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खाना खाकर बीमार हुए बीआईटी के छात्र
ब्यूरो/अमरउजाला, बिजनौर
Updated Thu, 20 Aug 2015 11:02 PM IST
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बिजनौर। भगवंत इंस्टीट्यूट ऑफ टैक्नोलाजी के छात्र कैंटीन का खाना खाने से बीमार हो गए। तबियत बिगड़ने पर 11 छात्रों को उपचार हेतु जिला अस्पताल लाया गया। उपचार के बाद आठ छात्रों को वापस संस्थान भेज दिया गया।
जिला मुजफ्फरनगर के गांव कासमपुर खोला स्थित बीआईटी के कुछ छात्र वही बने छात्रावास में रहते है। गुरुवार की दुपहर छात्रों ने कैंटीन में खाना खाया। इसके बाद कुछ छात्रों की तबियत बिगड़ गई। तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द की शिकायत हुई।
हालत बिगड़ती देख इंस्टीट्यूट की गाड़ी से ही छात्र इमरान, अंजलि, मोहित, जूही, अंजलि, अखलाक, आरिज, दीपक, आमोद कुमार, अवनीश कुमार, अमित को उपचार हेतु जिला अस्पताल लाया गया। छात्रों को प्राथमिक उपचार के बाद वापस भेज दिया है। इनमें से इमरान, अंजलि, आरिज की हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल में भर्ती किया।
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गैरप्रदेशों के रहने वाले हैं छात्र : ये सभी छात्र उत्तराखंड के कालागढ़, बिहार व झारखंड़ राज्यों के रहने वाले हैं। छात्रावास में रहकर ये छात्र बीफार्मा व पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्र कुछ भी बोलने को तैयार नहीं:
बीमार होकर अस्पताल पहुंचे छात्र कुछ बताने को तैयार नहीं थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि दुपहर कैंटीन में उन्होंने क्या खाया था।
इमरजेंसी में ड्यूटीरत डॉ. राजीव रस्तोगी का कहना है कि छात्रों में फूड प्वाइजनिंग जैसा कुछ नहीं लग रहा था। उन्हें तेज बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। तेज बुखार के कारण ही उन्हें उल्टियां हुई। प्रत्येक छात्र से हर साल कई हजार रुपये मेडिकल फीस ली जाती है।
छात्र मामूली रूप से बीमार थे। उन्हें संस्थान की डिस्पेंसरी से भी उपचारित किया जा सकता था। लेकिन वहां कोई व्यवस्था नहीं होगी। इस कारण ही उन्हें यहां लाया गया।
बीआईटी के डीन राघव मेहरा ने बताया कि क्षेत्र में वायरल चल रहा है। छात्र वायरल से पीड़ित है। उनका उपचार संस्थान के अस्पताल में चल रहा था। छात्रों के कहने पर उन्हीं उपचार हेतु कॉलेज की बस से जिला अस्पताल भिजवाया गया। छात्रों में फूड प्वाइजनिंग नहीं हुई है।
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जिला मुजफ्फरनगर के गांव कासमपुर खोला स्थित बीआईटी के कुछ छात्र वही बने छात्रावास में रहते है। गुरुवार की दुपहर छात्रों ने कैंटीन में खाना खाया। इसके बाद कुछ छात्रों की तबियत बिगड़ गई। तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द की शिकायत हुई।
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हालत बिगड़ती देख इंस्टीट्यूट की गाड़ी से ही छात्र इमरान, अंजलि, मोहित, जूही, अंजलि, अखलाक, आरिज, दीपक, आमोद कुमार, अवनीश कुमार, अमित को उपचार हेतु जिला अस्पताल लाया गया। छात्रों को प्राथमिक उपचार के बाद वापस भेज दिया है। इनमें से इमरान, अंजलि, आरिज की हालत गंभीर देखते हुए जिला अस्पताल में भर्ती किया।
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गैरप्रदेशों के रहने वाले हैं छात्र : ये सभी छात्र उत्तराखंड के कालागढ़, बिहार व झारखंड़ राज्यों के रहने वाले हैं। छात्रावास में रहकर ये छात्र बीफार्मा व पॉलीटेक्निक की पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्र कुछ भी बोलने को तैयार नहीं:
बीमार होकर अस्पताल पहुंचे छात्र कुछ बताने को तैयार नहीं थे। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि दुपहर कैंटीन में उन्होंने क्या खाया था।
इमरजेंसी में ड्यूटीरत डॉ. राजीव रस्तोगी का कहना है कि छात्रों में फूड प्वाइजनिंग जैसा कुछ नहीं लग रहा था। उन्हें तेज बुखार व पेट दर्द की शिकायत थी। तेज बुखार के कारण ही उन्हें उल्टियां हुई। प्रत्येक छात्र से हर साल कई हजार रुपये मेडिकल फीस ली जाती है।
छात्र मामूली रूप से बीमार थे। उन्हें संस्थान की डिस्पेंसरी से भी उपचारित किया जा सकता था। लेकिन वहां कोई व्यवस्था नहीं होगी। इस कारण ही उन्हें यहां लाया गया।
बीआईटी के डीन राघव मेहरा ने बताया कि क्षेत्र में वायरल चल रहा है। छात्र वायरल से पीड़ित है। उनका उपचार संस्थान के अस्पताल में चल रहा था। छात्रों के कहने पर उन्हीं उपचार हेतु कॉलेज की बस से जिला अस्पताल भिजवाया गया। छात्रों में फूड प्वाइजनिंग नहीं हुई है।