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पर्चियाें के लिए किसानों का हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:56 PM IST
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नजीबाबाद चीनी मिल में हंगामा कर रहे किसानों को आश्वासन देते प्रधान प्रबंधक।
- फोटो : अमर उजाला
नजीबाबाद में गन्ना पर्ची जारी न करने के विरोध में किसानों ने किसान सहकारी चीनी मिल पहुंचकर हंगामा किया। किसानों का आरोप है कि चीनी मिल प्रशासन गेट और गन्ना क्रय केंद्रों पर समानुपात प्रक्रिया के अंतर्गत गन्ने की खरीद नहीं कर रहा है। मिल के प्रधान प्रबंधक ने 20 अप्रैल तक किसानों को पर्याप्त गन्ना पर्चियां भेजने का आश्वासन दिया।
कोटद्वार मार्ग स्थित किसान सहकारी चीनी मिल परिसर में किसानों ने सोमवार सुबह जमकर हंगामा किया। इकबाल सिंह, सतविंदर सिंह पोप, गुरजीत सिंह काका, सर्वेश गहलौत, सुखजिंदर गोल्डी का आरोप था कि चीनी मिल गेट पर किसानों का गन्ना नहीं लिया जा रहा है, न ही किसानों को पर्चियां जारी की जा रही हैं। मिल प्रशासन चीनी मिल गेट और गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद में किसानों में भेदभाव कर रहा है।
उधर, जिला पंचायत सदस्य यशवीर सिंह, पूर्व प्रधान नौबहार सिंह, करन सिंह, बेगराज सिंह ने कहा कि किसानों के खेतों में अभी काफी गन्ना खड़ा है। इसके बावजूद चीनी मिल द्वारा गन्ना सेंटरों के माध्यम से गन्ने की खरीद नहीं की जा रही है। चीनी मिल प्रशासन के खिलाफ लामबंद किसानों के गुट गन्ने की समानुपातिक खरीद के मामले पर आपस में ही उलझने लगे। हंगामा बढ़ने पर चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक दानवीर सिंह, मुख्य गन्ना अधिकारी डॉ. एसएस ढाका, मिल समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप मौके पर पहुंचे। किसानों ने उन्हें अपने बीच बैठाकर समस्या से अवगत कराया। बताया कि गन्ने की समानुपाती प्रक्रिया में खरीद न होने से किसान खेत खाली नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना खेतों में खड़ा होने से किसान अगली फसल की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
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जीएम ने स्पष्ट किया कि गन्ने का बेसिक कोटा नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन किसानों का समस्त गन्नाज खरीदा जाएगा। 20 अप्रैल तक पर्याप्त गन्ना पर्चियां किसानों के पास भेज दी जाएंगी। इस दौरान डॉ. अरपिंदर सिंह, कुलवंत सिंह, ईशम सिंह, अवतार सिंह, सतीश कुमार, करन सिंह, हरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। एहतियात के तौर पर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह धामा के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।
सप्ताह में तीन दिन गांवों में रहें लेखपाल
बिजनौर में भाकियू की बैठक में हल्का लेखपालों ने तीन दिन गांवों में रहकर शिकायत निपटाने का मामला उठा है। यूनियन ने मांगों को लेकर छह सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार को दिया है। यूनियन पदाधिकारी मांगों को लेकर डीएम से मिलेंगे। भाकियू की बैठक तहसील अध्यक्ष विकास कुमार की अध्यक्षता और धमेंद्र राठी के संचालन में गन्ना समिति परिसर में हुई। किसानों ने जमीनों के दाखिल खारिज की शिकायत उठाई। आरोप लगाया कि किसानों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। अधिकारी किसानों की बात नहीं सुनते हें। जनसेवा