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फीना में बुखार का ‘लॉकडाउन’, स्कूल और दुकानें बंद
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बिजनौर के नूरपुर क्षेत्र के गांव फीना में बुखार का प्रकोप फैलने से ग्रामीणों द्वारा बंद की गई दुक
- फोटो : BIJNOR
फीना में बुखार का ‘लॉकडाउन’, स्कूल और दुकानें बंद
नूरपुर/शिवालाकला (बिजनौर)। क्षेत्र के गांव फीना में एक सप्ताह पहले बुखार से दो बच्चों की मौत होने के बाद से बीमारी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। हालत यह है कि गांव के हर घर में कोई न कोई सदस्य बुखार से पीड़ित है। ग्रामीण में दहशत व्याप्त है, जिसके चलते लोग बच्चों को स्कूल भेजने तक से परहेज कर रहे हैं। बुखार का प्रकोप बढ़ने पर निजी स्कूल संचालकों ने तीन दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। गांव की ज्यादातर दुकानें भी बंद हैं। गांव में लॉकडाउन जैसे हालात हैं। स्वास्थ्य विभाग शिविर लगाने का दावा तो कर रहा है, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं।
गांव फीना में रोजाना बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस समय 100 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में हैं। गांव में बुखार के मरीज बढ़ने से सभी निजी स्कूल एवं इंटर कॉलेज के प्रबंधकों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित की। जिसमें शुक्रवार से तीन दिन तक स्कूल, कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया। क्योंकि बुखार से ग्रसित मरीज के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी चपेट में आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग गांव वालों की कोई सुध नहीं ले रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग अभी भी अंजान बना हुआ है।
गांव में बुखार की शुरुआत दो सप्ताह पहले हुई थी। शुरूआत में एक-दो ग्रामीण बुखार की चपेट में थे, लेकिन बाद में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। बुखार से ही बीते रविवार की रात रविंद्र शर्मा के पुत्र अभिषेक शर्मा व दलजीत प्रजापति के पुत्र ललित की मौत हो चुकी है। बुखार से पीड़ित हुए मुकेश कुमार, नरेश कुमार, जयवीर सिंह आदि ने बताया कि पहले शरीर में थकान हुई। जिसके बाद शरीर का तापमान बढ़ना शुरू हुआ। इसके बाद में तेज बुखार के साथ शरीर और सिर में दर्द रहा। जब जांच कराई तो खून में प्लेटलेट्स की कमी आई।
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स्वास्थ्य विभाग ने शिविर के नाम पर की खानापूर्ति
गांव फीना में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो बच्चों की मौत के बाद शिविर लगाया। जिसमें मरीजों की मलेरिया और डेंगू की जांच की गई। इसके अलावा उनकी कोई दूसरी जांच नहीं हुई। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मरीजों को दवाई दी, लेकिन उसके बाद उधर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोई सुध नहीं ली। जबकि इस समय हालत ये है कि बुखार से ग्रसित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गांव में दो दिन स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाया। जिसमें सिर्फ मलेरिया और डेंगू की जांच की। जबकि सरकारी अस्पतालों में भी चिकित्सक बुखार आने पर कोरोना की जांच कराते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिविर में बुखार के मरीजों की कोरोना जांच नहीं की। जिससे साफ पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर सिर्फ खानापूर्ति की है।
गांव के अधिकतर दुकानदार बुखार से पीड़ित
गांव फीना की 12 हजार से अधिक आबादी है। गांव में लगातार बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसी बीच शुक्रवार को स्कूल, कॉलेज के साथ-साथ गांव के अंदर की ज्यादातर दुकानें बंद कर दी गईं। वहीं, गांव के मेन बाजार, चांदपुर रोड पर अधिकांश दुकानें खुली हुई हैं। हरीश कुमार, मुकेश कुमार, सुशील कुमार गुप्ता, जयवीर सिंह, राजकुमार, धर्मपाल आदि ने बताया कि वह खुद बीमार हैं। बुखार होने के कारण से ही दुकानें नहीं खुल रही हैं। खुद का बचाव करने के लिए लोग घरों में आइसोलेट हो रहे हैं।
विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी बुखार की चपेट में
गांव फीना में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज, भारत माता इंटर कॉलेज, एसके पब्लिक स्कूल, एआरवी पब्लिक स्कूल, गायत्री पब्लिक स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर में दो दिन का अवकाश घोषित हुआ है। सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य कामेश्वर प्रसाद, इंडियन स्कूल की प्रधानाचार्या, आदेश कुमारी, दिग्विजय सिंह, प्रशांत कुमार शेखावत आदि का कहना है छात्र संख्या में कमी व शिक्षकों में बुखार को देखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि किसी छात्र, ग्रामीण व शिक्षक में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
गांव में शिविर लगवाने की मांग कर रहे ग्रामीण
फीना निवासी व्यापारी मुकेश कुमार का कहना है गांव में स्वास्थ्य विभाग को नियमित शिविर लगाकर इलाज करना चाहिए। किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में मच्छरों के प्रकोप है। गांव की नालियों की नियमित सफाई होनी चाहिए व उनमें कीटनाशक का छिड़काव होना चाहिए। प्रीति रानी का कहना है कि वह खुद बुखार से पीड़ित हैं। प्रशासन को गांव की सुध लेकर सुधार करना चाहिए। एसके इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य प्रशांत शेखावत का कहना है कि गांव में बुखार से बुरे हालत हैं। ग्रामीणों व अभिभावकों के अनुरोध पर विद्यालय में दो दिन का अवकाश किया गया है। ग्राम प्रधान पूजा रानी का कहना है कि गांव में नियमित साफ सफाई कराई जा रही है। तीन दिन से नालियों में दवाई का छिड़काव किया जा रहा है। शीघ्र ही फ़ांगिंग कराई जाएगी।
------- कोट
गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाकर जांच की है। अब स्थिति सामान्य है। गांव के सभी लोग वायरल फीवर की चपेट में हैं। जांच करने पर कोई अन्य बीमारी सामने नहीं आई है - डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ
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नूरपुर/शिवालाकला (बिजनौर)। क्षेत्र के गांव फीना में एक सप्ताह पहले बुखार से दो बच्चों की मौत होने के बाद से बीमारी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। हालत यह है कि गांव के हर घर में कोई न कोई सदस्य बुखार से पीड़ित है। ग्रामीण में दहशत व्याप्त है, जिसके चलते लोग बच्चों को स्कूल भेजने तक से परहेज कर रहे हैं। बुखार का प्रकोप बढ़ने पर निजी स्कूल संचालकों ने तीन दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। गांव की ज्यादातर दुकानें भी बंद हैं। गांव में लॉकडाउन जैसे हालात हैं। स्वास्थ्य विभाग शिविर लगाने का दावा तो कर रहा है, लेकिन ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से संतुष्ट नहीं हैं।
गांव फीना में रोजाना बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इस समय 100 से ज्यादा लोग बुखार की चपेट में हैं। गांव में बुखार के मरीज बढ़ने से सभी निजी स्कूल एवं इंटर कॉलेज के प्रबंधकों ने शुक्रवार को एक बैठक आयोजित की। जिसमें शुक्रवार से तीन दिन तक स्कूल, कॉलेज बंद करने का निर्णय लिया। क्योंकि बुखार से ग्रसित मरीज के संपर्क में आने से दूसरा व्यक्ति भी चपेट में आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग गांव वालों की कोई सुध नहीं ले रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग अभी भी अंजान बना हुआ है।
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गांव में बुखार की शुरुआत दो सप्ताह पहले हुई थी। शुरूआत में एक-दो ग्रामीण बुखार की चपेट में थे, लेकिन बाद में मरीजों की संख्या बढ़ती चली गई। बुखार से ही बीते रविवार की रात रविंद्र शर्मा के पुत्र अभिषेक शर्मा व दलजीत प्रजापति के पुत्र ललित की मौत हो चुकी है। बुखार से पीड़ित हुए मुकेश कुमार, नरेश कुमार, जयवीर सिंह आदि ने बताया कि पहले शरीर में थकान हुई। जिसके बाद शरीर का तापमान बढ़ना शुरू हुआ। इसके बाद में तेज बुखार के साथ शरीर और सिर में दर्द रहा। जब जांच कराई तो खून में प्लेटलेट्स की कमी आई।
