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गन्ने के खेत में अब खिल सकेंगे फूल
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 04 Mar 2017 11:55 PM IST
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बिजनौर में ग्राम अगरी के एक युवक ने गन्ने के ट्रैंच में फूलों की खेती करने की मुहिम शुरू की है। इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर गांव आया यह युवक अन्य किसानों को फूलों की खेती करने के लिए प्रेरित कर रहा है। डीसीओ ओपी सिंह ने गांव में जाकर खेती के लिए भूमि तैयार करने के टिप्स दिए। उन्होंने युवक के प्रयास को सराहा और विभाग की ओर से गन्ने के साथ फूल की खेती को मॉडल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, अगरी निवासी अखिलेश चौधरी मध्य प्रदेश में इंजीनियर था। वहां उसने कृषि विभाग के कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उसने फूलों की खेती से किसानों को होने वाली आय का अध्ययन किया और अपने गांव में इसे करने का बीड़ा उठाया। अखिलेश नौकरी छोड़कर गांव आ गया। उसने गरबेरा की खेती शुरू की। कम रकबे में अधिक उत्पादन लेने के लिए उसने ट्रैंच विधि से गन्ना बोने तथा ट्रैंच में फूलों की खेती करने का निर्णंय लिया। वह गन्ने के साथ ग्लैडियोलस की खेती करने की तैयारी में है।
अखिलेश ने अपने खेतों में ड्रिप विधि से सिंचाई करने का संयंत्र लगाया है। उसके मुताबिक, इससे 80 प्रतिशत पानी की बचत होगी। एक-एक बूंद पानी गन्ने की जड़ में जाएगा। गन्ना गिरेगा नहीं। पैदावार 100 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होगी। दो क्रेंच के बीच साढ़े चार फुट की दूरी होने से फूल की फसल को फलने-फूलने का स्थान मिलेगा। फूल की खेती से किसान को सालाना प्रति हेक्टेअर दो से तीन लाख की आमदनी हो सकती है। उसके मुताबिक, मुजफ्फरनगर, देहरादून व दिल्ली ग्लेडियोलस के अच्छे बाजार हैं।
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अखिलेश गांव के अन्य किसानों को गन्ने के ट्रैंच में फूलों की खेती करने को प्रेरित करने के लिए जनसंपर्क में लगा है। किसानों को इसके फायदे गिनाए जा रहे हैं। गन्ना विभाग फूलों की सहफसली खेती के लिए किसानों को भरपूर सहयोग की बात कह रहा है। इस दौरान एससीडीआई प्रेम सिंह, रामभद्र द्विवेदी, अविनाश तिवारी, गन्ना समिति सचिव ओमप्रकाश व लक्ष्मी प्रसाद यादव मौजूद
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डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार, अगरी निवासी अखिलेश चौधरी मध्य प्रदेश में इंजीनियर था। वहां उसने कृषि विभाग के कई कार्यक्रमों में भाग लिया। उसने फूलों की खेती से किसानों को होने वाली आय का अध्ययन किया और अपने गांव में इसे करने का बीड़ा उठाया। अखिलेश नौकरी छोड़कर गांव आ गया। उसने गरबेरा की खेती शुरू की। कम रकबे में अधिक उत्पादन लेने के लिए उसने ट्रैंच विधि से गन्ना बोने तथा ट्रैंच में फूलों की खेती करने का निर्णंय लिया। वह गन्ने के साथ ग्लैडियोलस की खेती करने की तैयारी में है।
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अखिलेश ने अपने खेतों में ड्रिप विधि से सिंचाई करने का संयंत्र लगाया है। उसके मुताबिक, इससे 80 प्रतिशत पानी की बचत होगी। एक-एक बूंद पानी गन्ने की जड़ में जाएगा। गन्ना गिरेगा नहीं। पैदावार 100 क्विंटल प्रति हेक्टेअर होगी। दो क्रेंच के बीच साढ़े चार फुट की दूरी होने से फूल की फसल को फलने-फूलने का स्थान मिलेगा। फूल की खेती से किसान को सालाना प्रति हेक्टेअर दो से तीन लाख की आमदनी हो सकती है। उसके मुताबिक, मुजफ्फरनगर, देहरादून व दिल्ली ग्लेडियोलस के अच्छे बाजार हैं।
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अखिलेश गांव के अन्य किसानों को गन्ने के ट्रैंच में फूलों की खेती करने को प्रेरित करने के लिए जनसंपर्क में लगा है। किसानों को इसके फायदे गिनाए जा रहे हैं। गन्ना विभाग फूलों की सहफसली खेती के लिए किसानों को भरपूर सहयोग की बात कह रहा है। इस दौरान एससीडीआई प्रेम सिंह, रामभद्र द्विवेदी, अविनाश तिवारी, गन्ना समिति सचिव ओमप्रकाश व लक्ष्मी प्रसाद यादव मौजूद