केंद्रों से प्राप्त फरदों को माना नहीं जाता है। किसान छोटी छोटी समस्याओं के लिए तहसील के चक्कर काटता रहता है। मांग की गई कि तहसील प्रशासन लेखपाल का गांवों में कम से कम तीन दिन रहना सुनिश्चित करें। इस बारे में कई बार उच्च अधिकारियों से कहा गया है। परंतु कुछ नही हुआ है। इसके बाद किसान तहसील पहुंचे। तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया। मांग पत्र में बंदोबस्त के कार्यों को प्राथमिकता से निपटाने तथा लंबित दाखिल खारिज प्रकरणों को शीघ्र निपटाने पर जोर दिया गया है। जिला उपाध्यक्ष विजय चौधरी, ब्लाक अध्यक्ष विजय सिंह, पंकज कुमार, कामेंद्र कुमार, कैलाश, छतरपाल, रजनीश आदि रहे।
किसानों की समस्या का समाधान करें
नगीना में भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक में गन्ना पर्ची की समस्या दूर करने और प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की बढ़ाई दर वापस लेने की मांग की गई। गन्ना समिति परिसर में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसानों को गन्ना पर्ची समय पर नहीं मिल रही है। किसान परेशान हैं। कहा कि बिजली दर बढ़ने से किसानों के ऊपर भार बढ़ गया है। किसानों को जब सरकार 14 दिन के अंदर गन्ना भुगतान नहीं करा सकती तो बिजली दर बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। गन्ना समिति सचिव धर्मेंद्र सिंह को सौंपे ज्ञापन में किसानों के खेतों में खड़े गन्ने का सर्वे कराकर पर्ची दिलाने, मिल गेट पर गन्ना बासी बताकर किसानों का उत्पीड़न बंद कराने, खेतों में गन्ना खड़ा रहने तक केंद्रों पर तौल कराने, गन्ना भुगतान 14 दिन के अंदर कराने की मांग की। प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाई गई विद्युत दरों को वापस लेने की मांग की गई। पंचायत में चेतावनी दी गई कि यदि यूनियन की मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो यूनियन आंदोलन किया जाएगा। पंचायत में समरपाल सिंह, चंद्रपाल सिंह, बलजीत सिंह, राजपाल सिंह, अंकित कुमार, मास्टर विक्रम सिंह, जयपाल सिंह, ओमपाल सिंह, अनूप, वीर सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह आदि रहे। ब्यूरो
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कोटद्वार मार्ग स्थित किसान सहकारी चीनी मिल परिसर में किसानों ने सोमवार सुबह जमकर हंगामा किया। इकबाल सिंह, सतविंदर सिंह पोप, गुरजीत सिंह काका, सर्वेश गहलौत, सुखजिंदर गोल्डी का आरोप था कि चीनी मिल गेट पर किसानों का गन्ना नहीं लिया जा रहा है, न ही किसानों को पर्चियां जारी की जा रही हैं। मिल प्रशासन चीनी मिल गेट और गन्ना क्रय केंद्रों पर गन्ना खरीद में किसानों में भेदभाव कर रहा है।
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उधर, जिला पंचायत सदस्य यशवीर सिंह, पूर्व प्रधान नौबहार सिंह, करन सिंह, बेगराज सिंह ने कहा कि किसानों के खेतों में अभी काफी गन्ना खड़ा है। इसके बावजूद चीनी मिल द्वारा गन्ना सेंटरों के माध्यम से गन्ने की खरीद नहीं की जा रही है। चीनी मिल प्रशासन के खिलाफ लामबंद किसानों के गुट गन्ने की समानुपातिक खरीद के मामले पर आपस में ही उलझने लगे। हंगामा बढ़ने पर चीनी मिल के प्रधान प्रबंधक दानवीर सिंह, मुख्य गन्ना अधिकारी डॉ. एसएस ढाका, मिल समिति के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप मौके पर पहुंचे। किसानों ने उन्हें अपने बीच बैठाकर समस्या से अवगत कराया। बताया कि गन्ने की समानुपाती प्रक्रिया में खरीद न होने से किसान खेत खाली नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना खेतों में खड़ा होने से किसान अगली फसल की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं।
