{"_id":"5797bc5c4f1c1b890221f10e","slug":"fight-for-the-rights-of-across","type":"story","status":"publish","title_hn":"हक के लिए आरपार की लड़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हक के लिए आरपार की लड़ाई
ब्यूरो/ अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 27 Jul 2016 01:09 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिजनौर। यूपी केन यूनियंस इंपलाइज फेडरेशन की बैठक में सीजनल कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण कराने पर जोर दिया गया। सीजनल कर्मचारियों की मांगों को लेकर 31 जुलाई को मुरादाबाद पहुंच कर गन्ना आयुक्त को मांगपत्र देने का निर्णय लिया।
यूपी केन यूनियंस इंपलाइज फेडरेशन की बैठक गन्ना समिति के कार्यालय पर जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार की अध्यक्षता और महामंत्री जुगल किशोर के संचालन में आयोजित की गई। बैठक में जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि सीजनल कर्मचारियों को अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष भी काम पर बुलाया जाना चाहिए।
अन्य वक्ताओं ने कहा कि समिति ने इस बार गन्ना सर्वेक्षण का कार्य चीनी मिलों पर छोड़ने से सीजनल कर्मचारियों की परेशानी बढ़ी है। वक्ताओं ने समिति के उच्चाधिकारियों से सीजनल कर्मचारियों का प्रमोशन कर उन्हें स्थाई करन की मांग की।
विज्ञापन
गन्ना आयुक्त से सीजनल कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण कराने की बात कही। बैठक में हरीश कुमार, प्रीतम सिंह, नूतन कुमार, सत्यप्रकाश सिंह, अनिल त्यागी, आदि ने विचार व्यक्त किए।
विज्ञापन
यूपी केन यूनियंस इंपलाइज फेडरेशन की बैठक गन्ना समिति के कार्यालय पर जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार की अध्यक्षता और महामंत्री जुगल किशोर के संचालन में आयोजित की गई। बैठक में जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि सीजनल कर्मचारियों को अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष भी काम पर बुलाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
अन्य वक्ताओं ने कहा कि समिति ने इस बार गन्ना सर्वेक्षण का कार्य चीनी मिलों पर छोड़ने से सीजनल कर्मचारियों की परेशानी बढ़ी है। वक्ताओं ने समिति के उच्चाधिकारियों से सीजनल कर्मचारियों का प्रमोशन कर उन्हें स्थाई करन की मांग की।
विज्ञापन
गन्ना आयुक्त से सीजनल कर्मचारियों की समस्याओं का निस्तारण कराने की बात कही। बैठक में हरीश कुमार, प्रीतम सिंह, नूतन कुमार, सत्यप्रकाश सिंह, अनिल त्यागी, आदि ने विचार व्यक्त किए।