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स्वास्थ्य विभाग ने शिविर के नाम पर की खानापूर्ति
गांव फीना में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दो बच्चों की मौत के बाद शिविर लगाया। जिसमें मरीजों की मलेरिया और डेंगू की जांच की गई। इसके अलावा उनकी कोई दूसरी जांच नहीं हुई। शिविर में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मरीजों को दवाई दी, लेकिन उसके बाद उधर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कोई सुध नहीं ली। जबकि इस समय हालत ये है कि बुखार से ग्रसित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। गांव में दो दिन स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाया। जिसमें सिर्फ मलेरिया और डेंगू की जांच की। जबकि सरकारी अस्पतालों में भी चिकित्सक बुखार आने पर कोरोना की जांच कराते हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिविर में बुखार के मरीजों की कोरोना जांच नहीं की। जिससे साफ पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर सिर्फ खानापूर्ति की है।
गांव के अधिकतर दुकानदार बुखार से पीड़ित
गांव फीना की 12 हजार से अधिक आबादी है। गांव में लगातार बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। इसी बीच शुक्रवार को स्कूल, कॉलेज के साथ-साथ गांव के अंदर की ज्यादातर दुकानें बंद कर दी गईं। वहीं, गांव के मेन बाजार, चांदपुर रोड पर अधिकांश दुकानें खुली हुई हैं। हरीश कुमार, मुकेश कुमार, सुशील कुमार गुप्ता, जयवीर सिंह, राजकुमार, धर्मपाल आदि ने बताया कि वह खुद बीमार हैं। बुखार होने के कारण से ही दुकानें नहीं खुल रही हैं। खुद का बचाव करने के लिए लोग घरों में आइसोलेट हो रहे हैं।
विद्यार्थियों के साथ शिक्षक भी बुखार की चपेट में
गांव फीना में सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, इंडियन पब्लिक इंटर कॉलेज, भारत माता इंटर कॉलेज, एसके पब्लिक स्कूल, एआरवी पब्लिक स्कूल, गायत्री पब्लिक स्कूल, सरस्वती शिशु मंदिर में दो दिन का अवकाश घोषित हुआ है। सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य कामेश्वर प्रसाद, इंडियन स्कूल की प्रधानाचार्या, आदेश कुमारी, दिग्विजय सिंह, प्रशांत कुमार शेखावत आदि का कहना है छात्र संख्या में कमी व शिक्षकों में बुखार को देखते हुए स्कूलों को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा है। हालांकि किसी छात्र, ग्रामीण व शिक्षक में कोरोना की पुष्टि नहीं हुई है।
गांव में शिविर लगवाने की मांग कर रहे ग्रामीण
फीना निवासी व्यापारी मुकेश कुमार का कहना है गांव में स्वास्थ्य विभाग को नियमित शिविर लगाकर इलाज करना चाहिए। किसान वीरेंद्र सिंह का कहना है कि गांव में मच्छरों के प्रकोप है। गांव की नालियों की नियमित सफाई होनी चाहिए व उनमें कीटनाशक का छिड़काव होना चाहिए। प्रीति रानी का कहना है कि वह खुद बुखार से पीड़ित हैं। प्रशासन को गांव की सुध लेकर सुधार करना चाहिए। एसके इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य प्रशांत शेखावत का कहना है कि गांव में बुखार से बुरे हालत हैं। ग्रामीणों व अभिभावकों के अनुरोध पर विद्यालय में दो दिन का अवकाश किया गया है। ग्राम प्रधान पूजा रानी का कहना है कि गांव में नियमित साफ सफाई कराई जा रही है। तीन दिन से नालियों में दवाई का छिड़काव किया जा रहा है। शीघ्र ही फ़ांगिंग कराई जाएगी।
------- कोट
गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिविर लगाकर जांच की है। अब स्थिति सामान्य है। गांव के सभी लोग वायरल फीवर की चपेट में हैं। जांच करने पर कोई अन्य बीमारी सामने नहीं आई है - डॉ. विजय कुमार गोयल, सीएमओ