से पहले विक्रय करने पर प्रतिबंध था, लेकिन उसने कूटरचना कर कलक्ट्रर से विक्रय की अनुमति प्राप्त की। ऐसे में अनुमति निरस्त हो जाती है और भूमि सभी भारों से मुक्त होकर राज्य सरकार निहित किए जाने योग्य है। एसडीएम ने कहा है कि सीमा राजपूत और मूलचंद चौहान अध्यक्ष नौबत सिंह एजूकेशनल ट्रस्ट अल्हैपुर क ा नाम भूमि से निरस्त किया जाता है और भूमि और संपत्ति को राज्य सरकार में निहित किया जाता है। उधर, इस संबंध में पूर्व राज्यमंत्री मूलचंद चौहान से पूछा गया तो उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब कुछ राजनीतिक दबाव के कारण किया जा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों के आरोपों और प्रशासन की जांच रिपोर्ट को गलत करार दिया है।