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जुर्माना तो लगेगा ही, योजनाओं का भी नहीं ले पाएंगे लाभ

Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 17 Oct 2019 11:39 PM IST
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जुर्माना तो लगेगा ही, योजनाओं का भी नहीं ले पाएंगे लाभ
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बिजनौर। पराली खेतों की मिट्टी को बहुत उपजाऊ बना सकती है। किसान गोशालाओं को भी पराली दे सकते हैं। पराली या अन्य फसलों के अवशेष जलाने से वायुमंडल में प्रदूषण फैलता है, इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है। लेकिन किसान पर्यावरण प्रदूषण की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं और फसल जलाकर खुद अपना भी नुकसान कर रहे हैं।
पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण मुद्दा बना हुआ है। वेस्ट यूपी में आजकल पराली जलाने से काफी प्रदूषण फैलता है। आसपास के जिलों में पराली जलाने से जिले में भी धुंध छाई रहती है। जिले के किसान भी जाने अनजाने में पराली या अन्य फसल अवशेष जलाकर देते हैं। पराली व अन्य फसल जलाने से रोकने के लिए हर गांव में टीम पहले ही मुस्तैद कर दी गई है। हर जिले में एसडीएम के नेतृत्व में लेखपालों की टीम किसानों पर नजर रख रही है। धान काटने में प्रयोग होने वाली कंबाइन हार्वेस्टिंग मशीन का रीपर के बिना प्रयोग प्रतिबंधित कर दिया गया है। अगर कहीं पराली या अन्य फसल अवशेष जलाते हुए किसी किसान को पकड़ा गया तो उस पर जुर्माना तो लगाया ही जाएगा, विभाग की योजनाओं से हमेशा के लिए अपात्र बना दिया जाएगा। किसानों को पराली जलाने से रोकने के बजाए दूसरे किसानों को देने या उसका खाद बनाने के लिए कहा जा रहा है। उपकृषि निदेशक जेपी चौधरी के अनुसार फसलों के अवशेष जलाने के बजाए खेत में गलाने चाहिए। ये खेतों की उपजाऊपन का आधार होते हैं।

53 हजार हेक्टेयर जमीन में है धान
जिले में करीब 53 हजार हेक्टेयर जमीन में धान बोया जाता है। आमतौर पर जिले के किसान पराल को पशुओं को चारे में खिलाते हैं, लेकिन कुछ जगहों पर व खादर क्षेत्र में पराल व फसलों के अन्य अवशेषों को जलाते हैं।
निकलती है विषैली गैस
उत्तराखंड विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की परियोजना में शोध में कार्यरत मयंक मलिक के अनुसार अगर खेत में एक टन पराल जलाई जाती है तो इससे दो किलो सल्फर डाईऑक्साइड, तीन किलो ठोस कण, 60 किलो कार्बन मोनो ऑक्साइड, 1460 किलो कार्बन डाईऑक्साइड और 199 किलो राख निकलती है।
खुद का भी है नुकसान
खेत में कोई भी फसल अवशेष जलाकर किसानों का भी नुकसान है। सबसे पहले खाद बनने वाले अवशेष खत्म होते हैं। खेत की ऊपरी बरत जलने से बंजर होती है। मिट्टी के मित्र कीट भी मर जाते हैं।
दम घोंट देती हैं जहरीली गैस
सल्फर डाईऑक्साइड व कार्बन मोनोऑक्साइड से फेफड़े खराब होते हैं। यह दम घोंटने वाली गैस है। कार्बन मोनो ऑक्साइड सांस के जरिये शरीर में जाकर खून के हिमोग्लोबिन को भी नष्ट कर देती है। पराली जलने से निकलने वाले ठोस कण शरीर में जम जाते हैं। यह फेफड़ों में धीरे-धीरे जम जाते हैं और उनकी श्वसन क्रिया धीमी हो जाती है। इससे व्यक्ति दमा का रोगी भी बन सकता है।
इतना लगता है अर्थदंड
फसल अवशेष जलाने पर अर्थदंड का भी प्रावधान है। फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ तक जमीन वाले किसान पर ढाई हजार, दो एकड़ से अधिक व पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसान पर पांच हजार तथा इससे अधिक जमीन वाले किसान पर 15 हजार रुपये प्रति घटना अर्थदंड लगाया जा सकता है।
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