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जीएम ने स्पष्ट किया कि गन्ने का बेसिक कोटा नहीं बढ़ाया जाएगा, लेकिन किसानों का समस्त गन्नाज खरीदा जाएगा। 20 अप्रैल तक पर्याप्त गन्ना पर्चियां किसानों के पास भेज दी जाएंगी। इस दौरान डॉ. अरपिंदर सिंह, कुलवंत सिंह, ईशम सिंह, अवतार सिंह, सतीश कुमार, करन सिंह, हरेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। एहतियात के तौर पर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह धामा के नेतृत्व में पुलिस बल तैनात रहा।
सप्ताह में तीन दिन गांवों में रहें लेखपाल
बिजनौर में भाकियू की बैठक में हल्का लेखपालों ने तीन दिन गांवों में रहकर शिकायत निपटाने का मामला उठा है। यूनियन ने मांगों को लेकर छह सूत्रीय ज्ञापन तहसीलदार को दिया है। यूनियन पदाधिकारी मांगों को लेकर डीएम से मिलेंगे। भाकियू की बैठक तहसील अध्यक्ष विकास कुमार की अध्यक्षता और धमेंद्र राठी के संचालन में गन्ना समिति परिसर में हुई। किसानों ने जमीनों के दाखिल खारिज की शिकायत उठाई। आरोप लगाया कि किसानों का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। अधिकारी किसानों की बात नहीं सुनते हें। जनसेवा केंद्रों से प्राप्त फरदों को माना नहीं जाता है। किसान छोटी छोटी समस्याओं के लिए तहसील के चक्कर काटता रहता है। मांग की गई कि तहसील प्रशासन लेखपाल का गांवों में कम से कम तीन दिन रहना सुनिश्चित करें। इस बारे में कई बार उच्च अधिकारियों से कहा गया है। परंतु कुछ नही हुआ है। इसके बाद किसान तहसील पहुंचे। तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार को मांगों को लेकर ज्ञापन दिया। मांग पत्र में बंदोबस्त के कार्यों को प्राथमिकता से निपटाने तथा लंबित दाखिल खारिज प्रकरणों को शीघ्र निपटाने पर जोर दिया गया है। जिला उपाध्यक्ष विजय चौधरी, ब्लाक अध्यक्ष विजय सिंह, पंकज कुमार, कामेंद्र कुमार, कैलाश, छतरपाल, रजनीश आदि रहे।
किसानों की समस्या का समाधान करें
नगीना में भारतीय किसान यूनियन की मासिक बैठक में गन्ना पर्ची की समस्या दूर करने और प्रदेश सरकार द्वारा बिजली की बढ़ाई दर वापस लेने की मांग की गई। गन्ना समिति परिसर में हुई बैठक में वक्ताओं ने कहा कि किसानों को गन्ना पर्ची समय पर नहीं मिल रही है। किसान परेशान हैं। कहा कि बिजली दर बढ़ने से किसानों के ऊपर भार बढ़ गया है। किसानों को जब सरकार 14 दिन के अंदर गन्ना भुगतान नहीं करा सकती तो बिजली दर बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। गन्ना समिति सचिव धर्मेंद्र सिंह को सौंपे ज्ञापन में किसानों के खेतों में खड़े गन्ने का सर्वे कराकर पर्ची दिलाने, मिल गेट पर गन्ना बासी बताकर किसानों का उत्पीड़न बंद कराने, खेतों में गन्ना खड़ा रहने तक केंद्रों पर तौल कराने, गन्ना भुगतान 14 दिन के अंदर कराने की मांग की। प्रदेश सरकार द्वारा बढ़ाई गई विद्युत दरों को वापस लेने की मांग की गई। पंचायत में चेतावनी दी गई कि यदि यूनियन की मांगों को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो यूनियन आंदोलन किया जाएगा। पंचायत में समरपाल सिंह, चंद्रपाल सिंह, बलजीत सिंह, राजपाल सिंह, अंकित कुमार, मास्टर विक्रम सिंह, जयपाल सिंह, ओमपाल सिंह, अनूप, वीर सिंह, डॉ. धर्मवीर सिंह आदि रहे। ब्यूरो