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जंगल और नदियों को वापस मिलेगी हजारों बीघा जमीन

Tue, 12 Apr 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 12 Apr 2022 12:15 AM IST
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Forests and rivers will get back thousands of bighas of land
जंगल और नदियों को वापस मिलेगी हजारों बीघा जमीन
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बिजनौर। जिस जमीन पर कभी जंगल, नदी और कच्चे रास्ते थे, वह अब फिर से मूूल रूप में लौट सकती है। जल्द ही इस पर कार्रवाई होने जा रही है। जांच के बाद शासन ने स्पष्ट तौर पर बिजनौर प्रशासन को निर्देश दिए हैं। दरअसल नगीना तहसील के 12 गांव में फैली 60 हजार बीघा जमीन का घोटाला हुआ। जांच में सामने आया है कि झाड़ीदार जंगल, नदी और रास्तों की जमीन की श्रेणी ही नहीं बदली गई थी बल्कि संक्रमणीय भूमिधर भी बना दिया गया। सिर्फ एक व्यक्ति के नाम की गई हजारों बीघा जमीन बाद में समितियों, ट्रस्ट और प्राइवेट लोगों की मिलकियत बन गई। प्रशासन ने भी शासन के आदेश के बाद इस मामले में कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।
पिछले दो सालों से नगीना तहसील के गांव तेलीपाड़ा, राजपुर कोट, शंकरपुर, हल्लोवाली आदि समेत 12 गांव की जमीन जांच के घेरे में फंसी हुई थी। शुरुआती शिकायत पर प्रशासन की कमेटी ने जांच की। बाद में शासन स्तर पर गठित हुई पांच सदस्यीय कमेटी ने जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रेषित की।
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साल 2021 के दिसंबर में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने जिलाधिकारी को पत्र जारी किया था, जिसमें इन गांव की जमीनों को राजकीय संपत्ति बताया गया। कहा गया कि गलत ढंग से खुर्द-बुर्द करके अन्य के नाम दर्ज कर दी गई जमीन के अभिलेख दुरुस्तीकरण करते हुए एक माह के भीतर शासन और राजस्व परिषद को उपलब्ध कराने की बात कही गई। इन आदेशों के आधार पर एडीएम प्रशासन विनय कुमार ने प्रभारी अधिकारी भूलेख को रिमाइंडर भी भेजा है। माना जा रहा है कि जल्द ही उक्त जमीन मूल रूप श्रेणी में दर्ज हो जाएंगी। उधर, जमीनों पर काबिज लोगों में हड़कंप मचा हुआ है।
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पहले दी काश्त की अनुमति फिर बदली श्रेणी
खतौनी फसली वर्ष 1359 में एक आदेश डाला गया, जिसमें लिखा गया बा हुक्म जंगलात आफिसर से एक रसूखदार व्यक्ति को काश्त करने की अनुमति दी जाती है। खतौनी फसली वर्ष 1360 में उस व्यक्ति का नाम दर्ज हुआ। फसली वर्ष 1362 में श्रेणी बदलकर एक करते हुए संक्रमणीय भूमिधर बना दिया गया। आदेश की तारीख साल 1952 लिखी गई थी, लेकिन शुरुआती जांच में भी आदेश की कोई कॉपी नहीं मिली। हुक्म देने वाले अफसर का नाम भी पता नहीं चला। शुरुआती जांच में ही इसे कूटरचित एंट्री माना गया।
हल्लोवाली में दिया हाकिम परगना साहब का हवाला
हल्लोवाली गांव में भी उसी व्यक्ति को जमीन दी गई। यहां हाकिम परगना साहब नगीना के आदेश का हवाला दिया गया। उस व्यक्ति को संक्रमणीय भूमिधर बनाया गया। बाद में समितियों और प्राइवेट लोगों को नाम खतौनी में दर्ज होते चले गए।

तीन गांव स्पष्ट, बाकी पर मांगी राय
शासन के जो आदेश मिले हैं, उसमें विषय के कॉलम में तेलीपाड़ा समेत कई गांव का जिक्र किया गया है, लेकिन बाद में मुर्तजाबाद, हल्लोवाली और शंकरपुर गांव की जमीनों का ही जिक्र है, जिस पर प्रशासन ने शासन से राय मांगी है। माना जा रहा है कि इन तीन गांव की जमीनों के अभिलेख पहले सुधारे जाएंगे, बाद में दूसरे गांव की जमीनों का नंबर लगना तय है।
वर्जन
शासन से जांच रिपोर्ट आ गई है। शासन से जमीन के रिकॉर्ड के दुरुस्तीकरण के निर्देश आए हैं। नगीना एसडीएम को मामला सौंपा गया है।
- विनय कुमार, एडीएम प्रशासन
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