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गांवों के कूडे़ से बनेगी खाद, बायोगैस और बिजली
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गांवों के कूडे़ से बनेगी खाद, बायोगैस और बिजली
बिजनौर। गांवों में कूड़े को देखकर अब लोग मुंह नहीं बनाएंगे, बल्कि यही कूड़ा किसानों के लिए सोना बनेगा। गांवों को गंदगी से मुक्ति मिलेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले 100 दिन में जिले के 79 गांवों में कूड़े से कंपोस्ट खाद और बायोगैस तैयार होगी। बाकि कूड़े का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा। इसके लिए इन गांवों में कूड़ा निस्तारण संयंत्र लगाने की तैयारी चल रही है। पंचायत राज विभाग ने योजना का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। पहले चरण में पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है।
शासन से 100 दिन की कार्य योजना जिले में आ गई है, जिसमें हर विभाग का लक्ष्य तय है। सभी विभाग तय निर्देश के अनुसार सक्षम अधिकारियों के समक्ष 100 दिन की योजनाओं का खाका खींचने में लगे हुए हैं। पंचायत राज विभाग ने पंचायतों का एजेंडा तय कर गांवों से ठोस एवं तरल कूड़े के निस्तारण को प्राथमिकता में रखा है। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि 100 दिन में 79 गांव में ठोस एवं तरल अपशिष्टों का निस्तारण होगा। इसमें हर ब्लॉक के पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को शामिल किया गया है। दूसरी तरफ जिला वर्ष 2017 में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गया है। अब जिले में ओडीएफ प्लस पर काम होगा।
खाद, बायोगैस को बेचकर बढ़ेगी आमदनी
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि तरल प्रबंधन के लिए पंचायतों में सोख पिट बनेंगे। घरेलू व बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए नाली नालों की सफाई होगी। ठोस अपशिष्टों के निस्तारण के लिए कूड़ा प्रबंधन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इनमें एसआरएलएम संयंत्र लगाकर ठोस कूड़ा उपयोगी बनेगा। कूड़े से कंपोस्ट खाद, बायो गैस तथा बिजली बनेगी, जो इन गांवों में ही दी जाएगी। बिजली, खाद और बायोगैस की बिक्री से पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी। इसके साथ ही गली, रास्तों व सड़कों पर फैले कूड़े को सेंटर तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाने पर भी काम चल रहा है।
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इन पंचायतों में चल रहे कूड़ा निस्तारण संयंत्र
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि कूड़ा निस्तारण संयंत्र हल्दौर ब्लॉक की पंचायत धर्मपुरा, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की पंचायत शेखपुरा तथा नजीबाबाद ब्लॉक की पंचायत जालबपुर गूदड़ में संचालित हैं। 100 दिन में 79 गांव में सेंटर स्थापित करने को अभियान चलेगा। संयंत्र परिवार आधारित है। संयंत्र लगाने के लिए धनराशि निश्चित है। 150 परिवारों तक सात लाख रुपये, 300 परिवारों तक 12 लाख तथा 500 या उससे अधिक परिवारों तक 20 लाख की धनराशि आवंटित है।
किस ब्लॉक में कितने गांव
अफजलगढ़ ब्लॉक में 18, हल्दौर ब्लॉक में 14, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 10, कोतवाली ब्लॉक में नौ, नूरपुर ब्लॉक में आठ, धामपुर व नजीबाबाद ब्लॉक में पांच-पांच, किरतपुर ब्लॉक में चार, स्योहारा ब्लॉक में तीन जलीलपुर ब्लॉक में दो तथा नहटौर ब्लॉक में सबसे कम मात्र एक गांव है।
----- कोट
100 दिन की कार्य योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सतत निगरानी होगी। गांव, ब्लॉक व जिला स्तर पर कर्मचारियों से संवाद होगा। ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। इसके बाद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किए जाएंगे - केपी सिंह, सीडीओ
