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दस माह से मुख्यमंत्री कार्यालय में अटकी कटान निरोधी परियोजना की फाइल
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मंडावर के ग्राम सिमली के पास गंगा से हो कटान को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगवाई जा रही बल्लियां?
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। गंगा के कटान से निजात दिलाने के लिए तटबंध निरोधी परियोजना की फाइल करीब दस माह से मुख्यमंत्री के कार्यालय में अटकी हुई है। मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर होने का इंतजार है। हस्ताक्षर होने के बाद कटान निरोधी कार्य शुरू होने से गंगा किनारे बसे 28 गांवों को कटान से निजात मिल जाएगी।
गंगा के कटान से खादर क्षेत्र बसे गांव वाले परेशान हैं। बालावाली से रावली तक गंगा किनारे 28 गांव बसे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा किनारे बसे गांव वालों ने आंदोलन भी शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में पिछले साल नवंबर में रखी जा चुकी है। हालांकि इस परियोजना को अब तक मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद ही कटान निरोधी कार्य शुरू हो पाएंगे।
ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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शासन स्तर से मिलेगी मंजूरी
सिंचाई विभाग अफजलगढ़ के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार परियोजना बनाकर प्रेषित की जा चुकी है। शासन स्तर से ही इस परियोजना को मंजूरी मिलेगी।
कर रहे पूरा प्रयास: विधायक
भाजपा विधायक सुचि मौसम चौधरी के अनुसार वे कटान निरोधी कार्य कराने को मुख्यमंत्री से मिल चुकी हैं। उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। वे परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए पूरे प्रयास कर रही हैं।
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गंगा के कटान से खादर क्षेत्र बसे गांव वाले परेशान हैं। बालावाली से रावली तक गंगा किनारे 28 गांव बसे हैं। गांव वालों का दावा है कि गंगा के कटान से उनकी करीब दो लाख बीघा जमीन बह चुकी है। इस जमीन का आज तक कोई मुआवजा भी नहीं मिला है। गंगा किनारे कटान निरोधी कार्य कराने के लिए गंगा किनारे बसे गांव वालों ने आंदोलन भी शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि गंगा की धारा पांच किलोमीटर चौड़ी हो गई है। वे धारा के बीच में खाली जमीन पर खेती कर रहे हैं। जमीन के लिए उनका दूसरे जिले के किसानों से विवाद भी रहने लगा है। गंगा के कटान से निजात दिलाने को कटान निरोधी कार्य की परियोजना काफी पहले बन चुकी है। परियोजना में 61 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है। परियोजना को उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों से मंजूरी मिल चुकी है। यह फाइल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में पिछले साल नवंबर में रखी जा चुकी है। हालांकि इस परियोजना को अब तक मुख्यमंत्री स्तर से मंजूरी नहीं मिली है। मुख्यमंत्री की मंजूरी मिलने के बाद ही कटान निरोधी कार्य शुरू हो पाएंगे।
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ये गांव हैं गंगा तट पर
गंगा किनारे कुंदनपुर, टीप, फतेहपुर, सिमली, मिर्जापुर, कोहरपुर, राजारामपुर, रघुनाथपुर, डेबलगढ़, चाहड़वाला, वीरूवाला, रावली, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, सैफपुर, सिकोहाबाद, सिमली खुर्द, स्योहारा, मानवाला, मीरापुर, औरंगाबाद, शकूरपुर उर्फ गीदड़पुरा, बादशाहपुर, मानशाहपुर, भोगपुर, शहजादपुर, इच्छावाला आदि गांव बसे हुए हैं।
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शासन स्तर से मिलेगी मंजूरी
सिंचाई विभाग अफजलगढ़ के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार परियोजना बनाकर प्रेषित की जा चुकी है। शासन स्तर से ही इस परियोजना को मंजूरी मिलेगी।
कर रहे पूरा प्रयास: विधायक
भाजपा विधायक सुचि मौसम चौधरी के अनुसार वे कटान निरोधी कार्य कराने को मुख्यमंत्री से मिल चुकी हैं। उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया जा रहा है। वे परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए पूरे प्रयास कर रही हैं।