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बिजनौर। गांवों में कूड़े को देखकर अब लोग मुंह नहीं बनाएंगे, बल्कि यही कूड़ा किसानों के लिए सोना बनेगा। गांवों को गंदगी से मुक्ति मिलेगी। यदि सब कुछ ठीक रहा तो अगले 100 दिन में जिले के 79 गांवों में कूड़े से कंपोस्ट खाद और बायोगैस तैयार होगी। बाकि कूड़े का इस्तेमाल बिजली बनाने में होगा। इसके लिए इन गांवों में कूड़ा निस्तारण संयंत्र लगाने की तैयारी चल रही है। पंचायत राज विभाग ने योजना का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। पहले चरण में पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों को इस योजना में शामिल किया गया है।
शासन से 100 दिन की कार्य योजना जिले में आ गई है, जिसमें हर विभाग का लक्ष्य तय है। सभी विभाग तय निर्देश के अनुसार सक्षम अधिकारियों के समक्ष 100 दिन की योजनाओं का खाका खींचने में लगे हुए हैं। पंचायत राज विभाग ने पंचायतों का एजेंडा तय कर गांवों से ठोस एवं तरल कूड़े के निस्तारण को प्राथमिकता में रखा है। डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि 100 दिन में 79 गांव में ठोस एवं तरल अपशिष्टों का निस्तारण होगा। इसमें हर ब्लॉक के पांच हजार से अधिक आबादी वाले गांवों को शामिल किया गया है। दूसरी तरफ जिला वर्ष 2017 में खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) हो गया है। अब जिले में ओडीएफ प्लस पर काम होगा।
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खाद, बायोगैस को बेचकर बढ़ेगी आमदनी
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि तरल प्रबंधन के लिए पंचायतों में सोख पिट बनेंगे। घरेलू व बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए नाली नालों की सफाई होगी। ठोस अपशिष्टों के निस्तारण के लिए कूड़ा प्रबंधन सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इनमें एसआरएलएम संयंत्र लगाकर ठोस कूड़ा उपयोगी बनेगा। कूड़े से कंपोस्ट खाद, बायो गैस तथा बिजली बनेगी, जो इन गांवों में ही दी जाएगी। बिजली, खाद और बायोगैस की बिक्री से पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी। इसके साथ ही गली, रास्तों व सड़कों पर फैले कूड़े को सेंटर तक पहुंचाने की व्यवस्था बनाने पर भी काम चल रहा है।
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इन पंचायतों में चल रहे कूड़ा निस्तारण संयंत्र
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि कूड़ा निस्तारण संयंत्र हल्दौर ब्लॉक की पंचायत धर्मपुरा, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक की पंचायत शेखपुरा तथा नजीबाबाद ब्लॉक की पंचायत जालबपुर गूदड़ में संचालित हैं। 100 दिन में 79 गांव में सेंटर स्थापित करने को अभियान चलेगा। संयंत्र परिवार आधारित है। संयंत्र लगाने के लिए धनराशि निश्चित है। 150 परिवारों तक सात लाख रुपये, 300 परिवारों तक 12 लाख तथा 500 या उससे अधिक परिवारों तक 20 लाख की धनराशि आवंटित है।
किस ब्लॉक में कितने गांव
अफजलगढ़ ब्लॉक में 18, हल्दौर ब्लॉक में 14, मोहम्मदपुर देवमल ब्लॉक में 10, कोतवाली ब्लॉक में नौ, नूरपुर ब्लॉक में आठ, धामपुर व नजीबाबाद ब्लॉक में पांच-पांच, किरतपुर ब्लॉक में चार, स्योहारा ब्लॉक में तीन जलीलपुर ब्लॉक में दो तथा नहटौर ब्लॉक में सबसे कम मात्र एक गांव है।
----- कोट
100 दिन की कार्य योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए सतत निगरानी होगी। गांव, ब्लॉक व जिला स्तर पर कर्मचारियों से संवाद होगा। ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा। इसके बाद मौके पर पहुंचकर निरीक्षण भी किए जाएंगे - केपी सिंह, सीडीओ